आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जो बातचीत के जरिए अयोध्या विवाद सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें बाबर वंशजों की सोंच को भी ध्यान में रखना चाहिए था। शायद श्री श्री भूल गए कि तत्कालीन प्रधानमन्त्री चन्द्रशेखर भी इसी तरह का प्रयास कर चुके हैं। उन्होंने तो दोनों पक्षों को एक टेबल पर बैठाकर मसले को समाप्त करने की प्रयत्न किया था, उस समय डॉ सुब्रमण्यम स्वामी कानून मन्त्री थे। इस विषय पर डॉ स्वामी अच्छी रौशनी डाल सकते हैं। शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि, अयोध्या में राम मंदिर बने, इस पर किसी भी मुसलमान को कोई आपत्ति नहीं है । परंतु बाबरी मस्जिद की जगह पर कब्जा करके उस पर मंदिर बनाया जाए, यह कोई भी मुसलमान बर्दाश्त नहीं करेगा । शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने अयोध्या विवाद मे किया खारिज शिया वक्फ बोर्ड के प्रस्ताव को कहा कि मस्जिद की जगह पर मंदिर देश का मुसलमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा| बोर्ड के संस्थापक और महासचिव मौलाना सैय्यद अली हुसैन रिजवी कुम्मी ने कहा कि, 1. शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ढोंग कर रहे हैं । ...