आज विज्ञानं के विकसित होने से हमने चिकित्सा में कई उपलब्धियाँ जरूर प्राप्त कर ली हैं, लेकिन उतने पीछे भी चले गए हैं। आज चिकित्सक मरीज से बीमारी पूछता है, जबकि एलोपैथी से पूर्व जब आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली थी, तब वैद्य मरीज से हाल पूछने की बजाय उसकी नब्ज पढ़कर बीमारी बता दिया करते थे। किन्तु आज के वातावरण में परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। आज ईलाज बाद में होता है, टेस्टिंग पहले। और कई स्थितियों में टेस्टिंग टेस्टिंग में ही मरीज की राम नाम सत्य हो जाती है। इस सच्चाई से कोई इंकार भी नहीं कर सकता। टेस्टिंग की दुकानें डॉक्टर के सहारे ही तो चल रही हैं। जहाँ इन दोनों की कमाई और मरीज की जेब पर कैंची। भारत देश जो सृष्टि की रचना से लेकर आज तक देवी-देवताओं की अनोखी विविधताओं से फलीफूत है, जिसे पश्चिमी सभ्यता एवं आधुनिकता की अंधी आँधी ने अनदेखा कर दिया। आध्यात्मिक ज्ञान क्या होता है, उससे अज्ञान हैं। हमने मिसाइल एवं परमाणु आदि बनाने पर छाती चौड़ी कर रहे हैं, लेकिन भूल गए कि यह तो भारत में पहले ही से विराजमान हैं। उदाहरण है , रामायण और महाभारत का युग, जहाँ तीरों से आग के शोले निकलते थे, राज...