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नगर पालिका एवं सरकारी स्कूलों के अध्यापकों की शैक्षिक योग्यता की जाँच हो

किसी भी बच्चे के भविष्य की माँ-बाप के बाद शिक्षक की होती है। लेकिन जब शिक्षक ही शिक्षा में अज्ञान होगा, बच्चों का भविष्य क्या सुधारेगा?  सोशल मीडिया पर एक लंबे समय से बिहार और उत्तर प्रदेश के शिक्षकों के अल्पज्ञान के समाचार पढ़ने में आ रहे हैं, परन्तु प्रदेश से लेकर केन्द्र सरकारें चुप्पी साधे हुए हैं, जो बहुत ही चिंता का विषय है। वैसे कई उच्च अधिकारियों द्धारा अचानक स्कूलों का निरीक्षण करने के वीडियोस भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। पता नहीं, अध्यापकों की मंद बुद्धि, दिनों एवं महीने के नाम गलत लिखने पर क्या कार्यवाही की या मुद्दे को दबा दिया गया।    एक नमूना अध्यापिका का university के स्पेलिंग देखिये  Worked at  Nagar Nigam Prathmik Sehshiksha Vidyalaya, Sarvapriya Vihar Studied at  gkp univercity ये है लखनऊ की पत्रकार biyuro chiph luckmow at  All Press & Writers Association India- APWA Went to  Gic Lives in  Lucknow, India केन्द्रीय सरकार प्रदेश का मुद्दा होने के का...

एक वो भी दौर था शिक्षा का

ये वो दौर था जब सरकारी स्कूलों में गज़ब का क्वालिटी एजुकेशन होता था, ना एसी वाली क्लास रूम और न एसी वाली बस, पानी पीने को वही लाइन से लगे हुए नल, धूल मिट्टी में लोट लोट के दौड़ भाग करके खेलना, तब 15 अगस्त और 26 जनवरी को स्कूल नहीं आने की सजा भी मिलती थी, इस दौर में स्कूल में कुछ शैतानी करते पकड़े जाने पर गुरु जी तो कुटाई करते ही थे, और शिकायत कही घर तक आ गयी तो घर में जो कुटाई पड़े वो अलग से बोनस टाइप फील होता था, तब परीक्षाएं इतने हल्के में नहीं ली जाती थी, परीक्षा का नाम सु न के अजीब सी घबराहट हो जाती थी, और जी तोड़ मेहनत के साथ पढ़ाई शुरू,  फिर स्कूल में अच्छे नंबर लेकर अच्छे कॉलेज में दाखिला, तब कॉलेज के प्रिंसिपल, एचओडी देश के राष्ट्रपति से भी ज्यादा पॉवरफुल लगते थे, कॉलेज में सर्वसुविधा युक्त जैसी तो कोई बात नहीं होती थी फिर भी वहां से पढ़ने को बच्चो की होड़ सी लग जाती थी, क्या गज़ब का नॉलेज होता था उन पढ़ाने वालो का, जिन्हे हम सही मायने में गुरु कहते है, वो क्लास में आके एक बच्चे से सिर्फ सब्जेक्ट का सिलेबस पूछ के बिन कोई किताब देखे शुरू से लेके आखिरी तक का हर कांसेप...

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shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)