अस्सी के दशक में राजेश खन्ना और मुमताज़ अभिनीत दुलाल गुहा की फिल्म "दुश्मन" का एक गीत "खुशबू आ नहीं सकती, कभी कागज के फूलों से, सच्चाई छुप नहीं सकती कभी बनावट के असूलों से" कांग्रेस के परिपेक्ष में सटीक बैठती है। दरअसल जिस नेहरू-गाँधी परिवार को लोग कश्मीरी हिन्दू ब्राह्मण समझते हैं, वास्तव में ये परिवार मुस्लिम है। जिसका सर्वप्रथम रहस्योघाटन लगभग 25 वर्ष पूर्व कलकत्ता(वर्त्तमान कोलकाता) से प्रकाशित "शक्ति सन्देश" पत्रिका ने विस्तार से किया था। फिर मुम्बईवासी सुप्रीम कोर्ट अभिवक्ता श्री आर. वी. भसीन ने Organiser साप्ताहिक में लेख प्रेषित किया था, जिसे पुष्टि न होने के कारण प्रकाशित नहीं किया जा सका था। उसके पश्चात मैंने अपने ब्लॉग पर "The story of two Lals" लिखा जिसे गूगल पर भी पढ़ा जा सकता है। लेकिन अब सोशल मीडिया पर भी इस परिवार के मुस्लिम होने की पुष्टि की जा रही है।
आश्चर्य इस बात से होता है कि इस परिवार में अब तक मृतकों का अंतिम संस्कार हिन्दू रीति से किया गया। जिस कारण इस परिवार के मुस्लिम होने की वास्तविकता जगजाहिर नहीं हो पायी।
इस सन्दर्भ में निम्न लिंक का अवलोकन करें:-
http://www.shankhnad.org/2016/02/truth-of-india-gandhi.html
पिछली...सरकार ने इंदिरा गाँधी को एक बहुत ही जिम्मेदार , ताकतवर और राष्ट्रभक्त महिला बताया है और आप भी इंदिरा को आयरन लेडी समझते हैं चलिए इसकी कुछ कडवी हकीकत से मैं भी आज आपको रूबरू करवाता हूँ !!!
इंदिरा प्रियदर्शिनी ने नेहरू राजवंश को अनैतिकता की नयी ऊँचाई पर पहुचाया. बौद्धिक इंदिरा को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था लेकिन वहाँ से जल्दी ही पढाई में खराब प्रदर्शन के कारण बाहर निकाल दी गयी. उसके बाद उनको शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें उसके दुराचरण के लिए बाहर कर दिया.
शान्तिनिकेतन से बाहर निकाल जाने के बाद इंदिरा अकेली हो गयी. राजनीतिज्ञ के रूप में पिता राजनीति के साथ व्यस्त था और मां तपेदिक के कारण स्विट्जरलैंड में मर रही थी. उसके इस अकेलेपन का फायदा फ़िरोज़ खान नाम के व्यापारी ने उठाया. फ़िरोज़ खान।मोतीलाल नेहरु के घर पर मेहेंगी विदेशी शराब की आपूर्ति किया करता था. फ़िरोज़ खान और इंदिरा के बीच प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो गए.
महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल डा. श्री प्रकाश ने नेहरू को चेतावनी दी, कि फिरोज खान इंदिरा के साथ अवैध संबंध बना रहा था. फिरोज खान इंग्लैंड में था और इंदिरा के प्रति उसकी बहुत सहानुभूति थी. जल्द ही इंदिरा अपने धर्म का त्याग कर,एक मुस्लिम महिला बनी और लंदन के एक मस्जिद में फिरोज खान से उसकी शादी हो गयी. इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू ने नया नाम #मैमुना_बेगम रख लिया.
उनकी मां कमला नेहरू इस शादी से काफी नाराज़ थी जिसके कारण उनकी तबियत और ज्यादा बिगड़ गयी. नेहरू भी इस धर्म रूपांतरण से खुश नहीं था क्योंकि इससे इंदिरा के प्रधानमंत्री बनने की सम्भावना खतरे में आ गयी. तो, नेहरू ने युवा फिरोज खान से कहा कि अपना उपनाम खान से गांधी कर लो.
परन्तु इसका इस्लाम से हिंदू धर्म में परिवर्तन के साथ कोई लेना - देना नहीं था. यह सिर्फ एक शपथ पत्र द्वारा नाम परिवर्तन का एक मामला था. और फिरोज खान फिरोज गांधी बन गया , हालांकि यह बिस्मिल्लाह शर्मा की तरह एक असंगत नाम है. दोनों ने ही भारत की जनता को मूर्ख बनाने के लिए नाम बदला था. जब दोंनो भारत लौटे, एक नकली वैदिक विवाह जनता के उपभोग के लिए स्थापित किया गया था. इस प्रकार, इंदिरा और उसके वंश को काल्पनिक नाम गांधी मिला. नेहरू और गांधी दोनों #फैंसी नाम हैं. जैसे एक गिरगिट अपना रंग बदलती है, वैसे ही इन लोगों ने अपनी असली पहचान छुपाने के लिए नाम बदले. .
के.एन. राव की पुस्तक नेहरू राजवंश(10:8186092005 ISBN) में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है संजय गांधी फ़िरोज़ गांधी का पुत्र नहीं था, जिसकी पुष्टि के लिए उस पुस्तक में अनेक तथ्यों को सामने रखा गया है. उसमें यह साफ़ तौर पर लिखा हुआ है कि संजय गाँधी एक और मुस्लिम मोहम्मद यूनुस नामक सज्जन का बेटा था.
दिलचस्प बात यह है कि एक सिख लड़की मेनका का विवाह भी संजय गाँधी के साथ मोहम्मद यूनुस के घर में ही हुआ था. मोहम्मद यूनुस ही वह व्यक्ति था जो संजय गाँधी की विमान दुर्घटना के बाद सबसे ज्यादा रोया था.
यूनुस की पुस्तक व्यक्ति जुनून और राजनीति
(persons passions and politics )
(ISBN-10:
0706910176) में साफ़ लिखा हुआ है कि संजय गाँधी के जन्म के बाद उनका खतना पूरे मुस्लिम रीति रिवाज़ के साथ किया गया था.
कैथरीन फ्रैंक की पुस्तक
"the life of Indira Nehru Gandhi
(ISBN:9780007259304)
में इंदिरा गांधी के अन्य प्रेम संबंधों के कुछ पर प्रकाश डाला है. यह लिखा है कि इंदिरा का पहला प्यार शान्तिनिकेतन में जर्मन शिक्षक के साथ था. बाद में वह एमओ मथाई, पिता के सचिव धीरेंद्र ब्रह्मचारी इंदिरा का योग शिक्षक के साथ और दिनेश सिंह विदेश मंत्री के साथ भी अपने प्रेम संबंधो के लिए प्रसिद्द हुई. पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इंदिरा गांधी के मुगलों के लिए संबंध के बारे में एक दिलचस्प रहस्योद्घाटन किया अपनी पुस्तक
"profiles and letters " (ISBN: 8129102358) में किया.
यह कहा गया है कि 1968 में इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री के रूप में अफगानिस्तान की सरकारी यात्रा पर गयी थी .
नटवरसिंह एक आईएफएस अधिकारी के रूप में इस दौरे पे गए थे. दिन भर के कार्यक्रमों के होने के बाद इंदिरा गांधी को शाम में सैर के लिए बाहर जाना था . कार में एक लंबी दूरी जाने के बाद, इंदिरा गांधी बाबर की कब्रगाह के दर्शन करना चाहती थी, हालांकि यह इस यात्रा कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया. अफगान सुरक्षा अधिकारियों ने उनकी इस इच्छा पर आपत्ति जताई पर इंदिरा अपनी जिद पर अड़ी रही . अंत में वह उस कब्रगाह पर गयी . यह एक सुनसान जगह थी. वह बाबर की कब्र पर सर झुका कर आँखें बंद करके खड़ी रही और नटवर सिंह उसके पीछे खड़े थे . जब इंदिरा ने उसकी प्रार्थना समाप्त कर ली तब वह मुड़कर नटवर से
बोली आज मैंने अपने इतिहास को ताज़ा कर लिया ( Today we have had our brush with history ).
यहाँ आपको यह बता दें कि बाबर मुग़ल साम्राज्य का संस्थापक था, और नेहरु खानदान इसी मुग़ल साम्राज्य से उत्पन्न हुआ. इतने सालों से भारतीय जनता इसी धोखे में है कि नेहरु एक कश्मीरी पंडित था....जो की सरासर गलत तथ्य है..... भाई संजीव कुमार जी ने कांग्रेस का जन्म दिनांक ८-९-२०१५ में आपको पहले ही बता दिया है इस तरह इन नीचों ने भारत में अपनी जड़ें जमाई जो आज एक बहुत बड़े वृक्ष में तब्दील हो गया है जिसकी महत्वाकांक्षी शाखाओं ने माँ भारती को आज बहुत जख्मी कर दिया हैं यह मेरा एक प्रयास है कि आज इस सोशल मीडिया के माध्यम से ही सही मगर हकीकत से रूबरू करवा सकूं!!! बाकी देश के प्रति यदि आपकी भी कुछ जिम्मेदारी बनती हो , तो अब आप लोग निःशब्द ना बनियेगा इसे फैला दीजिए हर घर में !!!!
रॉबर्ट और प्रियंका की शादी सन 1997 में हुई थी .लेकिन अगर कोई रॉबर्ट को ध्यान से देखे तो यह बात सोचेगा कि सोनिया ने रॉबर्ट जैसे कुरूप और साधारण व्यक्ति से प्रियंका की शादी कैसे करवा दी?
क्या उसे प्रियंका के लिए कोई उपयुक्त वर नहीं मिला ? और यह शादी जल्दी में और चुपचाप क्यों की गयी ???
वास्तव में सोनिया ने रॉबर्ट से प्रियंका की शादी अपनी पोल खुलने के डर से की थी . क्योंकि जिस समय #सोनिया इंगलैंड में एक कैंटीन में #बारगर्ल थी . उसी समय उसी जगह रोबट की माँ #मौरीन (Maureen)
भी यही काम करती थी मौरीन को #सोनिया_और_माधव_राव_सिंधिया की रास लीला की बात पता थी , जब वह उसी कैंटीन सोनिया उनको #शराब_पिलाया_करती थी .
मौरीन यह भी जानती थी कि किन किन लोगों के साथ सोनिया के अवैध सम्बन्ध थे .
जब सोनिया राजीव से शादी करके दिल्ली आ गयी , तो कुछ समय बाद मौरीन भी दिल्ली में बस गयी . मौरीन जानती थी कि सोनिया सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है , क्योंकि जो भी व्यक्ति उसके खतरा बन सकता था सोनिया ने उसका पत्ता साफ कर दिया , जैसे संजय , माधव राव , पायलेट जितेन्द्र प्रसाद , योगी , यहाँ तक लोगों को यह भी शक है कि राजीव की हत्या में सोनिया का भी हाथ है , वर्ना वह अपने पति के हत्यारों को माफ़ क्यों कर देती ?
चूँकि मौरीन का पति और रॉबर्ट का पिता राजेंदर वडरा पुराना जनसंघी था , और सोनिया को डर था कि अगर अपने पति के दवाब ने मौरीन अपना मुंह खोल देगी तो मुझे भारत पर हुकूमत करने और अपने #नालायकु_कुपुत्र_राहुल को प्रधानमंत्री बनाने में सफलता नहीं मिलेगी . इसीलिए #सोनिया_नेउ_मौरीन_के_लडके_रॉबर्ट_की_शादी_प्रियंका_से_करवा_दी .
............शादी के बाद-की कहानी -..........
राजेंद्र वडरा के दो पुत्र , रिचार्ड और रॉबर्ट
और एक पुत्री मिशेल थे . और प्रियंका की शादी के बाद सभी एक एक कर मर गए या मार दिएगए . जैसे , #मिशेल ( Michelle ) सन 2001 में #कार_दुर्घटना में मारी गयी , #रिचार्ड ( Richard ) ने सन 2003 में #आत्महत्या कर ली . और प्रियंका के #ससुर सन 2009 में एक #मोटेल में मरे हुए पाए गए थे . लेकिन इनकी मौत के कारणों की कोई जाँच नहीं कराई गयी |
और इसके बाद सोनिया ने रॉबर्ट को राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री के बराबर का दर्जा SPG इनाम के तौर पर दे दिया .
मित्रो इस रॉबर्ट को कोई पडोसी भी नहीं जानता था , उसने #मात्र_तीन_वर्षों में
#करोड़ों_की_संपत्ति कैसे बना ली ,और कई कंपनियों का मालिक बन गया , साथ
ही सैकड़ों एकड़ कीमती जमीनें भी हथिया ली साथीयों अगर आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी अच्छी लगे तो #कृप्या_शेयर_करना_न_भूलें
नोट : नीचे कुछ चित्र दिए जा रहे हैं जो आपको ईतिहास की यादें ताजा कर देंगी !!(साभार: https://eksachchai.blogspot.com/2015/06/blog-post_176.html)
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कांग्रेस ने भले ही उस उर्दू अखबार की रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया हो जिसमें दावा किया गया था कि राहुल गांधी ने कांग्रेस को मुस्लिमों की पार्टी बताया था। लेकिन अब उसी अखबार में कांग्रेस के अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रमुख नदीम जावेद का इंटरव्यू छपा है, जिसमें कांग्रेस नेता ने एक तरह से यह पुष्टि की है कि राहुल गांधी ने कांग्रेस को मुसलमानों की पार्टी बताया था।
बीजेपी इस मौके का भरपूर फायदा उठा रही है और लगातार कांग्रेस पर हमले कर रही है बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कांग्रेस को यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि उनकी पार्टी मुस्लिमों की पार्टी है.
वही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के एक तथाकथित बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया. नीतीश के रूख से साफ है कि फिलहाल वो इस विवाद पर किसी के पक्ष या विपक्ष में नहीं बोलना चाहते हैं या ना दिखना चाहते हैं. नीतीश के इस स्टैंड को हाल में कांग्रेस पार्टी के नेताओं का उनके प्रति नरम रुख से भी जोड़ रहे हैं. बिहार में अधिकांश कांग्रेस विधायक किसी भी हाल में नीतीश को वापस महागठबंधन का नेता मानने के लिए तैयार हैं, लेकिन निश्चित रूप से भाजपा के नेताओं को नीतीश का ये रुख रास नहीं आया होगा. उन्हें उम्मीद रहती है कि नीतीश भी ऐसे मुद्दों पर उनके समर्थन में आए और कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला है.
क्या है मामला
दरअसल पिछले हफ्ते उर्दू अखबार ‘इंकलाब’ ने एक रिपोर्ट छापी थी जिसमें बताया गया था कि राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ मुलाकात के दौरान कहा था कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है। अखबार की इस रिपोर्ट का हवाला देकर बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला था. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले देश को मजहब के आधार पर बांटने का आरोप लगाया। खुद पीएम मोदी ने भी आजमगढ़ में इसे लेकर तंज कसा और पूछा था कि कांग्रेस बताए कि वह सिर्फ मुस्लिम पुरुषों की पार्टी है या मुस्लिम महिलाओं की भी। दूसरी तरफ कांग्रेस ने अखबार की रिपोर्ट को गलत बताते हुए बीजेपी पर फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया था.
कांग्रेस के बारे में अधिकांश मुस्लिम विद्वानों का भी मत है कि यह पार्टी मुस्लिमों की हित संरक्षक न होकर उनकी शत्रु है । क्योंकि कांग्रेस ने मुस्लिमों को सदा ही एक ' वोट बैंक ' के रूप में प्रयोग किया है। इन मुस्लिम विद्वानों का यह कथन उचित ही लगता है । अब हमें इसकी सच्चाई के लिए थोड़ा निष्पक्ष चिंतन करना होगा ।
वास्तव में कांग्रेस मुस्लिमों की हितचिंतक है। पर इस पार्टी से गलती यह हुई कि इसने मुल्ले मौलवियों के सामने आत्मसमर्पण करने को ही मुस्लिमों का हित समझ लिया । इस प्रकार की सोच में कांग्रेस का स्वार्थ दिखाई देता है । इससे जडता वादी मुस्लिम समाज में उन मूल्ला मौलवियों का वर्चस्व बढ़ता चला गया जो इस समाज पर अपनी पकड़ सिद्ध करके अपने लिए सुविधाएं प्राप्त करना चाहते थे । परिणाम स्वरुप मुस्लिम समाज के भीतर बैठी वे शक्तियां कांग्रेस की इस प्रकार की सोच से आहत हुई जो मुस्लिमों को आधुनिकता से अर्थात विज्ञान और तर्क से जोड़कर चलाना चाहती थीँ ।
यह फरमान और फतवे मुस्लिम समाज में इसलिए बढ़े कि कांग्रेस शासक इस ओर आंखें मूंदे बैठे रहे और इन्हें उनका निजी मामला कहकर प्रोत्साहित करते रहे । इससे पंथनिरपेक्ष आधुनिक मुस्लिमों का मुस्लिम समाज में दम घुटता रहा और वह चाहकर भी कुछ नहीं कह पाए । ये लोग चाहते थे कि तीन तलाक, हलाला और बुर्का जैसी बीमारियों से मुस्लिम औरतों को आजादी मिलेऔर मुस्लिम युवक जिस प्रकार की आपराधिक और देश विरोधी गतिविधियों में लगे हुए हैं उन से हटकर वह आधुनिक शिक्षा के साथ जुड़ें । देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऊंची छलांग लगाकर 1986 में शहाबानो प्रकरण में अपना ऐतिहासिक निर्णय देकर प्रगतिशील , पंथनिरपेक्ष और वैज्ञानिक बुद्धि रखने वाले मुस्लिमों को कुछ करने और कहने का ऐतिहासिक अवसर प्रदान किया था ।
यह दुर्भाग्य रहा इस देश का और विशेष रूप से मुस्लिम समाज का कि उस समय देश में राजीव गांधी की सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय को पलट कर मुस्लिमों को मजहब की तंग दीवारों के भीतर ही दम घुट कर मरने के लिए बाध्य कर दिया । एक बीज के अंकुरित होकर बाहर आने से पूर्व ही उसकी भ्रूण हत्या कर दी गई । इससे मुस्लिम समाज के वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले बुद्धिजीवियों की भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बाधित हुई और महिला को उसके अधिकारों से वंचित कर उसकी निजता भी बाधित हो गई । इतना ही नहीं इससे हमारी वह संवैधानिक प्रतिज्ञा भी भंग हो गई जिसे हमने अपने संविधान की प्रस्तावना में यह कहकर व्यक्त किया है कि हम प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध हैं । कांग्रेस की आपराधिक तटस्थता के चलते मुल्ले मौलवी मुस्लिम समाज को वोट बैंक के रूप में कांग्रेस के लिए बलि के बकरे के रूप में पालते रहे और कांग्रेस उस बकरे की बलि चढ़ा चढ़ा कर हर चुनाव में अपनी ईद मनाती रही । इसी " ईदी परंपरा " के चलते राहुल गांधी ने अब यह कह दिया है कि कांग्रेस मुस्लिमों की पार्टी है । उन्हें पता है कि यदि 2019 की ' ईद ' बनानी है तो ' बकरे ' की तसल्ली अभी से करनी होगी । कांग्रेस की इसी "ईदी परंपरा " के चलते मुल्ले मौलवी मुस्लिम युवाओं को अपने शिकंजे में कस ने के लिए मजहबी तालीम देते रहे और वे बेचारे पत्थरबाज ,चाकूवाज , बलात्कारी अपराधी , रेहडी ठेली वाले बनते रहें ।
यह प्रसन्नता की बात है कि आज मुस्लिमों के भीतर ही यह आवाज उठ रही है कि हमें कांग्रेस ने छला और ठगा है । यह भी अच्छी बात है कि मुस्लिमों की आंखें खुल रही हैं और वह समझने लगे हैं कि हमारे भीतर ही अपराधी और आतंकवादी क्यों पैदा हो रहे हैं ?
निश्चय ही इस स्थिति को लाने में कांग्रेस की आपराधिक भूमिका की भी बड़ी जिम्मेदारी है । इसलिए कांग्रेस वास्तव में मुस्लिमों की हितचिंतक पार्टी ने होकर उनकी शत्रु पार्टी ही सिद्ध होती है । इसे आज के मुस्लिम युवाओं को समझना होगा और वह खुले दिल से राष्ट्रवादी शक्तियों को मजबूत करते हुए उनके साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़े । इसी में भारत का भला है और उनका स्वयं का भी भला है।
थरूर की यह टिप्पणी उनके ‘हिन्दू पाकिस्तान' के बयान के बाद सामने आयी है जिसकी उनके राजनीतिक विरोधियों ने आलोचना की थी।
थरूर ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘भाजपा के मंत्रियों का सांप्रदायिक हिंसा में कमी के बारे में दावा तथ्यों पर खरा क्यों नहीं उतरता। ऐसा प्रतीत होता है कि कई जगहों पर मुस्लिम की तुलना में गाय सुरक्षित है।'
उन्होंने एक सामाचार पोर्टल पर छपे अपने आलेख का लिंक भी दिया है जिसमें ‘गाय - मुस्लिम' टिप्पणी थी। उनकी टिप्पणी गाय तस्करी करने के संदेह में राजस्थान के अलवर जिले में एक भीड़ द्वारा 28 वर्षीय अकबर खान की पीट - पीट कर की गयी हत्या के कुछ दिनों के बाद सामने आयी है।
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| http://www.dainik-bharat.org/2017/11/blog-post_57.html |
इस सन्दर्भ में निम्न लिंक का अवलोकन करें:-
http://www.shankhnad.org/2016/02/truth-of-india-gandhi.html
सबूत के लिए पढ़िए यह पुस्तकें
के.एन. राव की पुस्तक “नेहरू राजवंश” (10:8186092005 ISBN),
कैथरीन फ्रैंक की पुस्तक “The Life of Indira Nehru Gandhi (ISBN: 9780007259304),
पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह की पुस्तक Profiles And Letters ” (ISBN: 8129102358).
---------------------------------पिछली...सरकार ने इंदिरा गाँधी को एक बहुत ही जिम्मेदार , ताकतवर और राष्ट्रभक्त महिला बताया है और आप भी इंदिरा को आयरन लेडी समझते हैं चलिए इसकी कुछ कडवी हकीकत से मैं भी आज आपको रूबरू करवाता हूँ !!!
इंदिरा प्रियदर्शिनी ने नेहरू राजवंश को अनैतिकता की नयी ऊँचाई पर पहुचाया. बौद्धिक इंदिरा को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था लेकिन वहाँ से जल्दी ही पढाई में खराब प्रदर्शन के कारण बाहर निकाल दी गयी. उसके बाद उनको शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें उसके दुराचरण के लिए बाहर कर दिया.
शान्तिनिकेतन से बाहर निकाल जाने के बाद इंदिरा अकेली हो गयी. राजनीतिज्ञ के रूप में पिता राजनीति के साथ व्यस्त था और मां तपेदिक के कारण स्विट्जरलैंड में मर रही थी. उसके इस अकेलेपन का फायदा फ़िरोज़ खान नाम के व्यापारी ने उठाया. फ़िरोज़ खान।मोतीलाल नेहरु के घर पर मेहेंगी विदेशी शराब की आपूर्ति किया करता था. फ़िरोज़ खान और इंदिरा के बीच प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो गए.
महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल डा. श्री प्रकाश ने नेहरू को चेतावनी दी, कि फिरोज खान इंदिरा के साथ अवैध संबंध बना रहा था. फिरोज खान इंग्लैंड में था और इंदिरा के प्रति उसकी बहुत सहानुभूति थी. जल्द ही इंदिरा अपने धर्म का त्याग कर,एक मुस्लिम महिला बनी और लंदन के एक मस्जिद में फिरोज खान से उसकी शादी हो गयी. इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू ने नया नाम #मैमुना_बेगम रख लिया.
उनकी मां कमला नेहरू इस शादी से काफी नाराज़ थी जिसके कारण उनकी तबियत और ज्यादा बिगड़ गयी. नेहरू भी इस धर्म रूपांतरण से खुश नहीं था क्योंकि इससे इंदिरा के प्रधानमंत्री बनने की सम्भावना खतरे में आ गयी. तो, नेहरू ने युवा फिरोज खान से कहा कि अपना उपनाम खान से गांधी कर लो.
परन्तु इसका इस्लाम से हिंदू धर्म में परिवर्तन के साथ कोई लेना - देना नहीं था. यह सिर्फ एक शपथ पत्र द्वारा नाम परिवर्तन का एक मामला था. और फिरोज खान फिरोज गांधी बन गया , हालांकि यह बिस्मिल्लाह शर्मा की तरह एक असंगत नाम है. दोनों ने ही भारत की जनता को मूर्ख बनाने के लिए नाम बदला था. जब दोंनो भारत लौटे, एक नकली वैदिक विवाह जनता के उपभोग के लिए स्थापित किया गया था. इस प्रकार, इंदिरा और उसके वंश को काल्पनिक नाम गांधी मिला. नेहरू और गांधी दोनों #फैंसी नाम हैं. जैसे एक गिरगिट अपना रंग बदलती है, वैसे ही इन लोगों ने अपनी असली पहचान छुपाने के लिए नाम बदले. .
के.एन. राव की पुस्तक नेहरू राजवंश(10:8186092005 ISBN) में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है संजय गांधी फ़िरोज़ गांधी का पुत्र नहीं था, जिसकी पुष्टि के लिए उस पुस्तक में अनेक तथ्यों को सामने रखा गया है. उसमें यह साफ़ तौर पर लिखा हुआ है कि संजय गाँधी एक और मुस्लिम मोहम्मद यूनुस नामक सज्जन का बेटा था.
दिलचस्प बात यह है कि एक सिख लड़की मेनका का विवाह भी संजय गाँधी के साथ मोहम्मद यूनुस के घर में ही हुआ था. मोहम्मद यूनुस ही वह व्यक्ति था जो संजय गाँधी की विमान दुर्घटना के बाद सबसे ज्यादा रोया था.
यूनुस की पुस्तक व्यक्ति जुनून और राजनीति (persons passions and politics )
(ISBN-10:
0706910176) में साफ़ लिखा हुआ है कि संजय गाँधी के जन्म के बाद उनका खतना पूरे मुस्लिम रीति रिवाज़ के साथ किया गया था.
कैथरीन फ्रैंक की पुस्तक
"the life of Indira Nehru Gandhi
(ISBN:9780007259304)
में इंदिरा गांधी के अन्य प्रेम संबंधों के कुछ पर प्रकाश डाला है. यह लिखा है कि इंदिरा का पहला प्यार शान्तिनिकेतन में जर्मन शिक्षक के साथ था. बाद में वह एमओ मथाई, पिता के सचिव धीरेंद्र ब्रह्मचारी इंदिरा का योग शिक्षक के साथ और दिनेश सिंह विदेश मंत्री के साथ भी अपने प्रेम संबंधो के लिए प्रसिद्द हुई. पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इंदिरा गांधी के मुगलों के लिए संबंध के बारे में एक दिलचस्प रहस्योद्घाटन किया अपनी पुस्तक
"profiles and letters " (ISBN: 8129102358) में किया.
यह कहा गया है कि 1968 में इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री के रूप में अफगानिस्तान की सरकारी यात्रा पर गयी थी .
नटवरसिंह एक आईएफएस अधिकारी के रूप में इस दौरे पे गए थे. दिन भर के कार्यक्रमों के होने के बाद इंदिरा गांधी को शाम में सैर के लिए बाहर जाना था . कार में एक लंबी दूरी जाने के बाद, इंदिरा गांधी बाबर की कब्रगाह के दर्शन करना चाहती थी, हालांकि यह इस यात्रा कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया. अफगान सुरक्षा अधिकारियों ने उनकी इस इच्छा पर आपत्ति जताई पर इंदिरा अपनी जिद पर अड़ी रही . अंत में वह उस कब्रगाह पर गयी . यह एक सुनसान जगह थी. वह बाबर की कब्र पर सर झुका कर आँखें बंद करके खड़ी रही और नटवर सिंह उसके पीछे खड़े थे . जब इंदिरा ने उसकी प्रार्थना समाप्त कर ली तब वह मुड़कर नटवर से
बोली आज मैंने अपने इतिहास को ताज़ा कर लिया ( Today we have had our brush with history ).
यहाँ आपको यह बता दें कि बाबर मुग़ल साम्राज्य का संस्थापक था, और नेहरु खानदान इसी मुग़ल साम्राज्य से उत्पन्न हुआ. इतने सालों से भारतीय जनता इसी धोखे में है कि नेहरु एक कश्मीरी पंडित था....जो की सरासर गलत तथ्य है..... भाई संजीव कुमार जी ने कांग्रेस का जन्म दिनांक ८-९-२०१५ में आपको पहले ही बता दिया है इस तरह इन नीचों ने भारत में अपनी जड़ें जमाई जो आज एक बहुत बड़े वृक्ष में तब्दील हो गया है जिसकी महत्वाकांक्षी शाखाओं ने माँ भारती को आज बहुत जख्मी कर दिया हैं यह मेरा एक प्रयास है कि आज इस सोशल मीडिया के माध्यम से ही सही मगर हकीकत से रूबरू करवा सकूं!!! बाकी देश के प्रति यदि आपकी भी कुछ जिम्मेदारी बनती हो , तो अब आप लोग निःशब्द ना बनियेगा इसे फैला दीजिए हर घर में !!!!
रॉबर्ट और प्रियंका की शादी सन 1997 में हुई थी .लेकिन अगर कोई रॉबर्ट को ध्यान से देखे तो यह बात सोचेगा कि सोनिया ने रॉबर्ट जैसे कुरूप और साधारण व्यक्ति से प्रियंका की शादी कैसे करवा दी?
क्या उसे प्रियंका के लिए कोई उपयुक्त वर नहीं मिला ? और यह शादी जल्दी में और चुपचाप क्यों की गयी ???
वास्तव में सोनिया ने रॉबर्ट से प्रियंका की शादी अपनी पोल खुलने के डर से की थी . क्योंकि जिस समय #सोनिया इंगलैंड में एक कैंटीन में #बारगर्ल थी . उसी समय उसी जगह रोबट की माँ #मौरीन (Maureen)
भी यही काम करती थी मौरीन को #सोनिया_और_माधव_राव_सिंधिया की रास लीला की बात पता थी , जब वह उसी कैंटीन सोनिया उनको #शराब_पिलाया_करती थी .
मौरीन यह भी जानती थी कि किन किन लोगों के साथ सोनिया के अवैध सम्बन्ध थे .
जब सोनिया राजीव से शादी करके दिल्ली आ गयी , तो कुछ समय बाद मौरीन भी दिल्ली में बस गयी . मौरीन जानती थी कि सोनिया सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है , क्योंकि जो भी व्यक्ति उसके खतरा बन सकता था सोनिया ने उसका पत्ता साफ कर दिया , जैसे संजय , माधव राव , पायलेट जितेन्द्र प्रसाद , योगी , यहाँ तक लोगों को यह भी शक है कि राजीव की हत्या में सोनिया का भी हाथ है , वर्ना वह अपने पति के हत्यारों को माफ़ क्यों कर देती ?
चूँकि मौरीन का पति और रॉबर्ट का पिता राजेंदर वडरा पुराना जनसंघी था , और सोनिया को डर था कि अगर अपने पति के दवाब ने मौरीन अपना मुंह खोल देगी तो मुझे भारत पर हुकूमत करने और अपने #नालायकु_कुपुत्र_राहुल को प्रधानमंत्री बनाने में सफलता नहीं मिलेगी . इसीलिए #सोनिया_नेउ_मौरीन_के_लडके_रॉबर्ट_की_शादी_प्रियंका_से_करवा_दी .
............शादी के बाद-की कहानी -..........
राजेंद्र वडरा के दो पुत्र , रिचार्ड और रॉबर्ट
और एक पुत्री मिशेल थे . और प्रियंका की शादी के बाद सभी एक एक कर मर गए या मार दिएगए . जैसे , #मिशेल ( Michelle ) सन 2001 में #कार_दुर्घटना में मारी गयी , #रिचार्ड ( Richard ) ने सन 2003 में #आत्महत्या कर ली . और प्रियंका के #ससुर सन 2009 में एक #मोटेल में मरे हुए पाए गए थे . लेकिन इनकी मौत के कारणों की कोई जाँच नहीं कराई गयी |
और इसके बाद सोनिया ने रॉबर्ट को राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री के बराबर का दर्जा SPG इनाम के तौर पर दे दिया .
मित्रो इस रॉबर्ट को कोई पडोसी भी नहीं जानता था , उसने #मात्र_तीन_वर्षों में
#करोड़ों_की_संपत्ति कैसे बना ली ,और कई कंपनियों का मालिक बन गया , साथ
ही सैकड़ों एकड़ कीमती जमीनें भी हथिया ली साथीयों अगर आपको मेरे द्वारा दी गयी जानकारी अच्छी लगे तो #कृप्या_शेयर_करना_न_भूलें
नोट : नीचे कुछ चित्र दिए जा रहे हैं जो आपको ईतिहास की यादें ताजा कर देंगी !!(साभार: https://eksachchai.blogspot.com/2015/06/blog-post_176.html)
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कांग्रेस ने भले ही उस उर्दू अखबार की रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया हो जिसमें दावा किया गया था कि राहुल गांधी ने कांग्रेस को मुस्लिमों की पार्टी बताया था। लेकिन अब उसी अखबार में कांग्रेस के अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रमुख नदीम जावेद का इंटरव्यू छपा है, जिसमें कांग्रेस नेता ने एक तरह से यह पुष्टि की है कि राहुल गांधी ने कांग्रेस को मुसलमानों की पार्टी बताया था।
बीजेपी इस मौके का भरपूर फायदा उठा रही है और लगातार कांग्रेस पर हमले कर रही है बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावड़ेकर ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कांग्रेस को यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि उनकी पार्टी मुस्लिमों की पार्टी है.
वही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के एक तथाकथित बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया. नीतीश के रूख से साफ है कि फिलहाल वो इस विवाद पर किसी के पक्ष या विपक्ष में नहीं बोलना चाहते हैं या ना दिखना चाहते हैं. नीतीश के इस स्टैंड को हाल में कांग्रेस पार्टी के नेताओं का उनके प्रति नरम रुख से भी जोड़ रहे हैं. बिहार में अधिकांश कांग्रेस विधायक किसी भी हाल में नीतीश को वापस महागठबंधन का नेता मानने के लिए तैयार हैं, लेकिन निश्चित रूप से भाजपा के नेताओं को नीतीश का ये रुख रास नहीं आया होगा. उन्हें उम्मीद रहती है कि नीतीश भी ऐसे मुद्दों पर उनके समर्थन में आए और कांग्रेस पार्टी पर हमला बोला है.
क्या है मामला
दरअसल पिछले हफ्ते उर्दू अखबार ‘इंकलाब’ ने एक रिपोर्ट छापी थी जिसमें बताया गया था कि राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ मुलाकात के दौरान कहा था कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है। अखबार की इस रिपोर्ट का हवाला देकर बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला था. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले देश को मजहब के आधार पर बांटने का आरोप लगाया। खुद पीएम मोदी ने भी आजमगढ़ में इसे लेकर तंज कसा और पूछा था कि कांग्रेस बताए कि वह सिर्फ मुस्लिम पुरुषों की पार्टी है या मुस्लिम महिलाओं की भी। दूसरी तरफ कांग्रेस ने अखबार की रिपोर्ट को गलत बताते हुए बीजेपी पर फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया था.
कांग्रेस के बारे में अधिकांश मुस्लिम विद्वानों का भी मत है कि यह पार्टी मुस्लिमों की हित संरक्षक न होकर उनकी शत्रु है । क्योंकि कांग्रेस ने मुस्लिमों को सदा ही एक ' वोट बैंक ' के रूप में प्रयोग किया है। इन मुस्लिम विद्वानों का यह कथन उचित ही लगता है । अब हमें इसकी सच्चाई के लिए थोड़ा निष्पक्ष चिंतन करना होगा ।
वास्तव में कांग्रेस मुस्लिमों की हितचिंतक है। पर इस पार्टी से गलती यह हुई कि इसने मुल्ले मौलवियों के सामने आत्मसमर्पण करने को ही मुस्लिमों का हित समझ लिया । इस प्रकार की सोच में कांग्रेस का स्वार्थ दिखाई देता है । इससे जडता वादी मुस्लिम समाज में उन मूल्ला मौलवियों का वर्चस्व बढ़ता चला गया जो इस समाज पर अपनी पकड़ सिद्ध करके अपने लिए सुविधाएं प्राप्त करना चाहते थे । परिणाम स्वरुप मुस्लिम समाज के भीतर बैठी वे शक्तियां कांग्रेस की इस प्रकार की सोच से आहत हुई जो मुस्लिमों को आधुनिकता से अर्थात विज्ञान और तर्क से जोड़कर चलाना चाहती थीँ ।
यह फरमान और फतवे मुस्लिम समाज में इसलिए बढ़े कि कांग्रेस शासक इस ओर आंखें मूंदे बैठे रहे और इन्हें उनका निजी मामला कहकर प्रोत्साहित करते रहे । इससे पंथनिरपेक्ष आधुनिक मुस्लिमों का मुस्लिम समाज में दम घुटता रहा और वह चाहकर भी कुछ नहीं कह पाए । ये लोग चाहते थे कि तीन तलाक, हलाला और बुर्का जैसी बीमारियों से मुस्लिम औरतों को आजादी मिलेऔर मुस्लिम युवक जिस प्रकार की आपराधिक और देश विरोधी गतिविधियों में लगे हुए हैं उन से हटकर वह आधुनिक शिक्षा के साथ जुड़ें । देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऊंची छलांग लगाकर 1986 में शहाबानो प्रकरण में अपना ऐतिहासिक निर्णय देकर प्रगतिशील , पंथनिरपेक्ष और वैज्ञानिक बुद्धि रखने वाले मुस्लिमों को कुछ करने और कहने का ऐतिहासिक अवसर प्रदान किया था ।
यह दुर्भाग्य रहा इस देश का और विशेष रूप से मुस्लिम समाज का कि उस समय देश में राजीव गांधी की सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय को पलट कर मुस्लिमों को मजहब की तंग दीवारों के भीतर ही दम घुट कर मरने के लिए बाध्य कर दिया । एक बीज के अंकुरित होकर बाहर आने से पूर्व ही उसकी भ्रूण हत्या कर दी गई । इससे मुस्लिम समाज के वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले बुद्धिजीवियों की भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बाधित हुई और महिला को उसके अधिकारों से वंचित कर उसकी निजता भी बाधित हो गई । इतना ही नहीं इससे हमारी वह संवैधानिक प्रतिज्ञा भी भंग हो गई जिसे हमने अपने संविधान की प्रस्तावना में यह कहकर व्यक्त किया है कि हम प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध हैं । कांग्रेस की आपराधिक तटस्थता के चलते मुल्ले मौलवी मुस्लिम समाज को वोट बैंक के रूप में कांग्रेस के लिए बलि के बकरे के रूप में पालते रहे और कांग्रेस उस बकरे की बलि चढ़ा चढ़ा कर हर चुनाव में अपनी ईद मनाती रही । इसी " ईदी परंपरा " के चलते राहुल गांधी ने अब यह कह दिया है कि कांग्रेस मुस्लिमों की पार्टी है । उन्हें पता है कि यदि 2019 की ' ईद ' बनानी है तो ' बकरे ' की तसल्ली अभी से करनी होगी । कांग्रेस की इसी "ईदी परंपरा " के चलते मुल्ले मौलवी मुस्लिम युवाओं को अपने शिकंजे में कस ने के लिए मजहबी तालीम देते रहे और वे बेचारे पत्थरबाज ,चाकूवाज , बलात्कारी अपराधी , रेहडी ठेली वाले बनते रहें ।
यह प्रसन्नता की बात है कि आज मुस्लिमों के भीतर ही यह आवाज उठ रही है कि हमें कांग्रेस ने छला और ठगा है । यह भी अच्छी बात है कि मुस्लिमों की आंखें खुल रही हैं और वह समझने लगे हैं कि हमारे भीतर ही अपराधी और आतंकवादी क्यों पैदा हो रहे हैं ?
निश्चय ही इस स्थिति को लाने में कांग्रेस की आपराधिक भूमिका की भी बड़ी जिम्मेदारी है । इसलिए कांग्रेस वास्तव में मुस्लिमों की हितचिंतक पार्टी ने होकर उनकी शत्रु पार्टी ही सिद्ध होती है । इसे आज के मुस्लिम युवाओं को समझना होगा और वह खुले दिल से राष्ट्रवादी शक्तियों को मजबूत करते हुए उनके साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़े । इसी में भारत का भला है और उनका स्वयं का भी भला है।
मुस्लिमों की तुलना में गाय' ज्यादा सुरक्षित है : शशि थरूर
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि भारत में कई जगहों पर ‘मुस्लिमों की तुलना में गाय ' ज्यादा सुरक्षित है। उनके इस टिप्पणी से विवाद भड़क सकती है।थरूर की यह टिप्पणी उनके ‘हिन्दू पाकिस्तान' के बयान के बाद सामने आयी है जिसकी उनके राजनीतिक विरोधियों ने आलोचना की थी।
थरूर ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘भाजपा के मंत्रियों का सांप्रदायिक हिंसा में कमी के बारे में दावा तथ्यों पर खरा क्यों नहीं उतरता। ऐसा प्रतीत होता है कि कई जगहों पर मुस्लिम की तुलना में गाय सुरक्षित है।'
उन्होंने एक सामाचार पोर्टल पर छपे अपने आलेख का लिंक भी दिया है जिसमें ‘गाय - मुस्लिम' टिप्पणी थी। उनकी टिप्पणी गाय तस्करी करने के संदेह में राजस्थान के अलवर जिले में एक भीड़ द्वारा 28 वर्षीय अकबर खान की पीट - पीट कर की गयी हत्या के कुछ दिनों के बाद सामने आयी है।



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