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ठगी करने वाला बैंक और बचाने वाले मंत्री

बॉम्बे मर्केंटाइल बैंक की जालसाजियां देशभर में कुख्यात हैं. शेयर घोटाले से लेकर तरह-तरह के फ्रॉड में यह बैंक लंबे अर्से से लिप्त रहा है. केंद्रीय मंत्री के साथ-साथ दूसरे दल के कई नेता और नौकरशाह बैंक को संरक्षण देते हैं. भ्रष्टाचार के खिलाफ सौ-सौ कसमें खाकर सत्ता में आई भाजपा की सरकार बैंक की सरपरस्ती में कुछ ज्यादा ही आगे निकल गई है. आरबीआई से लेकर पुलिस और सरकारी एजेंसियां बैंक को जालसाज बताती हैं, लेकिन केंद्र सरकार बैंक पर मेहरबान है. इस साठगांठ को उजागर करती रिपोर्ट… उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार की कारगुजारियों के खिलाफ ताल ठोक दी है. जिस जालसाज बैंक को केंद्र सरकार खुलेआम संरक्षण दे रही है, उस बैंक के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ में मुकदमा ठोक कर केंद्र को सकते में ला दिया है. बैंकों के फ्रॉड पर सार्वजनिक चिंता जताने वाली केंद्र सरकार नेपथ्य से उन्हीं बैंकों को अपना संरक्षण देती है और महत्वपूर्ण सरकारी लेनदेन से जोड़ कर उसे लाभ पहुंचाती है. तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर ‘चौथी दुनिया’ अखबार इसका खुलासा कर रहा है. जिस बैंक पर ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ का आरोप हो...

जन-धन खाताधारकों को भारी पड़ रही है महीने में 4 से ज्यादा बार निकासी

बैंकिंग सेवा से वंचित लोगों को इसके दायरे में लाने के इरादे से खोले गए जन-धन खाते अब खाताधारकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। बैंकों के मौजूदा रवैये से अब हर जन-धन खाताधारक परेशान है। दरअसल इन खातों से चार से ज्यादा ट्रांजेक्शन होने की सूरत में उन्हें रेगुलर अकाउंट (नियमित खाता) में बदला जा रहा है। नियमित खाता होने का नुकसान यह है कि अगर अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखा गया तो बाकी ग्राहक की तरह इन खाता धारकों पर भी बैंक पेनल्टी लगाते हैं। क्या है मामला? देश में खोले गए करोड़ों नो फ्रिल अकाउंट जिनमें प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोले गए खाते भी शामिल हैं, को निकासी की 4 बार की सीमा पार करते ही बैंकों की ओर से फ्रीज किया जा रहा है। आईआईटी बॉम्बे के एक प्रोफेसर की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक नो-फ्रिल खाताधारकों को एक महीने में चार निकासी की सीमा पार करने के बाद निकासी की स्थिति में पेनल्टी का सामना करना पड़ रहा है। कई बैंक ऐसे खातों में पांचवीं निकासी होते ही नो-फ्रिल खाते को नियमित खाते में बदल दे रहे हैं। यानी बैंकों की ओर से पांचवीं निकासी को बेसिक सेविंग बैंक डिप...

RBI ने 2009 के बाद पहली बार 2.5 टन सोना खरीदा

रिजर्व बैंक ने सालों बाद सोना खरीदा है। रिजर्व बैंक ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में 2.5 टन सोना जोड़ा है। रिजर्व बैंक ने मार्च 2018 के अंत तक 2 चरणों में ये 2.5 टन सोना खरीदा है। इससे पहले इसी तरह रिजर्व बैंक ने 2009 में सोना खरीदा था। तब रिजर्व बैंक ने 200 टन सोना इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड से खरीदा था। IMF के डेटा के मुताबिक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में मार्च 2018 तक 560.3 टन सोना था। बीएस ने एक सूत्र के हवाले से खबर दी है कि 'ये एक पायलट के तौर पर खरीद है। इसके असर से रिजर्व में थोड़ी सी बढ़ोतरी हुई है। ये कोई महत्वपूर्ण खरीदी नहीं है जब तक इसमें हम कोई ट्रेंड न देखें। सूत्र के मुताबिक 'सरकार ने ये फैसला बजट से पहले ही ले लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसका एलान नहीं किया गया।' वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक जिसमें रूस और टर्की भी शामिल है डॉलर के खिलाफ हेज करने के लिए सोना खरीदते हैं। टर्की के केंद्रीय बैंक ने तो नीति बनाकर डॉलर की विदेशी मुद्रा भंडार में ताकत घटाई। टर्की के कमर्शियल बैंकों के पास बड़ी मात्रा में सोना है। पूरे विश्व में अमेरिका के केंद्रीय बैंक...

अब क्या 100 रुपए के इन नोटों की होगी 'नोटबंदी'?

नोटबंदी के बाद से देश में कैश किल्लत होना मानो आम बात सी हो गई है। पिछले एक महीने में कई बार ऐसा सुनने को मिला कि कैश की किल्लत है।नोटबंदी के दिनों की तरह एटीएम से कैश गायब। लेकिन, केंद्र सरकार और आरबीआई इस बात को नकारते रहे कि कैश की किल्लत है। आरबीआई के मुताबिक, सिस्टम में पर्याप्त मात्रा में नोट हैं और नोटों की छपाई भी बढ़ाई गयी है। फिर क्या कारण है एटीएम में पैसा नहीं। कहीं-कहीं तो बच्चों एवं चूर्ण के नोट एटीएम से बाहर आते हैं, क्या आरबीआई या बैंक ने एटीएम से इस तरह के नोट निकलने को गंभीरता से लिया? अगर लिया है तो कितने लोगों के खिलाफ कार्यवाही की गयी है? किन उपद्रवियों के कहने पर एटीएम में चूर्ण या बच्चों के नोट डाले गए?   हालांकि, 2000 रुपए के नोट को लेकर कहा गया कि इनकी छपाई फिलहाल रोक दी गई है. अब एक नई समस्या आम जनता के सामने आने वाली है. फिर से नोटबंदी हो सकती है. हालांकि, इस बार कोई नोट बंद नहीं हो रहा है. लेकिन, समस्या लगभग वैसी ही है. दरअसल, अब 100 रुपए के पुराने और मटमैले नोट की वजह से संकट गहरा सकता है.  क्यों होगी 100 रुपए की 'नोटबंदी' बैंकर्स...

नोटबंदी में जनधन, डॉरमेंट अकाउंट में 10 गुना ज्यादा जमा हुआ पैसा

नोटबंदी के बाद पहली बार आरबीआई ने रिपोर्ट में उस दौरान जमा हुए पैसों के की डिटेल बताई है। उसके अनुसार नवंबर और दिसंबर के महीने में सबसे ज्यादा  लोगों ने जनधन और डॉरमेंट अकाउंट में पैसा जमा किया है। हालत यह थी कि उन दो महीने में जनधन अकाउंट में 10 गुना पैसा जमा कर दिए गए।  इसी तरह डॉरमेंट अकाउंट यानी ऐसे अकाउंट जिसमें बहुत दिनों से कोई लेन-देन नहीं हो रहा था, उसमें जमा पैसों में 9 गुना का इजाफा हुआ। इतनी ज्यादा मात्रा. में इन अकाउंट्स में जमा हुए पैसो को देखते हुए इस बात की आशंका है कि ज्यादातर ब्लैकमनी के रुप  को खपाने में इन अकाउंट का यूज किया गया  है।    क्या कहती है आरबीआई रिपोर्ट आरबीआई द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार 9 सितंबर से लेकर 30 अक्टूबर के बीच जनधन अकाउंट में 6600 करोड़ रुपए जमा हुए थे। जबकि  9 नवंबर को नोटबंदी लागू होने के बाद 30 दिसंबर तक 66480 करोड़ रुपए कुल जमा हो गए है। यानी 50 दिन में करीब 59800 करोड़ रुपए जमा किए गए।  इसी  तरह डॉरमेंट अकाउंट में जिसमें कुल 9 सितंबर से लेकर 30 अक्टूबर के बीच 2830 करोड़ रुपए जमा हुए...

छह महीने से नोट छप रहे थे तो तीन महीने पहले गवर्नर बने उर्जित पटेल के साइन कैसे ?

रिज़र्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल  सरकार के किसी भी काम का विरोध करना गलत नहीं, करना भी चाहिए। लोकतन्त्र भी यही कहता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि कांग्रेस यानि यूपीए सरकार भी नोट बदलने के पक्ष में थी, लेकिन किस दबाव में नहीं कर पायी, यह उनकी समस्या है।  परन्तु कांग्रेस महासचिव मोहन प्रकाश ने नयी मुद्रा पर वर्तमान आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल का जो मुद्दा उठाया है उसमे वजन दिखता है क्योंकि प्रकाश के अनुसार सरकार का यह कहना कि नयी मुद्रा की छपाई का काम छह महीने से चल रहा था तो छह माह पूर्व गवर्नर सुब्बा राव थे, पटेल  नहीं। इस मुद्दे पर सरकार को स्पष्टीकरण देना चाहिए कि "गवर्नर सुब्बाराव के कार्यकाल में उर्जित के हस्ताक्षर कैसे हुए?" विमुद्रीकरण के बाद 11 नवंबर से लोगों के हाथ में 2000 का नोट आ गया। इसके साथ ही लोगों ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी। पड़ताल में लोगों ने उर्जित पटेल के हस्ताक्षर को लेकर सवाल उठाना शुरू कर दिया। लोगों का कहना है कि अगर नोटों को छापने की तैयारी छह महीने पहले से चल रही थी तो तीन महीने पहले आरबीआई के गवर्नर बने उर्जित पटेल के साइन कैसे आ गए। अब कांग...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)