भारत में कोई भी विचार, कानून या कोई योजना लागू होने से पूर्व ही छद्दम धर्म-निरपेक्षों को सामाजिक असुरक्षा, साम्प्रदायिकता और मानव अधिकार की अवहेलना नज़र आने लगती है। लेकिन भारत के पड़ोसी पाकिस्तान में किस तरह की घोषणाएँ हो रही है, उससे शिक्षा लेने की कोशिश तक नहीं करते। अब ऐसे लोगों को किस नाम से सम्बोधित किया जाए? जब संविधान की रचना की गयी थी, Secular शब्द नहीं था, छद्दम धर्म-निरपेक्ष बताएँ यह शब्द किस प्रधानमंत्री के कार्यकाल में जुड़ा और किस वोट बैंक की खातिर इस शब्द को जोड़ा गया था? पिछली युपीए सरकार में हिन्दू धर्म को कलंकित किया जा रहा था, भगवा आतंकवाद के नाम से बदनाम किया जा रहा था, और Anti-violence Communal Bill (घोर हिन्दू विरोधी बिल) को लाने का प्रयास किया जा रहा था, किसी को असुरक्षा, साम्प्रदायिकता और मानव अधिकारों की अवहेलना नज़र नहीं आ रही थी। जो सिद्ध करता है कि भारत में नेता देशहित से पहले अपनी कुर्सी और वोट-बैंक को सर्वोपरि समझते हैं। पाकिस्तान के एक उच्च न्यायालय ने मार्च 10 को आदेश दिया कि किसी सार्वजनिक पद को संभालने जा रहे व्यक्ति को अपनी धार्मिक आस...