नवम्बर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नोटबंदी की घोषणा कर रहे थे, तब किसी को अंदाजा नहीं था कि आने वाले कुछ महीनों में उन्हें किन मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा? अपने ही पैसे के लिए उन्हें अपनी जान भी देनी पड़ेगी. किसानों को अपनी नकदी फसल औने-पौने दामों में बेचनी पड़ेगी. मजदूरों को काम से हाथ धोना पड़ेगा। न्यूज़ चैनलों पर कालाधन गंगा में बहते दिखाया गया। कार्टन भरे नोट कब्रिस्तानों में फेंके गए। लोग शायद ये सब कष्ट भले भूल जाए, लेकिन नोटबंदी का जिन्न बार-बार बोतल से बाहर आ ही जाता है। इस सन्दर्भ में अवलोकन करें:-- · http://nigamrajendra28.blogspot.com/2016/…/blog-post_46.html NIGAMRAJENDRA28.BLOGSPOT.COM कब्रिस्तान में ही क्यों फेंके जा रहे हैं नोटों से भरे बोरे देश भर में 500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद जहां एक तरफ पूरे देश में अफरा-तफरी मची हुई है वहीं दूसरी तरफ काले धन के मालिक ..... NIGAMRAJENDRA28.BLOGSPOT.COM जन-धन खाताधारकों को भारी पड़ रही है महीने में 4 से ज्यादा बार न...