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कम्युनिस्ट पार्टी का 24 वर्ष बनवास समाप्त हुआ

आर..बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  राजनीति तेरी भी लीला अपरम्पार हैं, कोई नहीं कह सकता कि कब कौन अपना सिक्का जमा ले। कहते हैं, इतिहास लिखा नहीं जाता, दोहराया जाता है।  देश का बँटवारा होते समय कायदे आज़म जिन्ना ने महात्मा गाँधी को कहा था "हिन्दुस्तान में मुस्लिम लीग को हमेशा के लिए बैन कर दो। देखो मुसलमानों की आवाज़ है 'हँसते-हँसते लिया पाकिस्तान, लड़कर लेंगे हिन्दुस्तान' " लेकिन तुष्टिकरण को अपना माई बाप मानने वालों ने नहीं सुना। नेहरू ने उसे केरल राज्य तक सीमित रखा, लेकिन लौह-महिला नेहरू से भी दस कदम आगे निकल गयीं, वह मुस्लिम लीग को केरल से बाहर ले आयीं। कई चुनावों में कांग्रेस का सिर दर्द बनी।बरहाल, कौन लेकर आयी, कांग्रेस। और अब डूबती कम्युनिस्ट पार्टी में नई जान कांग्रेस ने फूंक दी।  वास्तव में राहुल गाँधी को पार्टी का अध्यक्ष बनाए जाना, मात्र एक खानापूर्ति है। इस सच्चाई से कांग्रेस का हर वरिष्ठ नेता वाकिफ है कि "कांग्रेस के बुरे दिन शुरू हो चुके हैं और कोई अब कांग्रेस की खोई साख को वापस नहीं ला सकता। फूटने दो हर बदनामी का ठीकरा इस परिवार के सर...

हारने के आदी राहुल को नहीं पता जीत का मतलब-- शहजाद पूनावाला

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की हार के बाद एक बार फिर से राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस और राहुल के खिलाफ मोर्चा खोले शहजाद पूनावाला ने पार्टी के नए अध्यक्ष पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि राहुल को विक्ट्री का ‘वी’ भी नहीं पता है। साथ ही गुजरात में कांग्रेस के प्रदर्शन को ‘नैतिक जीत’ बताने के तर्क को भी बेतुका करार दिया है। हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में हिमाचल के मुकाबले गुजरात में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा है। भाजपा को दो दशक से भी ज्यादा समय के बाद सौ से कम सीटें आई हैं। पार्टी नेता और राजनीतिक विश्लेषक गुजरात में कांग्रेस के प्रदर्शन को नैतिक जीत बता रहे हैं। एक टीवी चैनल से बात करते हुए शहजाद पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी को हारने की आदत हो गई है, इसलिए हार को जीत बताया जा रहा है। पूनावाला ने कहा, ‘राहुल गांधी काे एक डिक्शनरी खोलकर उसके ‘वी’ सेक्शन में जाकर विक्ट्री शब्द तलाशना चाहिए। इसका मतलब दुश्मनों या प्रतिद्वंद्वियों को हराना होता है। जब आप हारते हैं तो वह जीत नहीं होती है। लेकिन, राहुल हारने के इतने अभ्यस्त हो चुके हैं क...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)