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शरद यादव ने राम जन्मभूमि और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर दिया विवादित बयान

आर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार   कुर्सी की भूख क्या अजीब होती है, जो तुष्टिकरण के आगे नतमस्तक होकर अपने ही देवी-देवताओं को दरकिनार कर देती है। यादव वंश जिसे श्रीकृष्ण का वंशज कहा जाता है, वही यादव वंश पुरुषोत्तम श्रीराम के विरुद्ध उल्टा-सीधा बोलता रहता है। मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री रहते निहत्ते रामभक्तों पर गोलियाँ चलवा देते हैं, तो अब यादव वंश के एक और अपने आपको हिन्दू कहने वाले शरद यादव श्रीराम के विरुद्ध बयानबाज़ी कर चुनावी माहौल में रामजन्मभूमि मुद्दे को जीवित कर दिया है। लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) नेता  शरद यादव  ने  राम जन्मभूमि  को लेकर विवादित बयान दिया है। शरद यादव ने राम जन्मभूमि को लेकर कहा कि उनकी राम जन्मभूमि में कोई श्रद्धा नहीं है। और वह जिंदा आदमी को पूजते हैं। शरद जब ज़िन्दा आदमी को पूजते हैं, तो शायद पितृपक्ष(श्राद्ध) भी मानते हो, सन्देह होता है, क्योंकि यह मृतक पूर्वजों के लिए होते हैं। अगर मानते है, तो मात्र अपने पेट की खातिर कुर्सी बने रहने के लिए दिया बयान, जिसका इन्हे और इनके समर्थकों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उनके इस वि...

मुस्लिम लीग ने आर्थिक मदद का वादा किया था: रोहित वेमुला की मां

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में सुसाइड करने वाले छात्र रोहित वेमुला के परिवार को आर्थिक मदद दिए जाने के मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है। मोदी सरकार के मंत्री  पीयूष गोयल  ने जून 20 को कहा कि मुस्लिम लीग ने वेमुला की मां राधिका को 20 लाख रुपए देने का झूठा वादा किया था। बदले में राजनीतिक फायदा उठाने के लिए उनसे कहा गया कि वे लीग की रैलियों में पहुंचे और सुसाइड केस को गलत तरीके से पेश करने के लिए बयान दें। गोयल ने कांग्रेस पर भी इस मामले में सवाल उठाए हैं। राधिका ने पिछले दिनों मुस्लिम लीग पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया था। हालांकि कुछ दिनों बाद वह अपने बयानों से पलट गईं। लगता है, उनके पास पैसे पहुँच गए। पीएचडी की पढ़ाई कर रहे रोहित का शव जनवरी, 2016 में हॉस्टल में फंदे पर लटका मिला था। राजनीतिक बढत के लिए किया उपयोग राधिका वेमुला ने बताया, ‘एक महीने के अंदर ही वह लोग हमें केरल ले गए । वहां पर उन्होंने हमें बडी रैलियों में बुलवाया, जहां 30 से 40 हजार लोग मौजूद थे। उन्होंने हमसे वादा किया कि वे लोग हमें 20 लाख रुपये देंगे और हमारे लिए नया घर बनवा देंगे।” राधिका वेम...

संविधान में नहीं है 'दलित' शब्द, सरकारों को इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए : हाई कोर्ट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को अपने पत्राचार में  दलित शब्द  का प्रयोग करने से बचना चाहिए क्योंकि संविधान में इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया है. ग्वालियर के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मोहनलाल माहोर की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संजय यादव और न्यायमूर्ति अशोक कुमार जोशी की खंडपीठ ने कहा कि उसे इस बारे में कोई संदेह नहीं कि सरकारी कर्मचारी इस शब्द का इस्तेमाल नहीं करें. संविधान में नहीं है जिक्र पीठ ने कहा कि इस मामले में, 'चूंकि याचिकाकर्ता केंद्र सरकार, राज्य सरकार के पदाधिकारियों द्वारा जारी ऐसा कोई दस्तावेज रिकॉर्ड में नहीं ला सका जहां कहा गया हो कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति शब्द की जगह दलित शब्द का प्रयोग किया जाए. इसलिए, हम किसी हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं हैं.' पीठ ने कहा कि हालांकि हमें इस बात पर कोई संदेह नहीं कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और इसके कर्मियों को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के लिए दलित शब्द के प्रयोग से बचना चाहिए क्योंकि दलित शब्द का संविधान या किसी कानून में जिक्र नहीं मिलता. याचिकाकर्ता के वक...

जिग्नेश मेवानी के नाम मनुस्मृति और जातिवाद पर खुला पत्र

डॉ विवेक आर्य अपने आपको दलित नेता कहने वाले जिग्नेश मेवानी ने दिल्ली रैली में मनुस्मृति और भारतीय संविधान में से किसी एक को चुनने का प्रस्ताव दिया है। मैं दवा करता हूँ कि जिग्नेश मेवानी ने अपने जीवन में कभी मनुस्मृति को पढ़ा तक नहीं है। अन्यथा वह ऐसा निराधार प्रस्ताव कभी नहीं करता। मंच पर खड़े होकर मनुवाद और ब्राह्मणवाद के जुमले उछालना बेहद आसान हैं। मनुस्मृति के विषय में सत्य और वास्तविक ज्ञान का होना अलग बात है। मैं इस लेख के माध्यम से जिग्नेश मेवानी को चुनौती देता हूँ कि वो आये और मनु क्यों गलत यह यह सिद्ध करे। इस लेख को पढ़कर पाठक अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दे। मनुस्मृति जो सृष्टि में नीति और धर्म (कानून) का निर्धारण करने वाला सबसे पहला ग्रंथ माना गया है उस को घोर जाति प्रथा को बढ़ावा देने वाला भी बताया जा रहा है। आज स्थिति यह है कि मनुस्मृति वैदिक संस्कृति की सबसे अधिक विवादित पुस्तक बना दी गई है | पूरा का पूरा दलित आन्दोलन मनुवाद' के विरोध पर ही खड़ा हुआ है। ध्यान देने वाली बात यह है कि मनु की निंदा करने वाले इन लोगों ने मनुस्मृति को कभी गंभीरता से पढ़ा भी नहीं है। स्वामी दया...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)