नाटक बनाने वाला जानता है कि आगे क्या होने वाला है, कांड करने वाला जानता है कि इस कांड की क्या प्रतिक्रिया होने वाली है, साजिश रचने वाला जानता है कि इस साजिश का क्या रिजल्ट निकलेगा। यही काम पाकिस्तान करता है और हम उसके हाथों का मोहरा बनकर पाकिस्तान का ही काम आसान कर देते हैं। हमारा मीडिया भी पाकिस्तान का काम आसान कर देता है। ऐसा नहीं है कि पूरा कश्मीर ही अलगाववाद और पाकिस्तान समर्थक है, कुछ मुट्ठीभर लोग ही ऐसा करते हैं, मान लीजिये पाकिस्तान ने अलगाववादियों को एक करोड़ रुपये देकर उनसे बोल दिया – यार दो चार लौंडों को खड़ा करके उनसे पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगवा दो और पाकिस्तान जिंदाबाद बुलवा दो। अब एक करोड़ रुपये कम तो होते नहीं, अलगाववादी एक करोड़ रुपये लेंगे, दो चार लौंडों को इकठ्ठा करेंगे, पाकिस्तान झंडा लेकर उन्हें खड़ा करवा देंगे और उनसे पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगवा देंगे, बाद में उन्हें पांच पांच सौ रुपये थामकर चलता कर देंगे। इस भीड़ में इन अलगाववादियों के बच्चे कहाँ है? कश्मीर की आबादी करीब ५० लाख है, अब केवल दो चार लौंडों के द्वारा पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने के बा...