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मुस्लिम महिला फाउंडेशन नाम का संगठन भी तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के खिलाफ

महाराष्ट्र के बीड में मंगलवार (20 दिसंबर) को मुस्लिम समुदाय के लगभग तीन लाख लोगों ने मार्च निकाला। मार्च का मकसद उनकी कुछ मांगों को देश के सामने रखना था। मार्च में उनके समुदाय के लोगों के लिए नौकरी और शिक्षा में आरक्षण की मांग की गई। ऐसी मांगों को लेकर की गई यह चौथी रैली थी। इससे पहले भी मराठवाड़ा में ऐसी रैलियां हुई थीं। इन रैलियों को ‘मुस्लिम आरक्षण संघर्ष क्रुति समिति’ द्वारा करवाया जा रहा है। रैली में कई और बातों की भी डिमांड की गई। जैसे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में किसी तरह की दखल ना दी जाए, आतंक के नाम पर किसी मासूम मुस्लिम को परेशान ना किया जाए। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के लापता छात्र नजीब अहमद को जल्द से जल्द ढूंढने की मांग भी रैली में उठी। मार्च तीन घंटे तक चला। आखिर में सभी लोग बीड के डिप्टी कलेक्टर के पास पहुंचे और उन्हें मेमोरेंडम किया। तीन किलोमीटर के इस मार्च में किसी प्रकार की अनहोनी को रोकने के लिए लगभग एक हजार पुलिसवालों को तैनात किया गया था। जानकारी मिली है कि ऐसे ही दो मार्च जल्द ही और किए जाएंगे। उनके लिए जगह भी तय हो गई है। इनमें से एक ओसमानाबाद में होगा ...

तीन तलाक के पीछे की ये शर्मनाक कहानी

बहुत समय से एक शब्द सुनने को मिल रहा है,  यूनिफार्म सिविल कोड  आखिर ये  है क्या ? क्यों मुस्लिमों का एक तलाक से काम नहीं होता ? क्यों इसका विरोध करते हैं मुस्लिम मौलवी और मुस्लिम मजहब के प्रचारक ? एक जैसे क़ानून से इन मुस्लिमों के परेशानी क्या है ? क्यों मुस्लिम औरतें इस प्रथा से छुटकारा चाहती हैं ? ऐसे ही कई सवाल हैं जिनका जवाब आपको यहाँ मिलेगा.. source सबसे पहले बात करते हैं कुरान में प्रयोग किए गए दो शब्दों का “ हलाल ” और “ हलाला ” ? ये शब्द बहुत आम हैं लेकिन इन दोनों शब्दों का मतलब उतना ही गहरा है l जब एक मुसलमान धर्म के नाम पर निर्दोष जानवर की गर्दन काट देता है तो इसे कहते हैं हलाल, अल्लाह को खुश करने के लिए ऐसा करने के पीछे का कारण बताया जाता है l हलाल शब्द तो आपने कई बार सुना होगा पर क्या आप इस हलाल से मिलते जुलते शब्द हलाला का मतलब जानते हैं ?  इस शब्द का मतलब बहुत कम लोग जानते हैं क्योंकि ये शब्द जुड़ा है मुसलमानों के वैवाहिक जीवन और महिलाओं के खिलाफ नफरत से,  नफरत भी ऐसी जिसने आज तक औरतों के जीवन में मातम का माहौल बना रखा है l मुसलमानों में...

मुस्लिम समाज आखिर कब तक ब्लैकमेल करता रहेगा?

जब से तीन तलाक़ को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है और भारत सरकार के हलफ़नामे को लेकर राजनीति गरमाई है, तब से ही मुस्लिम संगठन इसका विरोध कर रहे है। अब गुजरात के सूरत शहर में हज़ारों की तादाद में मुस्लिम महिलाओं ने भी सड़को पर निकल कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिये है। इन मुस्लिम महिलाओं की मांग है कि तलाक़ के मामले में सरकार दख़ल ना दे। महिलाओं ने इस संबंध में एक मांगपत्र ज़िलाधिकारी को भी सौंपा है। गुजरात के सूरत शहर में अक्टूबर 21  को हज़ारों की तादाद में मुस्लिम महिलाएं सड़कों पर उतरीं। उनके हाथ में बैनर थे, जिस पर लिखा था ‘ शरियत क़ानून को सरकार बदलने की कोशिश न करे’ https://www.facebook.com/100008695501142/videos/1623986691234499/ रैली में शामिल शहनाज़ पटेल ने बीबीसी से कहा, “हम भारत सरकार को बताना चाहते हैं कि तलाक़ के मामले में शरियत क़ानून ही श्रेष्ठ है। भारत के संविधान से भी यह मामला ऊपर है।” पटेल ने बताया, “हम भारत के संविधान को सलाम करते है, लेकिन जब बात शरियत की आती है, तो हमें क़ुरान का बताया रास्ता ही उत्त...

हलाला से लेता है मौलवी कमसीन महिलाओं से सेक्‍स का मजा

हलाल से हलाला तक !! इस्लामी पारिभाषिक शब्दों में “हलाल , और “हलाला ” यह ऐसे दो शब्द हैं , जिनका कुरान और हदीसों में कई जगह प्रयोग किया गया है . दिखने में यह दौनों शब्द एक जैसे लगते हैं .यह बात तो सभी जानते हैं कि,जब मुसलमान किसी जानवर के गले पर अल्लाह के नाम पर छुरी चलाकर मार डालते हैं , तो इसे हलाल करना कहते हैं .हलाल का अर्थ “अवर्जित ” होता है . लेकिन हलाला के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं .क्योंकि इस शब्द का सम्बन्ध मुसलमानों वैवाहिक जीवन और कुरान के महिला .विरोधी कानून से है .क्योंकि कुरान में अल्लाह के बनाये हुए इस जंगली ,और मूर्खता पूर्ण कानून की आड़ में मुल्ले , मौलवी और मुफ्ती खुल कर अय्याशी करते हैं इस बात को ठीक से समझने के लिए अल्लाह की औरतों के प्रति घोर नफ़रत , और मुसलमानों की पारिवारिक स्थितियों के बारे में जानना बहुत जरूरी है,मुसलमानों में दो दो , तीन तीन औरतें रखना साधारण सी बात है . और फिर मुसलमान रिश्ते की बहिनों से भी शादियाँ कर लेते हैं .और अक्सर संयुक्त परिवार में रहना पसंद करते हैं .इसलिए पति पत्नी में झगड़े होते रहते हैं. और कभी पति गुस्से में पत्नी को तल...

मुस्लिम पर्सनल लॉ महिलाओं के सम्मान के लिए कब जागरूक होगा?

शायरा बानो  भारत में मुसलमानों की स्थिति को लेकर कई मंचों पर बहस और चर्चा हो चुकी है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और उसके नियमों को लेकर भी कई दफा विरोध के सुर उठ चुके हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को मुसलमानों की सर्वोच्च संस्था माना जाता है। जिसके कानून को मानना सभी मुसलमानों के लिए जरूरी समझा जाता है। लेकिन कई कानून और नियम ऐसे हैं जिन पर विवाद बना रहता है। एक तरफ लड़कियां तमाम बोर्ड परीक्षाओं में टॉप कर रही हैं, महिलाएं बड़ी-बड़ी कंपनियों की सीईओ के तौर पर अपनी कामयाबी का झंडा गाड़ रही हैं वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक एजीबोगरीब और बेतुकी दलील दी गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक को सही ठहराने के लिए कहा है कि पुरुषों को अपनी भावनाओं पर ज्यादा नियंत्रण होता है, उनकी तरफ से जज्बाती फैसले लेने की संभावना कम होती है, इसलिए पुरुषों को तीन तलाक का अधिकार सही है। तीन तलाक के मुद्दे पर एक बार फिर से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड निशाने पर है। सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जो जवाब दाखिल किया है ...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)