एक कहावत है : दिल के फफोले जल उठे, सीने की आग से घर को आग लग गयी, घर के चिराग से। और इसे चरितार्थ कर रहे हैं आम आदमी पार्टी के संस्थापकों में रहे योगेन्द्र यादव और प्रशान्त भूषण। कारण भी है कि जिस पार्टी को खड़ा करने में जो योगदान इन दोनों को था, केजरीवाल स्वयं का नहीं था। और जब पार्टी को नए आयाम की जरुरत थी, केजरीवाल ने पार्टी के कर्णधारों को ही बाहर का रास्ता दिखाकर अपने पैरोँ पर स्वयं कुल्हाड़ी मार ली। यही कारण है कि पार्टी नितऱोज़ एक नए विवाद में घिरती जा रही है। उपराज्यपाल से टकराव की स्थिति भी नहीं आती और जनता से किये वायदे भी पूरे हो रहे होते। लेकिन प्रशासनिक अनुभवहीनता के ही कारण विवादों का जाल बन कर सब पर पानी फेर लिया। सियासी हुआ स्वराज अभियान आम आदमी पार्टी से बगावत कर नई राह पकड़ने वाले अरविंद केजरीवाल के पुराने साथी योगेंद्र यादव ने अब एक नई शुरुआत कर दी है। योगेंद्र यादव के स्वराज अभियान ने अब राजनैतिक पार्टी बनाने का एलान कर दिया है। दो अक्टूबर तक स्वराज अभियान को सियासी दल बनाने की प्रक्रिया को पूर...