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क्या अरविन्द केजरीवाल ईसाई बन गए हैं?

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार  कथित तौर पर अब तक का सबसे बड़ा धर्मांतरण कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। दावे किए जा रहे हैं कि इस कार्यक्रम के जरिए 10 हजार के करीब हिंदुओं को ईसाई बनाया जाएगा। दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 25 और 26 अगस्त को हो रहे इस कार्यक्रम में खुद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया चीफ गेस्ट हैं। हो सकता है कि आपको इस पर भरोसा न हो रहा हो, लेकिन जो जानकारियां हमें मिल रही हैं वो काफी हद तक चौंकाने वाली हैं। दरअसल शनिवार और रविवार के दिन तालकटोरा स्टेडियम में ‘फेमिली ऑफ लॉर्ड जीसस चर्च’ यानी FOJL नाम की संस्था का कार्यक्रम हो रहा है। यह संस्था धर्मांतरण कराने के लिए बदनाम रही है। इसका प्रमुख पीएस रामबाबू खुद दावा करता है कि उसने 10 लाख लोगों को ईसाई बनाया है। विवाद के बाद एनडीएमसी ने संस्था के कार्यक्रम की अनुमति वापस ले ली, लेकिन आयोजकों ने आदेश पर हाई कोर्ट से स्टे ले लिया। दिल्ली के पूर्व मंत्री और विधायक कपिल मिश्रा ने दावा किया है कि यह कार्यक्रम धर्मांतरण के ही नीयत से हो रहा है। कपिल मिश्रा ने तालकटोरा स्टेडियम के बाहर धरना देने का भी एलान किया है।...

इस गांव के दलितों ने कहा, मर जाएंगे धर्म नहीं बदलेंगे

दिल्ली से सटे हरियाणा के मेवात  इलाके में दलितों पर अत्याचार का खौफनाक मामला सामने आया है। जबकि हरियाणा में भाजपा की सरकार है। यहां नूंह जिले के मोहलाका गांव में रहने वाले सात दलित परिवारों ने थाने में शिकायत देकर खुद पर हो रहे अमानवीय अत्याचारों की कहानी बयान की है। गांव में मुसलमानों की आबादी 3000 से अधिक है, उनके बीच 7 दलित परिवार भी यहां रहते हैं। गांव के मुसलमान उन पर अपना धर्म बदलकर मुसलमान बनने का दबाव डाल रहे हैं। अत्याचार से तंग आकर एक परिवार गांव छोड़कर पलायन भी कर चुका है। हरियाणा के मेवात इलाके में मुसलमानों की आबादी अधिक है, लिहाजा आए दिन यहां हिंदुओं पर अत्याचार और हिंदू लड़कियों के अपहरण और बलात्कार के मामले सामने आते रहते हैं। उनका शिकार बनने वालों में ज्यादातर दलित हिंदू होते हैं। दिल्ली से सटे हरियाणा के मेवात  इलाके में दलितों पर अत्याचार का खौफनाक मामला सामने आया है। यहां नूंह जिले के मोहलाका गांव में रहने वाले सात दलित परिवारों ने थाने में शिकायत देकर खुद पर हो रहे अमानवीय अत्याचारों की कहानी बयान की है। गांव में मुसलमानों की आबादी 3000 से अधिक है, उनक...

ईसाई बने दलितों की घर वापसी

आर.बी.एल निगम,वरिष्ठ पत्रकार    पिछली यूपीए सरकार के कार्यकाल में जिस गति से निर्धनों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर ईसाई बनाया गया था, आज उसी गति से ईसाई धर्म में बड़े पैमाने पर भेदभाव  से परेशान कई दलित परिवार दोबारा हिंदू धर्म अपना रहे हैं।  स्मरण हो, पिछली सरकार के चलते रोहिणी दिल्ली के होटल रॉयल में हर रविवार को ईसाईकरण का धंधा चल रहा था, जिसका वहां के स्थानीय लोगों द्वारा विरोध करने पर पुलिस ने उन्ही पर नकेल कसनी शुरू कर दी थी, लेकिन प्रभावी नेताओं के आगे पुलिस ने अपनी नौकरी बचाने समझौता नीति को अपनाकर मामले को शान्त किया। लेकिन केन्द्र में सत्ता परिवर्तन होते ही, इस काम पर विराम लग गया।  मीडिया ने निर्धन दलितों द्वारा हिन्दू धर्म छोड़ इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाए जाने पर हिन्दू धर्म गुरुओं को तो कटघरे में खड़ा करने का साहस कर सकती है, लेकिन दलितों के नाम पर बनायीं पार्टियों के प्रधानों को कटघरे में खड़ा करने का साहस नहीं। क्यों नहीं इन पार्टियों के विरुद्ध मुहिम चलाई जाती? क्या इन पार्टियों का गठन केवल उनका और उनके समर्थकों का उत्थान करने के लि...

पत्थर पूजना बेवकूफी, तो कबूला इस्लाम, तीन महीने बाद फिर बनीं हिन्दू

ओम नम: शिवाय। केरल के कासरगोड जिले की 23 साल की अथिरा जब पत्रकारों से मुखातिब हुई तो उसके मुंह से पहला वाक्य यहीं निकला। अथिरा उस युवती की कहानी है जो इसी साल जुलाई में हिन्दू धर्म को छोड़कर इस्लाम कबूल कर ली थी। जुलाई में अथिरा जब मीडिया को संबोधित कर रही थी तो वो हिजाब में थी, तब उसने कहा था, ‘मैं अपनी इच्छा से इस्लाम कबूल कर रही हूं।’ अथिरा ने तब दुनिया के सामने अपने आपको आएशा नाम से परिचित करवाया था।  इस बात से कोई सरोकार नहीं कि कोई, कौन और कब अपना धर्म-परिवर्तन कर ले। लेकिन इतना जरूर है कि जो अपने जन्म-धर्म का नहीं हुआ किसी और का क्या होगा? परन्तु एक बात आज तक समझ नहीं आयी कि इस्लाम कबूल करने वाली लड़की अथवा महिला का नाम आएशा ही क्यों रखा जाता है? कुछ अपवाद हो सकते हैं, पर अधिकतर केसों में ऐसा ही होता है।   गुरुवार 21 सितंबर को कोच्चि में आएशा ने फिर से प्रेस कॉन्फ्रेंस की। लेकिन इस बार उसकी शख्सियत बदली बदली हुई थी। इस बार आएशा की हिजाब गायब थी, उसके मस्तक पर तिलक लगा हुआ था उसने एक बिंदी लगा रखी थी। आएशा एक बार फिर से हिन्दू बन गई थी और उसने अपना पुराना नाम अथ...

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shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)