आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार अस्सी के दशक में राजेश खन्ना और मुमताज़ अभिनीत दुलाल गुहा की फिल्म "दुश्मन" का एक गीत "खुशबू आ नहीं सकती, कभी कागज के फूलों से, सच्चाई छुप नहीं सकती कभी बनावट के असूलों से" कांग्रेस के परिपेक्ष में सटीक बैठती है। दरअसल जिस नेहरू-गाँधी परिवार को लोग कश्मीरी हिन्दू ब्राह्मण समझते हैं, वास्तव में ये परिवार मुस्लिम है। जिसका सर्वप्रथम रहस्योघाटन लगभग 25 वर्ष पूर्व कलकत्ता(वर्त्तमान कोलकाता) से प्रकाशित "शक्ति सन्देश" पत्रिका ने विस्तार से किया था। फिर मुम्बईवासी सुप्रीम कोर्ट अभिवक्ता श्री आर. वी. भसीन ने Organiser साप्ताहिक में लेख प्रेषित किया था, जिसे पुष्टि न होने के कारण प्रकाशित नहीं किया जा सका था। उसके पश्चात मैंने अपने ब्लॉग पर "The story of two Lals" लिखा जिसे गूगल पर भी पढ़ा जा सकता है। लेकिन अब सोशल मीडिया पर भी इस परिवार के मुस्लिम होने की पुष्टि की जा रही है। http://www.dainik-bharat.org/2017/11/blog-post_57.html आश्चर्य इस बात से होता है कि इस परिवार में अब तक मृतकों का अंतिम संस्कार हिन्दू रीति...