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मोदी-मोदी चिल्लाने वाली मीडिया क्या सोनिया की गोदी में बैठी है?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  पत्रकारिता को सरकार का कितना  विरोध करना चाहिए, कितना समर्थन करना चाहिए, विपक्ष के प्रति उसका रवैया किन परिस्थितियों में कैसा होना चाहिए, मर्यादा का बिन्दु क्या है, लोकतन्त्र का चौथा कहलाये जाने वाले समाज को इस विषय पर स्वयं मन्थन करना चाहिए। जिससे भारत में पत्रकारिता के दायित्वों की अवधारणा पर नई रोशनी डाली जा सके। लेकिन तब तक यह मत भूलिए कि जिन लोगों ने गोदी मीडिया का जुमला उछाला है, वे स्वयं सोनिया गांधी और राहुल गांधी (कांग्रेस) की गोदी में बैठे हैं। बीच में अरविंद केजरीवाल की गोदी में भी जा बैठे थे, क्योंकि विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल ने उन्हें लोकसभा का टिकट अथवा राज्यसभा की सीट का लालच दिया था।यह कोई टॉप सीक्रेट भी नहीं है और दिल्ली विधानसभा चुनाव में लोग उसे महसूस भी कर चुके हैं।  मीडिया को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि आज हमें ऐसा प्रधानमन्त्री मिला है, जो आलोचना से पीछे नहीं भागता, बल्कि सामना करता है। लेकिन एक तरफ़ा आलोचना शोभा नहीं देता। जिस तरह मीडिया ने गोधरा दंगों को उछाला, क्या उसी तरह उत्तर प्...

संविधान, लोकतंत्र, सेना के बाद आरएसएस है भारतीयों का रक्षक-- रिटायर्ड जस्टिस के.टी. थॉमस

उच्‍चतम न्‍यायालय से रिटायर्ड जस्टिस के.टी. थॉमस ने कहा है कि संविधान, लोकतंत्र और सशस्‍त्र सेनाओं के बाद, आरएसएस ने भारत में लोगों को सुरक्षित रखा है। थॉमस के अनुसार, सेक्‍युलरिज्‍म का विचार धर्म से दूर नहीं रखा जाना चाहिए। 31 दिसंबर को कोट्टयम में संघ के प्रशिक्षण कैंप को संबोधित करते हुए पूर्व जज ने कहा, ”अगर किसी एक संस्‍था को आपातकाल के दौरान देश को आजाद कराने का श्रेय मिलना चाहिए, तो मैं वह श्रेय आरएसएस को दूंगा।” थॉमस ने कहा कि संघ अपने स्‍वयंसेवकों में ”राष्‍ट्र की रक्षा” करने हेतु अनुशासन भरता है। उन्‍होंने कहा, ”सांपों में विष हमले का सामना करने के लिए हथियार के तौर पर होता है। इसी तरह, मानव की शक्ति किसी पर हमला करने के लिए नहीं बनी है। शारीरिक शक्ति का मतलब हमलों से (खुद को) बचाने के लिए है, ऐसा बताने और विश्‍वास करने के लिए मैं आरएसएस की तारीफ करता हूं। मैं समझता हूं कि आरएसएस का शारीरिक प्रशिक्षण किसी हमले के समय देश और समाज की रक्षा के लिए है।” जस्टिस थॉमस ने आगे कहा, ”अगर पूछा जाए कि भारत में लोग सुरक्षित क्‍यों हैं, तो मैं कहूंगा कि देश में एक संविधान है, लोकतंत्र ...

यह भी लोकतन्त्र है !!!

क्या आप जानते हैं कि 1313 तक कश्मीर में एक भी मुस्लिम नहीं था ! राजा सुहादेव ने 1313 में व्यापार के लिए 1 मुस्लिम को कश्मीर आने दिया और  आज कश्मीर से हिन्दू विलुप्त हो गया। 1992 में कश्मीरी पंडितों को पलायन के लिए मजबूर किया और आज जब पुनः उनको वापस भेजने की बात होती है, सबको साम्प्रदायिकता नज़र आती है। गंगा-जमुना तहज़ीब संकट में आ जाती है। उसका कारण है, हिन्दू नकाब पहने मुस्लिम एवं ईसाईयों का सत्ता पर अधिकार होना, जो निम्न लेख से स्पष्ट होता है।  यही कारण था कि जितने बदलाव हिन्दू पूजा पद्धति में हुए है, शायद ही किसी अन्य धर्म में हुए हो। जो गम्भीर अध्ययन एवं चिन्ता का विषय है। नोस्त्रेदामस की भविष्यवाणियों का मनन करते, एक शंका थी की भारत स्वतन्त्र होने उपरान्त एक बार फिर गुलाम होगा, लेकिन 2014 चुनावों के बाद अपने वास्तविक अस्तित्व में पदापर्ण करने के साथ एक शक्तिशाली देश बनने के साथ-साथ हिन्दू की जड़ें मजबूत होनी प्रारम्भ होंगी। 2014 में जिस सख्त अधेड़ आयु के नेतृत्व में जो पार्टी सत्ता में आएगी, वह व्यक्ति 2025 तक राज्य करेगा और जिस दिशा में यह भारत को लेकर चलेगा, उसके बाद आ...

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shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)