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करोड़ों कमाने वाले ये सुपरस्टार हुए कंगाल

आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक  राज किरण ने अपने करियर की शुरुआत 1970 से की। राज ने अपने करियर में कई बलॉकबस्टर फिल्में की हैं। जैसे घर हो तो ऐसा, कर्ज, बसेरा आदि। लेकिन साल 2003 में राज किरण अचानक लापता हो गए। बाद में पता चला कि वह पागलखाने में भर्ती हैं। अभिनेत्री मिताली शर्मा की हालत भी कुछ इसी तरह है। मिताली शर्मा को मुंबई की सड़को पर भीख मांगते देखा गया है। पुलिस ने मिताली को मुंबई के ओशिवारा से चोरी करते हुए पकड़ा। काम न मिलने की वजह से मिताली की यह हालत हुई। साथ ही परिवार वालों ने भी साथ छोड़ा। बॉलीवुड फिल्म मकड़ी से लाइमलाइट होने वाली अभिनेत्री श्वेता बासु प्रसाद के करियर ने तब अपने पंख नीचे कर लिए जब उन्हें सेक्स रैकेट के आरोप में गिरफ्तार किया गया। लेकिन अब उन्होंने डायरेक्टर रोहित मित्तल से सगाई कर ली है। श्वेता को फिल्म बद्रीनाथ की दुल्हनिया में देखा गया था। अवलोकन करें:-- NIGAMRAJENDRA28.BLOGSPOT.COM एक नामी एक्‍ट्रेस, लेकिन कांधा देने चार लोग भी नहीं आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक साल 1967 में सुनील दत्त और राजकुमार की बेहतरीन फिल्‍म आई थ...

बोल्ड सिनों के चर्चित रेहाना सुल्तान आज कंगाली में

70 के दशक में रेहाना की इन नंगी टांगों पर विवाद भी खूब हुआ  आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक   बॉलीवुड एक ऐसी चकाचौंध वाली दुनिया है जहाँ जाना तो हर कोई चाहता है। लेकिन कई बार इस हसीन दुनिया का ऐसा-ऐसा सच हमारे सामने आ जाता है जिसके बारे में जानकर लोग कान पकड़ लेते हैं कि नहीं भाई, हमें इस इंडस्ट्री में कभी नहीं जाना। अक्सर चकाचौंध इस नगरी में कब किसका सितारा लुप्त हो जाए कुछ नहीं पता, के विषय में लिखता रहता हूँ।जिसमे अपने पिताश्री एम.बी.एल.निगम, जो 50 के दशक में चर्चित फिल्म वितरक थे, के विषय पर "A Film Distributor To Remember" लेख के अतिरिक्त कई चर्चित फ़िल्म कलाकारों की आर्थिक स्थिति के विषय में लिखता रहता हूँ। पिताश्री के व्यवसाय कार्यकाल में एक और वितरक जैन थे, जिनका घर से निकला  कदम सीधे कार में और कार से अपने ऑफिस की चौखट पर। उनका अंदाज ही निराला था। किस्मत ने ऐसा पलटा खाया कि रोज Desai & Co में एक चाय के पैसे लेने आते थे।  देसाई एंड का. की मृत्यु उपरान्त दामाद दिनकर देसाई ने ऑफिस संभाला। जैन साहब चाय के पैसे लेने आ गए, एक-दो दिन के बाद दिनकर ने कहा...

महात्मा गाँधी के विवादित रहे हैं अंतिम शब्द "हे राम"

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  महात्मा गांधी के निजी सहायक ने करीब दो दशक पहले यह बयान देकर हलचल मचा थी कि ‘हे राम’ बापू के आखिरी शब्द नहीं थे। लेकिन जनवरी 30 को उन्होंने कहा कि उस समय उनकी बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया था। वेंकट कल्याणम 1943 से 1948 तक बापू के निजी सचिव थे। उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘मैंने कभी नहीं कहा कि गांधीजी ने ‘हे राम’नहीं बोला था। मैंने यह कहा था कि मैंने उन्हें ‘हे राम’कहते नहीं सुना...हो सकता है कि महात्मा गांधी ने वैसा कहा हो...मैं नहीं जानता।’ कल्याणम अब 96 साल के हो गए हैं और वह 30 जनवरी 1948 की उस घटना का गवाह होने का दावा करते हैं। शोरगुल के कारण मैं कुछ नहीं सुन सका उन्होंने कहा कि वह ‘घटना के बाद शोरगुल के कारण वह कुछ नहीं सुन सके। ’उन्होंने कहा, ‘महात्मा गांधी को जब गोली लगी, हर कोई चिल्ला रहा था। मैं उस शोर में कुछ नहीं सुन सका। हो सकता है कि उन्होंने हे राम बोला हो। मैं नहीं जानता।’ उन्होंने 2006 में कोल्लम में एक संवाददाता सम्मेलन में यह कह कर पूरे देश को चौंका दिया था कि जब नाथूराम गोडसे की गोलियां लगने से महात्मा गांधी गिर ग...

मशहूर गायिका मीना कपूर की गुमनामी में मृत्यु

संकट के दिनों में कल की चर्चित गायिका मीना कपूर  को किसी ने नहीं पूछा  आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक  अपने स्कूली दिनों से दिलों पर राज करने वाली बीते वर्षों की चर्चित गायिका मीना कपूर मौत के वक्त गुमनामी में जीवन जीने को बाध्य थी।  मेरी जान संडे के संडे और रसिया रे मन बसिया रे जैसे सुपरहिट गीतों की गायिका मीना कपूर का कोलकाता में नवम्बर 23  को निधन हो गया।  मीना कपूर पिछले कुछ सालों से बीमार चल रही थी। उनको लकवा मार गया था. उनके निधन की पुष्टि बेटी शिखा वोरा ने की। उन्होंने बताया कि हमें मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है।  वह पिछले कई सालों से लकवा से जूझ रही थी। जब से वह कोलकाता में रहने लगी थीं, वह हमारे संपर्क में नहीं थीं। इसलिए हमें उनकी हालत के बारे में कोई जानकारी नहीं। गुमनामी की हालत में मृत्यु की गोद में विश्राम करने वाली मीना कपूर पहली महिला नहीं है, एक लम्बी सूची है। एक शेर है : जब तक थे अहमक की जेब में पैसे  लोग कहते अजी आप हैं ऐसे वैसे  जब जेब में नहीं रहे पैसे  ...

अकबर बादशाह था या "गाज़ी" ?

क्या आप जानते हैं कि ‘गाज़ी’ एक पदवी है जो किसी काफिर को मारने से मिलती है ! जानिए कि ‘अकबर’ ने यह ‘गाज़ी’ पदवी कैसे प्राप्त की और इतिहासकारों ने कैसे उसे ‘पापी-धूर्त अकबर’ से ‘अकबर महान’ बनाया..... बैरम खाँ ने निहत्थे और बुरी तरह घायल हिन्दू राजा हेमू के हाथ-पैर बाँध दिये और उसे नौजवान शहजादे अकबर के पास ले गया और बोला- ‘‘आप अपने पवित्र हाथों से इस काफिर को कत्ल कर दें और ”गाज़ी” की उपाधि कुबूल करें।’’ अकबर ने बंदी हेमू का सिर उसके धड़ से अलग कर दिया। (नवम्बर, 5 ई. 1556) इस तरह  अकबर ने 14 साल की आयु में ही गाज़ी (काफिरों का कातिल) होने का सम्मान पाया। इसके बाद हेमू के कटे सिर को काबुल भिजवा दिया गया और धड़ को दिल्ली के दरवाजे पर टांग दिया। हेमू के पिता को नासिर-उल-मलिक के सामने पेश किया गया जिसने उसे इस्लाम कबूल करने का आदेश दिया। उस वृद्ध पुरुष ने कहा- ‘‘मैंने 80 वर्ष तक अपने ईश्वर की पूजा की है; मै अपने धर्म को कैसे त्याग सकता हूँ?’’ मौलाना परी मोहम्मद ने उसके उत्तर को अनसुना कर अपनी तलवार से उसका सर काट दिया। (तारीख-ई-अफगान, अहमद यादगार, अनुवाद एलियट और डाउसन, खण्ड 6, पृष्ठ 6...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)