आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार वामपंथी किस तरह दलित और महिला उत्पीड़न से संसद के दोनों सदनों और सडकों पर मोदी सरकार को बदनाम करने शोर-शराबा करते नज़र आते हैं और वास्तविकता से कोसों मील दूर दलित और उनके समर्थक ताल से ताल मिलाते नज़र आते हैं। लेकिन दलित और महिला उत्पीड़न का नंगा नाच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी में देखने को मिला। एक से बढ़कर एक बुद्धिजीवी दलित और महिलाएँ इस पार्टी में विराजमान हैं, लेकिन दलित और महिला उत्पीड़न का स्वांग कर जनता को भ्रमित करने का प्रमाण देखिए। दलितों, मजदूरों और शोषितों की बात करने वाली मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीएम ने एक बार फिर से अपनी सर्वोच्च संस्था पोलित ब्यूरो में दलितों की एंट्री बंद रखी है। 17 सदस्यों की पोलित ब्यूरो में एक भी दलित नेता को जगह नहीं दी गई है। सीपीएम ने अपने पूरे इतिहास में कभी पोलित ब्यूरो के दरवाजे किसी दलित के लिए नहीं खोले। इस बार उस पर भारी दबाव था कि इसमें किसी दलित को भी मौका दिया जाए, लेकिन इस बार भी उन्हें अछूत का दर्जा ही दिया गया। यह स्थिति तब है जब पार्टी के अंदर कई ...