आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार बात 2012 की है, जब आर्गेनाइजर साप्ताहिक से सेवानिर्वित होने पर एक हिन्दी पाक्षिक के मुख्य सम्पादक-स्वामी ने अपने डूबे हुए पाक्षिक को सँभालने का आग्रह किया, जिसे अपनी हैसियत से बहुत ऊपर उठा दिया था। तब मनोनीत, अब वर्तमान, प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ताबड़तोड़ रैलियाँ कर रहे थे, तब उस पाक्षिक को सम्पादित करते जो लिखता, उन्ही मुद्दों को मोदीजी अपने अगले भाषण में जीवित कर देते थे। एक बार अपने 5/6 मित्रों के बीच बैठे मुख्य संपादक-स्वामी ने बड़ी गम्भीरता से प्रश्न किया, "निगम साहब, क्या आप मोदी से मिलकर आमुख रपट लिखते हैं? जो आप लिखते हो मोदी भी उन्ही मुद्दों पर बोलते हैं।" उन सभी को स्पष्ट शब्दों में कहा था, "चुनाव 2014 में होने हैं, और नॉस्त्रेदमस की भविष्यवाणियों को गंभीरता से लेने पर, मुझे मोदी के प्रधानमंत्री बनने के असर दिख रहे हैं। और जहाँ तक मोदी से मिलकर कुछ लिखने की बात है, मोदी से न मिला हूँ और न ही कोई इच्छा। मै अपना काम कर रहा हूँ और वह अपना। यह इत्तेफाक है कि जिन मुद्दों को मै उछाल र...