मुस्लिम महिलाओं की समस्याओं को हवा देने पर फिल्म "हक़" से परेशान मौलानाओं और मौलवियों की नींद हराम : एक सांस में 3 बार तलाक…यामी गौतम और इमरान हाशमी की ‘हक’ का ट्रेलर रिलीज
मुस्लिम महिलाओं पर यदाकदा बॉलीवुड में फिल्मों का निर्माण होता है। 90 के दशक में बहुचर्चित निर्माता-निर्देशक बी आर चोपड़ा की सिल्वर जुबली फिल्म आयी थी "निकाह", जिसमें तलाक से होने वाली ज्वलंत समस्या को उजागर किया था। तब किसी मुस्लिम कट्टरपंथी ने शोर नहीं मचाया, लेकिन अब शाहबानो केस पर आधारित फिल्म "हक़" पर मुस्लिम कट्टरपंथियों ने रोना-धोना शुरू कर दिया है। आज इस्लाम छोड़ चुकी एक्स-मुस्लिम महिलाएं फिल्म का विरोध कर रहे इन्हीं मुस्लिम कट्टरपंथियों को बेनकाब कर रही है। तलाक ही नहीं हलाला भी महिलाओं की गंभीर समस्या है। गैर-मर्द से बात करने या बात करने पर तलाक देने पर शौहर के भाई, अब्बू, बहनोई या फिर किसी मौलाना/मौलवी के हमबिस्तर होने के लिए छोड़ दिया जाता है, क्यों? क्या इनके साथ हमबिस्तर पर औरत पाक नहीं अपना आत्मसम्मान खो बैठती है। औरत अपनी मर्जी से कुछ नहीं करे बस मर्दों की गुलाम बनी रहे। फिल्म "हक़" पर छिड़े पर कट्टरपंथी संविधान की बात करने लगते हैं यूँ जब देखो शरीयत की बात करते हैं। फिल्म के पक्ष में बोल रही मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि अब इसे मौलानाओं और ...