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जम्मू कश्मीर में घुसना बैन करवाया था नेहरू ने - श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान से आज नहीं लगता वीज़ा

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारतीय राजनीति के अब तक के 70 वर्षीय इतिहास में केवल भाजपा एकमात्र ऐसी पार्टी है जो पहले दिन से ही धारा 370 का खुलकर विरोध करती रही है। उस समय भाजपा का नाम जनसंघ और चुनाव चिन्ह दीपक हुआ करता था। इसके ठीक विपरीत हर पार्टी इस धारा 370 का खुलकर समर्थन और इसको हटाए जाने का प्रचण्ड विरोध करती है। लाल किले के प्राचीर से अपने सम्बोधन में कश्मीर पर बोलते हुए, प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय जनसंघ वर्तमान भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक भूतपूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का एक बार भी नाम नहीं लिया। जिनके बलिदान से परमिट प्रथा समाप्त होने के ही कारण आज वहां भाजपा सरकार बनाने का प्रयत्न कर रही है। आज भी हमसे आपसे हर भारतीय से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए, बर्फानी बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए, कश्मीर में पर्यटन के लिए कश्मीर सरकार का परमिट मांगा जाता। हमको आपको उसी तरह उस परमिट का इंतजार करना पड़ता जिस प्रकार कैलाश मानसरोवर के लिए आज चीन के परमिट का इंतिज़ार करना पड़ता है कि आखिर मेरा नंबर कब आयेगा… कब आयेगा मेरा नंबर... यह कोई मनगढ़ंत कहान...

जब एक साथ तोड़ी गई थीं लेनिन की 1320 प्रतिमाएं

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  त्रिपुरा में लेनिन की प्रतिमा तोड़े जाने की देश भर में चर्चा हो रही है। जो भारत में ही सम्भव है। लेकिन बंगाल में हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तोड़े जाने पर सबको साँप सूंघ जाता है। क्या इसी को समाजवाद या धर्म-निरपेक्षता कहते हैं?पर हमको लेनिन की प्रतिमाएं तोड़े जाने की सबसे बड़ी घटना के बारे में बताने जा रहे है। ऐसा हुआ था यूक्रेन में. यहां एक साथ लेनिन की 1320 प्रतिमाएं तोड़ दी गई थीं। कोई विरोध नहीं हुआ, लेकिन भारत में मुगलों की बुराई करने या भारत विरोधियों के विरुद्ध मुहिम चलाने पर छद्दम धर्म-निरपेक्षों को असुरक्षा का डर सताने लगता है और देश की जनता को भ्रमित करने प्रदर्शन आदि करने सडकों पर उतर आते हैं।  एक विदेशी की मूर्ति तोड़ने पर किस तरह विधवा-विलाप किया जा रहा है, लेकिन जब लेनिन के अनुयायी अपने चिर-विरोधी भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमले हो रहे थे, क्या तब देश में असुरक्षा की भावना नहीं थी? आखिर यह नाटकबाज़ी और ढोंग कब तक होता रहेगा? क्या ये नेता देशहित सोंच सकते हैं? साम्प्रदायिकता खेल धर्म-निरपेक्षता का...

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shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)