मराठी फिल्म दशक्रिया के प्रोमो का स्क्रीनशॉट। (फोटोः यूट्यूबो) एक फिल्म का विवाद समाप्त होने नहीं पता कि दूसरा विवाद खड़ा हो जाता है। लगता है देश के छद्दम धर्म-निर्पेक्षों ने फिल्मकारों से साठगांठ कर भारतीय इतिहास और संस्कृति को कलंकित करने का बीड़ा उठा लिया है। काश यही काम, भारत की बजाए किसी विदेश में हो रहा होता, निश्चित रूप से दण्डित जरूर होते। यही भारतीय संस्कृति है कि इतना अपमान सहने उपरान्त भी महँगी टिकट खरीद फिल्म देखने पहुँच जाते हैं। बीते वर्षों में राजनीतिक फिल्मों पर प्रतिबन्ध लगते थे और आज भारतीय इतिहास और संस्कृति को अपमानित करने वाली फिल्मों पर प्रतिबन्ध लगाने की माँग पर छद्दम धर्म-निरपेक्ष निकल आते है।महाराष्ट्र के पुणे में दक्षिणपंथी संगठन एक मराठी फिल्म पर बैन लगाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि फिल्म में ब्राह्मणों को लालची दिखाया गया है। दावा किया जा रहा है कि फिल्म में ब्राह्मण और हिंदू सभी जातियों के बीच नफरत फैलाते हैं। यही नहीं, उन्होंने बिना मंजूरी के उसे रिलीज करने को लेकर फिल्म के डायरेक्टर को चेतावनी जारी की है। मराठी फिल्म ‘दश...