आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कासगंज में अख़लाक़ या रोहित वेमुला नहीं, चंदन गुप्ता मरा है। इसलिए क़ातिलों के धर्म का पता नहीं चल पा रहा। तिरंगा यात्रा से परेशानी उन्ही को है जिन्हें वन्दे मातरम् से परहेज़ है। धर्म के ठेकेदार चुपचाप छुपे बैठे है कोई बहस नहीं। पत्थर फेंकने वाला राजपूत था, लेकिन तिरंगा यात्रा करने वाले छात्र पर गोली चलाने वालो का धर्म अभी तक मीडिया और सेक्युलर खोज नही पाये हैं... घायल हुए एक ओर युवा राहुल उपाध्याय की भी मृत्यु हो गयी है। अब न ही किसी मॉब लिंचिंग, #not in my name, और न ही किसी असहसुष्णिता की रोने वाले की आवाज़ नहीं निकल रही। पता नहीं किस कोने में मुँह छिपाए बैठे हैं? अरे छद्दमों अब क्यों नहीं विधवा-विलाप करते? क्या अख़लाक़ या रोहित वेमुला पर विधवा-विलाप किसी से मिले चंदे पर किया जाता है? जहां चंदन की मां संगीता ने कहा है कि उनका बेटा चंदन किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ा था। उसने पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा नहीं लगाया तो उसे गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। संगीता ने कहा, ‘मैं अपने बेटे के लिए इंसाफ चाहती हूं। म...