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सड़कों पर फेंकी सब्जियां, दूध की सप्लाई पर बैन : कहीं कोई षड्यंत्र तो नहीं?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  1 जून से 10 जून तक किसान हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान दूध, सब्जी व अन्य खाद्य पदार्थों को लेकर थोड़ी बहुत किल्लत हो सकती है। पंजाब के फरीदकोट में किसानों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। यहां किसान सड़कों पर सब्जियां फेंक कर विरोध जता रहे हैं। काश जो दूध और सब्जियां सड़कों पर बिखेर दी गयी वो मेरे देश के 60 करोड़ भूखे लोगों तक पहुँच जाती। सच्चा किसान माँ अन्नपूर्णा का अपमान नहीं कर सकता । अगर आप किसान है तो कृपया विरोध का कुछ और तरीका अपनाये। सड़क पर दूध फैकने के बजाय गरीब बस्तियों में बाँट दें । जो लोग सत्ता से बाहर हैं वे इसी तरह की बर्बादी वाले प्रदर्शनों को प्रमोट करके मुद्दों को sensitise बनाते हैं। असलियत सब जानते हैं कि इनके पीछे किसान हैं या किसानो के नाम पर दाम ऐंठ कर महँगी गाड़ियों में झूमने वाले लोग।  शिवलिंग पर दूध चढ़ाने को दूध की बर्बादी बताने वाले कम्युनिस्ट भी दूध और सब्जियों की इस तरह की बर्बादी का समर्थन कर रहे हैं । सच में राजनीति सही गलत में कोई अन्तर नहीं जानती। बस येन केन प्रकरेण प्रचार मिलना चाहिये। रही बात विरोध...

अन्ना हज़ारे जवाब दो: क्या किसान समस्या मोदी सरकार के कार्यकाल में हुई हैं?

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार    आखिर सात साल बाद देश में ऐसा क्‍या हुआ कि एक बार फ‍िर अन्ना हजारे को आंदोलन की राह पकड़नी पड़ी। यह जानने की जिज्ञासा और कौतुहलता जरूर आपके मन में होगी। आखिर एक बार फ‍िर अन्‍ना को लोकतंत्र खतरे में क्‍यों दिखाई देने लगा। एक बात और तब और अब के सियासी माहौल में फर्क इतना है कि इस बार केंद्र में कांग्रेस की नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जो अन्‍ना पार्ट-1 के आंदोलन में उनके मांगों के साथ खड़ी थी। दूसरी ओर दिल्‍ली राज्‍य की कमान उस युथ बिग्रेड के पास है, जिसने प्रथम आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्‍सा लिया था। पांच प्रमुख मांगों पर अड़े अन्‍ना 1- मांगों को लेकर केंद्र में मोदी सरकार 43 पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आहत होकर उनको आंदोलन की राह पकड़नी पड़ी। मोदी सरकार से लोकपाल व कृषि संकट पर बातचीत करने के प्रयास का कोई नतीजा नहीं निकला। 2- जिन किसानों के पास आय का कोई स्रोत नहीं है उसे 60 साल बाद 5000 हजार रुपय पेंशन दो। संसद में किसान बिल को पास करो। 3- देश के किसान संकट में हैं, क्योंकि उन्हें फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा ह...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)