बायीं तरफ से पहले चंद्रस्वामी, दूसरे प्रमोद कृष्णम, तीसरे शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती, चौथे स्वामी अग्निवेश और पांचवें महंत ज्ञानदास हैं। कांग्रेस पार्टी आज भले ही ईसाई मिशनरियों और जिहादी संगठनों की समर्थक पार्टी के तौर पर देखी जाती है, लेकिन कुछ समय पहले तक उसने भी हिंदू संतों के बीच अच्छी खासी पैठ बना रखी थी। इनमें से कुछ बाबाओं का ऐसा जलवा हुआ करता था कि वो बाकायदा सत्ता के सबसे बड़े दलाल के तौर पर देखे जाते थे। ज्यादातर को गांधी परिवार का करीबी माना जाता था। गांधी परिवार के तमाम सदस्य उनके आगे मत्था टेकते थे और बदले में उन्हें चुनाव में हिंदुओं का एकमुश्त वोट पाने का वरदान मिला करता था। सोनिया गांधी के आने के बाद कांग्रेस पार्टी के ईसाईकरण का सबसे बड़ा नुकसान इन बाबाओं को हुआ, जिन्हें पहले राजीव गांधी और बाद में सोनिया गांधी ने एक तरह से अपमानित करना शुरू कर दिया। हालांकि इनमें से ज्यादातर बाबा आज भी गांधी परिवार के ही वफादार के तौर पर देखे जाते हैं। एक नज़र ऐसे ही टॉप-5 बाबाओं पर- 1. शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती स्वरूपानंद खुले तौर पर कांग्रेसी शंकराचार्य के तौर ...