रेल किराया बढ़ाने का तरीका बड़ा घुमावदार है। सरकार ने क्या चतुर तरकीब लगाई। कोई आसानी से समझ नहीं पाएगा कि आम जनता के लिए रेल का सफर कितना महंगा हो गया। जो कहेगा उसे जवाब दे दिया जाएगा कि पहले आकर टिकट खरीद लेते। शुरू के सिर्फ दस फीसदी मुसाफिरों को रेल के टिकट पुराने रेट पर मिलेंगे। उसके बाद के 90 फीसदी यात्रियों को औसतन 25 फीसदी ज्यादा किराया देना पड़ेगा। अचानक मुनाफे के लालच में फंसती दिख रही रेल व्यवस्था पर वाकई सोचने के दिन आ गए हैं। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, दूरंतो, राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस गाडिय़ों में वातानुकूलित प्रथम श्रेणी में फ्लैक्सी किराया प्रणाली लागू नहीं होगी। इन गाडिय़ों में द्वितीय श्रेणी कुर्सीयान, स्लीपर, एसी थ्री, एसी टू और चेयरकार श्रेणियों में ही यह प्रणाली लागू की जायेगी। परिपत्र के अनुसार विमान किरायों की तर्ज पर बुकिंग आरंभ होने पर पहली दस प्रतिशत सीटें मूल किराये पर बुक होंगी। इसके आगे सीटों की बुकिंग दस-दस प्रतिशत बढऩे पर दस-दस फीसदी किराया भी बढ़ाने का प्रावधान है। उदाहरण के लिए अगर किसी ट्रेन में सौ सीटें हैं तो पहली दस सीटें मूल किराये पर आ...