पूरा देश नए नोटों के लिए प्रतिबद्ध है, इसलिए कतारबद्ध है. खबरें बता रही हैं कि बैंकवालों को खुद अपने नोट बदलवाने का समय नहीं मिल पा रहा है. लोग उन्हें सपोर्ट नहीं कर रहे हैं. लग रहा है बैंक कर्मचारियों की हालत बहुत खराब है. लेकिन, एक की हालत सब पर लागू नहीं कर सकते. लॉजिक में इसे लॉजिकल फैलसी कहते हैं. तो हर बैंक कर्मचारी की हालत एक जैसी नहीं है. लाइन में लगे लोगों को उम्मीद है कि नोटबंदी से काला धन खत्म हो जाएगा, लेकिन चोट्टों ने अपने काले धन को ठिकाने लगाने और उसे सफ़ेद करने के ढेर सारे तरीके खोज लिए हैं. थोड़ा-बहुत काला धन बैंकवालों के पास भी है. वो इसे सरकार को नहीं दे रहे हैं, बल्कि मौका देखते ही सफेद किए ले रहे हैं. हम बात कर रहे हैं पटना के एक बैंक की. पटना के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में बैंक कर्मचारी ब्लैक मनी को वाइट करने वाले एक भरे-पूरे रैकेट का हिस्सा हैं. इस मामले को उजागर किया है सिद्धि एंटरप्राइजेज के मालिक मुकेश कुमार हिशारिया ने. इस बैंक के ब्रांच मैनेजर को लिखे पत्र में मुकेश ने कहा कि उन्होंने अपने पास जितने भी पांच सौ और हजार के नोट थे, उन्हें बिड़ला मंदिर शाखा म...