आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार पत्रकारिता को सरकार का कितना विरोध करना चाहिए, कितना समर्थन करना चाहिए, विपक्ष के प्रति उसका रवैया किन परिस्थितियों में कैसा होना चाहिए, मर्यादा का बिन्दु क्या है, लोकतन्त्र का चौथा कहलाये जाने वाले समाज को इस विषय पर स्वयं मन्थन करना चाहिए। जिससे भारत में पत्रकारिता के दायित्वों की अवधारणा पर नई रोशनी डाली जा सके। लेकिन तब तक यह मत भूलिए कि जिन लोगों ने गोदी मीडिया का जुमला उछाला है, वे स्वयं सोनिया गांधी और राहुल गांधी (कांग्रेस) की गोदी में बैठे हैं। बीच में अरविंद केजरीवाल की गोदी में भी जा बैठे थे, क्योंकि विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल ने उन्हें लोकसभा का टिकट अथवा राज्यसभा की सीट का लालच दिया था।यह कोई टॉप सीक्रेट भी नहीं है और दिल्ली विधानसभा चुनाव में लोग उसे महसूस भी कर चुके हैं। मीडिया को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि आज हमें ऐसा प्रधानमन्त्री मिला है, जो आलोचना से पीछे नहीं भागता, बल्कि सामना करता है। लेकिन एक तरफ़ा आलोचना शोभा नहीं देता। जिस तरह मीडिया ने गोधरा दंगों को उछाला, क्या उसी तरह उत्तर प्...