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नगर पालिका एवं सरकारी स्कूलों के अध्यापकों की शैक्षिक योग्यता की जाँच हो

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Image result for कारपोरेशन स्कूल उत्तर प्रदेश किसी भी बच्चे के भविष्य की माँ-बाप के बाद शिक्षक की होती है। लेकिन जब शिक्षक ही शिक्षा में अज्ञान होगा, बच्चों का भविष्य क्या सुधारेगा?  सोशल मीडिया पर एक लंबे समय से बिहार और उत्तर प्रदेश के शिक्षकों के अल्पज्ञान के समाचार पढ़ने में आ रहे हैं, परन्तु प्रदेश से लेकर केन्द्र सरकारें चुप्पी साधे हुए हैं, जो बहुत ही चिंता का विषय है। वैसे कई उच्च अधिकारियों द्धारा अचानक स्कूलों का निरीक्षण करने के वीडियोस भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। पता नहीं, अध्यापकों की मंद बुद्धि, दिनों एवं महीने के नाम गलत लिखने पर क्या कार्यवाही की या मुद्दे को दबा दिया गया।  एक नमूना अध्यापिका का university के स्पेलिंग देखिये Worked at Nagar Nigam Prathmik Sehshiksha Vidyalaya, Sarvapriya Vihar


केन्द्रीय सरकार प्रदेश का मुद्दा होने के कारण हस्तक्षेप नहीं करती और प्रदेश सरकार अपने वोटों की चिन्ता में इस अतिगम्भीर मुद्दे पर आँखें बन्द किये बैठी है। अभी दो वर्ष पूर्व, जब एक हिंदी पाक्षिक का संपादन कर रहा था, अनेकों पत्र क्षेत्रीय संवाददाता के लिये आते, वह भी 90 प्रतिशत उत्तर प्रदेश के अध्यापकों के , जो अंग्रेजी तो क्या हिन्दी भी ढंग से नहीं लिख पाते थे। एक कन्नौज से थे, क्या लिख रहे हैं पता ही नहीं चलता लिखना क्या चाहते हैं ? कई बार ऐसे लेखों से परेशान होकर संपादक को ही लिखने के खिसका देता। 
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बच्चों को मिड-डे भोजन देना ही पर्याप्त नहीं है, शिक्षक की योग्यता सर्वोपरि होनी चाहिए। मिड-डे हमें भी मिलता था, परन्तु उस समय इसका शोर नहीं था, आज इस आड़ में व्यापार हो रहा है।  
सरकार इन्हें इस काम के सिर्फ ₹35000 महीना देती है ! देखिए बेचारी कितना काम
 कर रही है ! और सरकारी स्कूल का नाम रोशन कर रही है ! कृपया इसे शेयर करके
 देश की सरकार तक पहुंचाएं ! ताकि उन्हें पता चल सके की जो पैसे
 हम अपने टैक्स से देते हैं ! वह किस तरह सो कर उड़ाते जा रहे हैं !
इसके लिए सरकार ही दोषी है, कि आखिर किस योग्यता के आधार पर शिक्षक नियुक्त किया गया ? इतना निश्चित है जिस दिन जिस किसी भी सरकार ने नगर निगम/पालिका एवम सरकारी स्कूलों के  अध्यापकों की परीक्षा ली, हज़ारों की संख्या में अध्यापकों का निलंबन होगा। नितऱोज़ सड़कों पर प्रदर्शन और भूख हड़तालें होंगी। कुछ लोग बच्चों के भविष्य को किसी दीनदुनिया के योग्य नहीं रख रहे, वही सरकार को कोसते नज़र आएंगे।निम्न विडियो स्पष्ट संकेत दे रहा है कि इस तरह की नियुक्तियां अध्यापक की योग्यता पर नहीं वरन भ्रष्टाचार के माध्यम से हुई हैं। तथा किस शिक्षा मंत्री एवं अधिकारियों के काल में इनकी नियुक्ति हुई है, सबके खातों की जाँच हो। 

उत्तर प्रदेश में अध्यापकों का वेतन  तो सभी जानते है लेकिन इतनी सैलरी के बाबजूद क्लास रूम में शिक्षको की ये दयनीय हालत देखकर लगता हैं की बच्चो का भविष्य तो अंधकार मय हैं ही साथ में शिक्षा विभाग  में हो रही हैं कितनी धाधली ये भी दिखाता हैं l एक टीचर को लगभग उत्तर प्रदेश सरकार 35 से 40 हज़ार दे रही हैं l लेकिन इस कीमत की कॉस्टिंग निकल के क्या दे पा रहे हैं ऐसे टीचर।  ये तो सिर्फ एक वीडियो हैं ऐसे ना जाने कितने वीडियो आये दिन सोशल मीडिया में देखे जानते हैं l
वीडियो को देखकर आप अपने विचार जरुर दे l

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shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)

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