डॉ विवेक आर्य अपने आपको दलित नेता कहने वाले जिग्नेश मेवानी ने दिल्ली रैली में मनुस्मृति और भारतीय संविधान में से किसी एक को चुनने का प्रस्ताव दिया है। मैं दवा करता हूँ कि जिग्नेश मेवानी ने अपने जीवन में कभी मनुस्मृति को पढ़ा तक नहीं है। अन्यथा वह ऐसा निराधार प्रस्ताव कभी नहीं करता। मंच पर खड़े होकर मनुवाद और ब्राह्मणवाद के जुमले उछालना बेहद आसान हैं। मनुस्मृति के विषय में सत्य और वास्तविक ज्ञान का होना अलग बात है। मैं इस लेख के माध्यम से जिग्नेश मेवानी को चुनौती देता हूँ कि वो आये और मनु क्यों गलत यह यह सिद्ध करे। इस लेख को पढ़कर पाठक अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दे। मनुस्मृति जो सृष्टि में नीति और धर्म (कानून) का निर्धारण करने वाला सबसे पहला ग्रंथ माना गया है उस को घोर जाति प्रथा को बढ़ावा देने वाला भी बताया जा रहा है। आज स्थिति यह है कि मनुस्मृति वैदिक संस्कृति की सबसे अधिक विवादित पुस्तक बना दी गई है | पूरा का पूरा दलित आन्दोलन मनुवाद' के विरोध पर ही खड़ा हुआ है। ध्यान देने वाली बात यह है कि मनु की निंदा करने वाले इन लोगों ने मनुस्मृति को कभी गंभीरता से पढ़ा भी नहीं है। स्वामी दया...