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2005 में जब ये बांग्लादेशी घुसपैठिए कम्युनिस्ट पार्टी को वोट देते थे, तो उस समय ममता जी ने उनका विरोध किया था -- अमित शाह

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह  ने शनिवार (11 अगस्‍त) को कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 'वोट बैंक की राजनीति' के कारण असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का विरोध किया है. शाह ने ममता बनर्जी से पूछा, 'आप बांग्लादेशी घुसपैठियों को क्यों रखना चाहती हैं?' उन्होंने राज्य के लोगों से  तृणमूल कांग्रेस  की सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया. शाह ने कहा कि तृणमूल सरकार ने बांग्लादेश से घुसपैठ के साथ-साथ भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया है. इस बयानबाजी पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है. एनआरसी का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा, 'ममता दीदी, एनआरसी आपके रोकने से नहीं रुकेगी। एनआरसी घुसपैठियों को भगाने के लिए है और असम में इसे कानूनी तरीके से लागू करवाया जाएगा। 2005 में जब ये बांग्लादेशी घुसपैठिए कम्युनिस्ट पार्टी को वोट देते थे, तो उस समय ममता जी ने उनका विरोध किया था और आज वही लोग तृणमूल कांग्रेस का वोट बैंक हैं।' अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के संस्...

राज्यसभा चुनाव: हारी हुई बाजी क्यों लड़ रहे हैं रॉबिन देब व सीपीएम

सीपीएम नेता रॉबिन देब पश्चिम बंगाल से राज्यसभा चुनाव में वामफ्रंट के उम्मीदवार हैं. 294 सदस्यीय विधानसभा में वामफ्रंट के फिलहाल 30 विधायक हैं. वैसे जीतकर 32 आये थे. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 49 विधायकों का वोट मिलना जरूरी है. दूसरी तरफ सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की महेशतला से विधायक कस्तूरी दास के निधन के बाद तृणमूल कांग्रेस विधायकों की संख्या 213 है. ऐसे में तृणमूल कांग्रेस के चार उम्मीदवारों को वोट देने के बाद भी तृणमूल कांग्रेस के पास 17 वोट अतिरिक्त है. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी पहले ही घोषणा कर चुकी हैं कि पांचवें व अंतिम सीट के लिए अतिरिक्त 17 वोट कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी को दिया जाएगा. कांग्रेस विधायकों की संख्या वैसे तो 44 थी लेकिन अभी भी आधिकारिक तौर पर 42 है. इसमें भी कुछ विधायक तृणमूल कांग्रेस से संपर्क में हैं. ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार का जीतना भी तय है. अब सवाल है कि फिर हारी हुई बाजी क्यों लड़ रहे हैं रॉबिन देब व सीपीएम. रॉबिन देब ही क्यों और कोई क्यों नही  राजनीतिक विश्लेषकों के जेहन में कई सवाल हैं. पहला, सीपीएम के तपन कु...

बंगाल में आरएसएस के स्कूलों को नहीं चलने देगी ममता सरकार : पार्थ चटर्जी

बंगाल में ममता सरकार अपने अंतिम पड़ाव की ओर अग्रसर होने के साथ-साथ आरएसएस पर प्रहार करने का शायद मन बना चुकी है। प्राप्त समाचार के अनुसार, शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा है कि राज्य सरकार बंगाल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) संचालित स्कूलों को चलने नहीं देगी। आखिर संघ संचालित स्कूलों को बंद कर ममता सरकार क्या सिद्ध करना चाहती है? राज्य के विभिन्न भागों में खास कर उत्तर बंगाल में आरएसएस संचालित 125 स्कूल चल रहे है। इसमें से किसी स्कूल प्रबंधन ने सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं लिया है। यदि इन स्कूलों ने अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं है, फिर किस आधार पर अबतक ये स्कूल चलते रहे? ऐसे स्कूलों को सरकार चलने नहीं देगी। क्या ममता सरकार अगला चुनाव संघ के विरुद्ध मोर्चा खोलकर लड़ना चाहती है? चटर्जी ने विधानसभा में शिक्षा बजट पर हुई बहस के जवाबी भाषण में यह बातें कही है। इस तरह के राज्य के विभिन्न भागों में और 493 स्कूल चल रहे जिन पर सरकार कड़ी नजर रख रही है। जांच के बाद इन स्कूलों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने विधानस...

त्रिपुरा: भाजपा-माकपा में पहली बार सीधी टक्कर

देश की राजनीति में कभी काफी महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली सीपीएम की आज महज तीन राज्यों में उपस्थिति है. पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा. दूसरी तरफ देश के डेढ़ दर्जन राज्यों में भाजपा की न केवल उपस्थिति है बल्कि सरकारें हैं. देश के अठारह राज्यों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद त्रिपुरा ही वह पहला राज्य है जहां पहली बार भाजपा और माकपा में सीधी टक्कर हो रही है. त्रिपुरा में भाजपा-माकपा में पहली बार सीधी टक्कर में मुक़ाबला दिलचस्प है. केरल के बाद त्रिपुरा पर माकपा की नजर इससे पहले केरल की चुनावी टक्कर में मुक़ाबला कांग्रेस और यूडीएफ के बीच था तो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस भी थी. त्रिपुरा में आज तक भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल के निशान पर एक भी विधायक निर्वाचित नहीं हुआ है. बावजूद इसके यह सवाल पूछा जा रहा है कि भाजपा और माकपा में पहली बार हो रही सीधी टक्कर में आखिर जीतेगा कौन? त्रिपुरा में सत्ता सिंहासन पाने का जादुई आंकड़ा 31 है. दरअसल, त्रिपुरा में माकपा के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा एवं भाजपा के बीच चुनावी जंग पर सबकी निगाहें टिकी हैं. त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभ...

नोटबंदी के बाद बसपा की आमदनी 266 फीसदी बढ़ी

मोदी सरकार द्वारा नोट बंदी पर आज तक विरोधी चीखते-चिल्लाते नज़र आते हैं कि "देश बर्बाद हो गया, व्यापार ठप्प हो गए..." आदि आदि। लेकिन किसी अपवाद को छोड़, किसी भी राजनीतिक पार्टी की फंडिंग में कोई कमी नहीं आयी। जो प्रमाणित करता है कि व्यापार पर भी फर्क नहीं पड़ा, क्योकि इन पार्टियों को कोई वेतनभोगी तो दान देने से रहा। मन्दिरों में आने वाले दानपात्र पर गिद्ध की नज़र रखी जाती है, लेकिन सियासती पार्टियों में जो मोटा दान आ रहा है, कोई बोर्ड नहीं बनता और न ही कोई मांग करता है कि जो महीने का खर्चा है, बोर्ड से लो और शेष सरकारी राजस्व में जाएगा, क्या यह मंदिरों के साथ बेइन्साफी नहीं?   देखिए उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा आम चुनाव से पहले बसपा की आय में बंपर इजाफा हुआ। नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी का भी असर बसपा पर नहीं पड़ा।  जहां पार्टी की 2015-16 की कुल आय 47.385 करोड़ थी वहीं 2016-17 में यह बढ़कर 173.58 करोड़ रुपये हो गई। फरवरी 7 को इलेक्शन वॉच की ओर से जारी रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। चुनाव सुधार के लिए काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) न...

पश्चिम बंगाल : भाजपा हार कर भी लगातार जीत रही है

बजट के दिन तीन लोकसभा और दो विधानसभा सीटों के उपचुनाव का परिणाम भी आया और भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली. मीडिया में बजट के बाद राजस्थान की तीनों सीटें को कवरेज मिली, जिसे भाजपा ने गंवा दिया. पश्चिम बंगाल की दोनों सीटों को वह कवरेज नहीं मिला जो राजस्थान को मिला. हकीकत तो यह है कि भाजपा को यहां भी जीत नहीं मिली लेकिन यह सीटें भी इनकी नहीं थीं. कामयाबी तो जरूर मिली, भाजपा दोनों ही सीटों पर दूसरे नंबर पर रही. राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान भी जिस बात ने खींचा वो यह है बीजेपी के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी. उलुबेड़िया में जहां 2014 के चुनावों में उसका वोट 11.5 फ़ीसदी था वो अब 23.29 फ़ीसदी हो गया है. वैसे ही नोआपाड़ा में भी वोट प्रतिशत में इजाफा देखने को मिला. दूसरी तरफ़ दो मुख्य विपक्षी पार्टियों लेफ़्ट फ़्रंट और कांग्रेस के वोट प्रतिशत में काफ़ी गिरावट आई है. ऐसा नहीं है कि पहली बार भाजपा ने राज्य के चुनावों में दूसरा स्थान हासिल किया है. दिलचस्प यह है कि पार्टी ने तेज़ी से कुछ सालों में अपने वोट प्रतिशत को बढ़ाया है. पिछले साल हुए कांथी विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ...

‘आप’ के समर्थन में टीएमसी और शिवसेना, ममता

जनवरी 19  को निर्वाचन आयोग ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी थी। अब यह मामला राष्ट्रपति के पास है जो इस मामले पर आखिरी फैसला लेंगे। विधायकों की सदस्यता रद्द होने का सीधा असर बेशक दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार पर ना पड़े लेकिन इससे पार्टी की बुनियाद कमजोर जरूर हो सकती है। आप के इस संकट में उनके साथ विपक्ष के कई नेता खड़े नजर आ रहे हैं। जिन्होंने पार्टी के समर्थन में अपने बयान दिए हैं। शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने विधायकों की सदस्यता रद्द होने पर कहा- निर्वाचन आयोग (ईसी) के निर्णय पर एक प्रश्नचिह्न लगा हुआ है। जब इस तरह के मामले आते हैं तब ईसी पर सवाल उठता है। इसके लिए वह (ईसी) खुद जिम्मेदार है। अवलोकन करिये :-- खतरे में केजरीवाल के 20 विधायकों की सदस्यता, चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति को भेजी सिफारिश चुनाव आयोग ने लाभ का पद के मामले में दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी यानी आप के 20 विधायकों के भाग्य का फैसला कर लि... NIGAMRAJENDRA28.BLOGSPOT.PE http://nigamrajendra28.blogspot.in/2018/01/aap.html AA...

ममता बनर्जी का जगा हिन्दुत्व प्रेम, बना रहीं यह योजना, भाजपा चौकस

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  तृणमूल कांग्रेस प्रमुख व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुजरात में मिली भाजपा की जीत को लाज बचाने वाली जीत करार दिया है। जीत के संदर्भ में भाजपा पर तंज कसते हुये ममता बनर्जी ने कहा है कि यह जीत भाजपा की नैतिक हार को दर्शाता है। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव परिणामों का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर दूरगामी असर होगा।  हिन्दुओं के इन मकानों को किसने तोडा? विजयवर्गीय ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दुख होगा कि बीजेपी दोनों राज्यों में जीती है। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में हमारी जीत का पूरे देश पर असर होगा। इसका बंगाल की राजनीति पर भी दूरगामी असर पड़ेगा। भाजपा की जीत को नैतिक हार बताने वाली ममता के ट्वीट पर वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह चाहती थीं कि गुजरात में भाजपा हार जाये, इसलिए भाजपा के खिलाफ ट्वीट करने के बजाये, ममता बनर्जी को दुख जताना चाहिये कि हम चुनावों में जीते।...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)