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आर्टिकल 370 ख़त्म करने पर जम्मू-कश्मीर और भारत का रिश्ता भी ख़त्म : महबूबा मुफ़्ती की धमकी

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख  महबूबा मुफ्ती  ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। आर्टिकल 370 को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि इसे खत्म किया गया तो फिर जम्मू-कश्मीर और भारत का रिश्ता खत्म हो जाएगा। इसी साल फरवरी में भी उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा था कि यदि अनुच्छेद 35 एक के साथ छेड़छाड़ होती है तो आप उस माहौल का सामना करेंगे जिसे आपने 1947 के बाद से आप ने नहीं देखा होगा। मार्च 30 को श्रीनगर में एक रैली को संबोधित करते हुए महबूबा ने कहा, यदि अनुच्छेद 370 से छेड़छाड़ होती है तो फिर आपको दुबारा हिंदुस्तान और जम्मू-कश्मीर का रिश्ता बनाना पड़ेगा। यह किन शर्तों पर बनेगा यह मुझे नहीं मालूम, फिर तो उसके लिए नई बातचीत होगी। फिर क्या आप 1947 की तरह एक मुस्लिम बाहुल राज्य के साथ किन शर्तों पर मिलना चाहेंगे या नहीं मिलना चाहेंगे? हमें भी दोबारा सोचना पड़ेगा।' अवलोकन करें:- NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM चाहे देश विरोधी कहें, लेकिन मैं एयर स्ट्राइक का समर्थन नहीं करती हूं : महबूबा मुफ़्ती पूर्व मुख्यमंत्री और पी...

कश्मीर में 'दो प्रधान, दो विधान' का विरोध करने वाले डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी

भाजपा के प्रमुख बड़े नेताओं में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सबसे पहले आते है। कश्मीर में धारा 370 को खत्म करने या उस पर बहस के मुद्दे का इस्तेमाल भाजपा तत्कालीन भारतीय जनसंघ के समय से चुनावी वादे के रूप में करती रही है। यही धारा है जो घाटी को भारत का हिस्सा होते हुए भी कुछ अतिरिक्त अधिकार देती है। इस पर सबसे पहली चोट डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी। उन्होंने उस समय कश्मीर में दो प्रधानमंत्री का विरोध किया। जम्मू-कश्मीर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने धारा 370 का विरोध शुरू किया। उन्होंने एक देश में दो विधान, एक देश में दो निशान, एक देश में दो प्रधान- नहीं चलेंगे नहीं चलेंगे जैसे नारे दिए। डाॅ. मुखर्जी सिर्फ 33 साल की उम्र में कुलपति बन गए थे. ये रिकॉर्ड आज तक कायम है । डॉ. मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई, 1901 को एक बंगाली परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम जोगमाया देवी मुखर्जी था और पिता आशुतोष मुखर्जी बंगाल के एक जाने-माने व्यक्ति और कुशल वकील थे। डॉ. मुखर्जी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्रथम श्रेणी में 1921 में प्राप्त की थी। इसके बाद उन्होंने 1923 में एम.ए...

धारा 35A : महबूबा के बाद फारूक अब्दुल्ला की चेतावनी

नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष एवं सांसद  फारूक अब्दुल्ला  ने कहा है कि उनकी पार्टी पंचायत चुनाव में भाग नहीं लेगी जब तक अनुच्‍छेद 35ए पर केंद्र सरकार और राज्‍य सरकारों अपनी स्थिति साफ नहीं करतीं. साथ ही उन्‍हें इस अनुच्‍छेद के संरक्षण के लिए कोर्ट और बाहर दोनों जगह प्रभावी कदम उठाने होंगे. इससे पहले  अलगाववादियों  ने जम्मू-कश्मीर में पंचायत और स्थानीय निकाय के चुनावों का बहिष्कार करने का आह्वान किया था. आज ही जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी धारा 370 और अनुच्छेद 35ए पर सरकार को चेतावनी दी थी. तथाकथित ज्वाइंट रेजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) की बैठक के बाद इस आशय का एक बयान जारी किया गया था. जेआरएल में सैयद अली गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और मोहम्मद यासीन मलिक शामिल हैं. यह बैठक गिलानी के हैदरपुरा स्थित आवास पर हुई थी. View image on Twitter ANI ✔ @ANI J&K National Conference will not participate in these elections (panchayat), unless & until, the Government of India & the state government clears ...

संतों की बड़ी चेतावनी: संसद के मानसून सत्र में ये मुद्दे नहीं उठाए गए तो संत निकालेंगे पदयात्रा

जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य संतों ने केंद्र सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में हिंदू हितों से जुड़े गंगा, गाय और राममंदिर जैसे मुद्दों पर गंभीरता न दिखाने का आरोप लगाया। निरंजनी अखाड़े में हुई संत समाज की बैठक में एकमत होकर निर्णय लिया कि मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने अगर गाय, गंगा और राम मंदिर जैसे मुद्दों पर ठोस निर्णय नहीं लिया तो हरिद्वार के संत दिल्ली तक पदयात्रा निकालकर सरकार को जगाने का काम करेंगे। मायापुर में श्री निरंजनी अखाड़े में हुई बैठक में  जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य ने कहा कि संत समाज को एकजुट होकर हिंदू समाज के हितों के लिए आगे आना होगा। केंद्र सरकार को गंगा, गाय व मंदिर निर्माण को लेकर मानसून सत्र में ठोस निर्णय लेना चाहिए। केंद्र सरकार ठोस कानून बनाकर हिंदुओं की आस्था का सम्मान करते हुए मंदिर निर्माण की अड़चनों को दूर करे। गो संरक्षण के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने होंगे। साथ ही आम नागरिक को भी गो संवर्द्धन व रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करना होगा। उन्होंने कहा कि गोमुख से लेकर गंगा सागर तक गंगा में स...

क्या आजाद भारत का सबसे बड़ा फैसला होगा? : कश्मीर से हटेगी धारा-370, राष्ट्रपति लगाएंगे मुहर

जब कश्मीर का भारत में विलय हुआ था तब सरदार पटेल के विरोध के बाद भी धारा 370 को संविधान में जोड़ा गया। कश्मीर में आज भी बहुत से भारत के कानून पूर्ण रूप से लागु नहीं होते । धारा 370 भारतीय अखंडता के लिए एक नासूर की तरह है । जब तक इसे हटाया नहीं जाता तब तक कश्मीरी आतंकवाद से छुटकारा नहीं मिल सकता । एक देश एक कानून और 370 के खिलाफ लड़ते हुए कश्मीर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 23 जून 1953 को मृत्यु हो गयी थी । जिसे बीजेपी बलिदान दिवस के रूप में मनाती है। बीजेपी और संघ शुरुआत से ही 370 के खिलाफ रहे है । अब जब बीजेपी ने पीडीपी को तलाक दे ही दिया है तो अब ये क़यास लगाये जा रहे है की बीजेपी 23 जून बलिदान दिवस के मौके पर धारा 370 को ख़त्म कर सकती है। जिसे तुष्टिकरण के आगे नतमस्तक होती कोई भी सरकार समाप्त करने का साहस नहीं कर पायी। यदि ऐसा होता है, देश की डॉ श्यामा प्रसाद मुख़र्जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जिस कारण जेल में बन्द कर मृत्यु के आगोश में भेज दिया गया था।  अवलोकन करें:-- http://nigamrajendra28.blogspot.in/2017/07/blog-post_30.html NIGAMRAJENDRA28...

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती के असहयोग ने भाजपा को समर्थन लेने को विवश किया

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी से गठबंधन तोड़कर महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। भाजपा के सभी मंत्रियों ने जून 19 को इस्तीफे दे दिए। दोनों दलों के बीच तीन साल पहले गठबंधन हुआ था। भाजपा ने अब राज्यपाल से राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने की मांग की है। महबूबा ने शाम 4 बजे पार्टी की बैठक बुलाई है। वे भी राज्यपाल को इस्तीफा सौंप चुकी हैं। दो वजह जो भाजपा ने बताईं  : राम माधव ने कहा, ‘‘घाटी में आतंकवाद, कट्टरपंथ, हिंसा बढ़ रही है। ऐसे माहौल में सरकार में रहना मुश्किल था। जम्मू और कश्मीर क्षेत्र के बीच सरकार के भेदभाव के कारण भी हम गठबंधन में नहीं रह सकते थे।’’ दो वजह, जिनकी वजह से मतभेद थे  :  पहली - रमजान के दौरान सुरक्षाबल आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन रोक दें, इसे लेकर भाजपा-पीडीपी में मतभेद थे। महबूबा के दबाव में केंद्र ने सीजफायर तो किया लेकिन इस दौरान घाटी में 66 आतंकी हमले हुए, पिछले महीने से 48 ज्यादा।  दूसरी - पीडीपी चाहती थी कि केंद्र सरकार हुर्रियत समेत सभी अलगाववादियों से बातचीत करे। ल...

राज्यसभा में लाचार है बीजेपी

आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार  1 6 प्रदेशों में राज्यसभा के लिए  हुए चुनावों में बीजेपी ने जबर्दस्त कामयाबी हासिल की, लेकिन इस सदन में अब भी वो बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं कर पाई। मतलब ये कि भले ही लोकसभा में बीजेपी के पास भारी बहुमत है, राज्यसभा में अब भी उसे कोई बिल पास करवाने के लिए दूसरी पार्टियों के भरोसे ही रहना पड़ेगा। मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव में जो वादे किए थे उनमें से कई इसी कारण अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं। बहुमत के लिए 123 सदस्य होना जरूरी है। ताजा नतीजों के बाद अब बीजेपी के 86 सांसद हो गए हैं, जबकि एनडीए को मिला लें तो 104 सांसद हुए। यानी अब भी बहुमत से करीब 20 पीछे। दूसरी तरफ कांग्रेस के सांसदों की संख्या 38 हो गई है, जबकि उसके सहयोगियों को मिलाकर 56 हुए। बाकी अन्य पार्टियों के सांसद हैं। 2019 से पहले बहुमत के चांस नहीं यह साफ है कि मौजूदा लोकसभा के कार्यकाल में बीजेपी को राज्यसभा में बहुमत नहीं मिलेगा। इसके लिए उसे एक बार फिर 2019 के लोकसभा चुनावों में अच्छे बहुमत से जीतना जरूरी होगा। साथ ही इस साल और अगले साल में होने व...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)