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'सुन्नी समाज के लोग, शियाओं के यहां न करें इफ्तार'-- दारुल उलूम देवबंद का नया फतवा

रमजान के दौरान जारी हुए नए फतवे ने एक नई बहस को शुरू कर दिया  जब रमजान अपने अंतिम पड़ाव पर है, ऐसे में दारुल उलूम ने अपने आप में एक विचित्र फतवा जारी कर अपने फतवों  की लिस्ट में नया फतवा शामिल कर लिया है।  सहारनपुर  में इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद से  रमजान के पाक महीने  में जारी नए फतवे में सुन्नी मुसलमानों को शिया मुसलमानों की तरफ से आयोजित की जाने वाली इफ्तार पार्टियों में न जाने की नसीहत दी गई है। जानकारी के मुताबिक, तीन मुफ्तियों ने इस फतवे को जारी किया है। दारुल उलूम के मुफ्तियों द्वारा दिए गए जवाब से एक नई बहस भी छिड़ सकती है।   सवाल का दिया जवाब दरअसल, बीते दिनों एक शख्स ने दारूल उलूम से लिखित में सवाल किया था कि रमजान के महीने में शिया हजरात की तरफ से रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन किया जाता है, तो सुन्नी मुसलमानों का उसमें शामिल होना जायज है या नहीं? इसी सवाल के जवाब में दारूल उलूम ने फतवा जारी करते हुए सुन्नी मुसलमानों को शिया मुसलमानों की इफ्तार पार्टी में शामिल न होने की हिदायत दी है।   तीन मुफ्त...

दलित नेता एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद कहाँ फरार हो गया?

सहारनपुर हिंसा की आग में सुलग रहा है। सहारनपुर हिंसा से योगी सरकार के काम-काज पर सवाल उठ रहे हैं। इस हिंसा का सबसे ज्यादा शिकार इलाके के किसान और मजदूर बने हैं। लेकिन, जिस तरह से जातीय हमलों को अंजाम दिया जा रहा है, उससे यह बात साफ हो गई है कि यह सोची-समझी साजिश है। इस बात का अंदेशा और बढ़ जाता है जब हम भींड के व्यवहार को ध्यान से देखते हैं। सहारनपुर में जहां भी हिंसा हुई है वहां हमलावर अचानक आते हैं, खून-खराबा करते हैं और ऐसे गायब हो जाते हैं कि पुलिस प्रशासन को भनक ही नहीं लगती। ऐसी जगहों पर हमला किया गया है जहां पुलिस की मौजूदगी कम हो और सनसनी ज्यादा फैले। जो कहीं न कहीं सहारनपुर में भड़की हिंसा में साजिश की ओर इशारा करते हैं।  छह नेताओं ने भीम सेना को दिये लाखों रुपए – सहारनपुर में मौजूद प्रदेश के आला अफसरों और खुफिया विभाग ने शासन को एक रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, जातीय हिंसा की वजह राजनीतिक षड्यंत्र है। यह हिंसा दलित-मुस्लिम गठजोड़ को मजबूत करने के लिए साजिश है। इसमें घटनास्थल, हिंसा का प्रारूप, समय-सीमा और लोग, सब कुछ तय था। इन दंगों में बाहरी उपद्रवियों का...

सहारनपुर में हुई हिंसा की रिपोर्ट में सामने आया पूर्व मुख्यमंत्री और उनके भाई का नाम!

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में इन दिनों हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं| बात करें अगर मौजूदा वक़्त की तो जातीय हिंसा से सुलग रहे सहारनपुर में शांति बहाल करने में अब तक तो प्रशासन नाकाम ही दिख रहा है और शायद यही वजह है कि योगी सरकार के लिए भी सहारनपुर एक बड़ी चिंता का सबब बना हुआ है| जानलेवा हमले में बुरी तरह घायल हुए 80 साल के फूल सिंह अभी भी उस खौफनाक मंजर को याद करके सिहर उठते हैं| ऐसे में सहारनपुर में हिंसा भड़काने का आरोप जिस संगठन भीम आर्मी पर लग रहा है उसको लेकर यूपी की इंटेलिजेंस पुलिस ने सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंपी है। दरअसल इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी लगातार भीम आर्मी की मदद करती रही है| बता दें कि सहारनपुर पिछले तीन दिन से सुलग रहा है| योगी ने कहा कि हमारे आने से जिन लोगों का धरातल खिसक चुका है, जिन्होंने जातीय भेदभाव फैलाया है, जिन्होंने समाज को तोड़ करके अपना राजनीतिक उल्लू सीधा किया है, स्वाभाविक रूप से उन्हें उत्तर प्रदेश में हम सब की मौजूदगी अच्छी नहीं लगेगी, इसलिए वे कुछ ना कुछ तो करेंगे ना. इसके लिए हम सब को तैयार रहना पड़े...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)