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दुनिया का अकेला मंदिर जहां पूजा जाता है भगवान शिव के पैर का अंगूठा.. जो भी गया उसने दुनिया जीती

दुनियाभर में भगवान शिव के कई मंदिर हैं। सभी मंदिर की अपनी कोई न कोई विशेषता भी है। भगवान शिव के जितने भी मंदिर हैं, सभी जगह या तो शिवलिंग की पूजा की जाती है या मूर्ति की।  लेकिन राजस्थान के माउंट आबू के अचलगढ़ का अचलेश्वर महादेव मंदिर बाकी सभी मंदिरों से अलग है, क्योंकि इस मंदिर में भगवान शिव के शिवलिंग या मूर्ति की नहीं बल्कि उनके पैर के अंगूठे की पूजा की जाती है। राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू को अर्धकाशी के नाम से भी जाना जाता है क्योकि यहां पर भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं। पुराणों के अनुसार, वाराणसी भगवान शिव की नगरी है तो माउंट आबू भगवान शंकर की उपनगरी। अचलेश्वर माहदेव मंदिर माउंट आबू से लगभग 11 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में अचलगढ़ की पहाड़ियों पर किले के पास है। इस मंदिर को लेकर यहां मान्यता प्रचलित है कि यहां का पर्वत भगवान शिव के अंगूठे की वजह से टिका हुआ है। जिस दिन यहां से भगवान शिव के अंगूठा गायब हो जाएगा, उस दिन यह पर्वत नष्ट हो जाएगा। यहां पर भगवान के अंगूठे के नीचे एक प्राकृतिक खड्ढा बना हुआ है। इस खड्ढे में कितना भी पानी डाला जाएं, लेकिन यह कभी भरता न...

छत्तीसगढ़ में मिली महादेव की 1000 साल पुरानी सोने की मूर्ति

छत्तीसगढ़ के  रानीवाड़ा तहसील की प्राचीन रत्नावटी नगरी यानि रतनपुर गांव के पास सोने की शिव प्रतिमा मिली है। Ramesh Singh Prajapati about 8 months ago छत्तीसगढ़ के रतनपुर गांव में मिली शंकर जी की सोने की मूर्ति व मूर्ति के साथ सांपों का झुंड भी Play -1:01 Additional Visual Settings Enter Fullscreen Unmute शिव गण about 2 weeks ago छत्तीसगढ़ के रतनपुर गांव में मिली शंकर जी की सोने की मूर्ति 12 8 12 ग्रामीणों के द्वारा सूचित करने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जब्त कर थाने लाया गया। मूर्ति को देखने आस पास के लोग काफी तादात में आ रहे है। थानाधिकारी चंपाराम बारड ने बताया ग्रामीणों की सूचना पर रतनपुर गांव में रेल पटरी के पास से इस प्रतिमा को बरामद किया गया है। शिव की यह प्रतिमा बहुत ही खुबसूरत, आकर्षक और सोने से निर्मित है। शिक्षाविद छैलसिंह देवड़ा ने बताया कि मूर्ति अन्दर से खोखली है और शिवलिंग के ऊपर स्थापित होने वाली है। इसक...

ॐ त्र्यंबकम् मंत्र के 33 अक्षर हैं

जो महर्षि वशिष्ठ के अनुसार 33 देवताआं के घोतक हैं। उन तैंतीस देवताओं में 8 वसु 11 रुद्र और 12 आदित्यठ 1 प्रजापति तथा 1 षटकार हैं। इन तैंतीस देवताओं की सम्पूर्ण शक्तियाँ महामृत्युंजय मंत्र से निहीत होती है जिससे महा महामृत्युंजय का पाठ करने वाला प्राणी दीर्घायु तो प्राप्त करता ही हैं । साथ ही वह नीरोग, ऐश्व‍र्य युक्ता धनवान भी होता है । महामृत्युंरजय का पाठ करने वाला प्राणी हर दृष्टि से सुखी एवम समृध्दिशाली होता है । भगवान शिव की अमृतमययी कृपा उस निरन्तंर बरसती रहती है। • त्रि - ध्रववसु प्राण का घोतक है जो सिर में स्थित है। • यम - अध्ववरसु प्राण का घोतक है, जो मुख में स्थित है। • ब - सोम वसु शक्ति का घोतक है, जो दक्षिण कर्ण में स्थित है। • कम - जल वसु देवता का घोतक है, जो वाम कर्ण में स्थित है। • य - वायु वसु का घोतक है, जो दक्षिण बाहु में स्थित है। • जा- अग्नि वसु का घोतक है, जो बाम बाहु में स्थित है। • म - प्रत्युवष वसु शक्ति का घोतक है, जो दक्षिण बाहु के मध्य में स्थित है। • हे - प्रयास वसु मणिबन्धत में स्थित है। • सु -वीरभद्र रुद्र प्राण का बोधक है। दक्षिण हस्त के अंगुलि के मुल में...

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shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)