वैसे तो हर नवरात्रि में मां दुर्गा के सभी नौ रुपों की खास तौर से पूजा-अर्चना की जाती है. नवदुर्गा और दस महाविद्याओं में काली माता को सर्वोच्च स्थान दिया गया है. माता के नौ रुपों की आराधना मात्र से कलियुग में हर इंसान अपना कल्याण कर सकता है. नौ रुपों में समाहित माता की शक्ति अनंत है यानि जिसका कोई अंत ही नहीं है. जिस तरह माता की शक्ति अनंत है उसी तरह उनके नाम भी असंख्य हैं. माता काली का एक ऐसा दिव्य मंत्र है जो मां के नौ स्वरुपों को समर्पित है. यह मंत्र नौ अक्षरों से मिलकर बना है. इस मंत्र जाप से कुंडली के सभी ग्रहों की पीड़ा देखते-ही-देखते दूर हो जाती है और व्यक्ति अपने जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति पा लेता है. माता काली का दिव्य मंत्र ‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै:’ माता काली का यही वो खास मंत्र है, जो इंसान के जीवन में आनेवाले सभी संकटों और ग्रहों की पीड़ा को शांत करने की क्षमता रखता है. माता के ये दिव्य मंत्र जाप खासतौर पर नवरात्रि में किया जाता है क्योंकि नवरात्रि में इस मंत्र जाप का फल कहीं ज्यादा मिलता है. तंत्र साधना करनेवाले तांत्रिक इस मंत्र का सवा लाख, प...