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पत्रकार रोहित सरदाना को मिल रही धमकियां

जनसत्ता के अनुसार हिंदी न्यूज़ चैनल आज तक के एंकर और पत्रकार रोहित सरदाना ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मदद मांगी है। रोहित का कहना है कि उन्हें और उनके परिवार को कुछ नंबर्स के द्वारा फोन पर लगातार धमकियां मिल रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने उन फोन नंबर्स की सूची भी ट्विटर के माध्यम से शेयर की है। उन्होंने सीएम योगी, यूपी पुलिस और राजनाथ सिंह को ट्वीट कर कहा, ‘कृपया संज्ञान लें। इन नंबर्स से लगातार मुझे और मेरे परिवार को धमकाने वाले फोन कॉल्स आ रहे हैं। कृपया उचित कार्रवाई करें।’ इसके साथ ही उन्होंने सैयद मेहंदी नाम के एक व्यक्ति का ट्वीट भी शेयर किया है। सैयद मेहंदी ने सरदाना को काफी अभद्र भाषा में भला-बुरा कहा है। इस ट्वीट को शेयर करते हुए सरदाना ने जानकारी दी है कि इस व्यक्ति ने उन्हें करीब दस ट्वीट्स किए हैं। उन्होंने लिखा, ‘ये सज्जन गालियों भरी भाषा में दसियों ट्वीट कर चुके हैं, लेकिन ‘ओवरटाइम’ नहीं कर रहे!’ इससे पहले भी पत्रकार ने ट्विटर पर कहा था कि उन्हें मजा चखाने के लिए कोई आबिद, कोई नकवी, कोई हैदर- लखनऊ, गुजरात, अफ्र...

मौलाना ने हिंदू महिला एंकर को धमकाया- हमारी आबादी बढ़ जाने दो, तुम्हारे घर में घुसकर नमाज पढ़ेंगे

भारत में तुष्टिकरण की राजनीति खेलने वालों, मोब लिंचिंग, अवार्ड वापसी गैंग, मानवाधिकार का शोर मचाने वाले कहाँ गए? क्या अब उन सब के घरों में कोई शोक चल रहा है? इन लोगों ने किस सीमा तक भारत ही नहीं समस्त विश्व को भारतीय इतिहास की वास्तविकता से भ्रमित कर रखा है। आतताई यानि मुग़लों के शर्मनाक इतिहास पर पर्दा डाल महान शासक बताने वाले इतिहासकार चाँदी के चंद टुकड़ों के लालच में उन महानतम हिन्दू सम्राटों के इतिहास से अज्ञान रखने में तनिक भी शर्म नहीं आयी। क्या ऐसे बिकाऊ इतिहासकारों को इतिहासकार कहा जाना चाहिए? जिस सिकन्दर को हिन्दू सम्राट पोरस ने वास्तव में धरती की धूल चटवा कर पीट-पीट कर भारत से ऐसा भगाया कि फिर भारत की ओर देखने का साहस तक नहीं कर पाया, उसी सिकंदर को विश्व विजेता बताया गया। इतना ही नहीं, ईरान ने भी सिकंदर को चारों खाने चित करने में हिन्दू सम्राट पोरस से सहायता ली थी। लाल कोट उर्फ़ लाल किला को बताया जाता है कि इसे शाहजहाँ ने बनवाया था, जबकि वास्तविकता एकदम पलट है। शाहजहाँ तो क्या उसके फ़रिश्ते भी ऐसा स्मारक नहीं बना सकते थे। लेकिन तुष्टिकरण के  चलते हमें पढ़ाया कि यह शाहजहाँ से ...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)