बहुत समय से एक शब्द सुनने को मिल रहा है, यूनिफार्म सिविल कोड आखिर ये है क्या ? क्यों मुस्लिमों का एक तलाक से काम नहीं होता ? क्यों इसका विरोध करते हैं मुस्लिम मौलवी और मुस्लिम मजहब के प्रचारक ? एक जैसे क़ानून से इन मुस्लिमों के परेशानी क्या है ? क्यों मुस्लिम औरतें इस प्रथा से छुटकारा चाहती हैं ? ऐसे ही कई सवाल हैं जिनका जवाब आपको यहाँ मिलेगा..

सबसे पहले बात करते हैं कुरान में प्रयोग किए गए दो शब्दों का “हलाल” और “हलाला” ? ये शब्द बहुत आम हैं लेकिन इन दोनों शब्दों का मतलब उतना ही गहरा है l जब एक मुसलमान धर्म के नाम पर निर्दोष जानवर की गर्दन काट देता है तो इसे कहते हैं हलाल, अल्लाह को खुश करने के लिए ऐसा करने के पीछे का कारण बताया जाता है l हलाल शब्द तो आपने कई बार सुना होगा पर क्या आप इस हलाल से मिलते जुलते शब्द हलाला का मतलब जानते हैं ? इस शब्द का मतलब बहुत कम लोग जानते हैं क्योंकि ये शब्द जुड़ा है मुसलमानों के वैवाहिक जीवन और महिलाओं के खिलाफ नफरत से, नफरत भी ऐसी जिसने आज तक औरतों के जीवन में मातम का माहौल बना रखा है l मुसलमानों में 2 या 3 बीबी रखना आम बात है लेकिन कई बार मौलवी इस क़ानून का फायदा उठा लेते हैं l
साफ़-साफ़ शब्दों में बात की जाए तो हलाला का मतलब है औरतों के खिलाफ कुछ मुस्लिमों की नफरत जिसके कारण ये तीन तलाक का क़ानून बना है, इस बात को ठीक से समझने के लिए मुस्लिम धर्म में औरतों की हालत को समझना जरूरी है l औरतों के खिलाफ नफरत की वजह से पति के द्वारा किए गए हर गुन्हा के लिए औरतों को सज़ा देने का प्रावधान है l विवाह करके साथ रह रहे पति पत्नी में गलती किसी की भी हो सज़ा औरत को ही मिलती है l पति द्वारा तलाक देने के कई तरीके हो सकते हैं l कई बार एक पति गुस्से में आकर अपनी पत्नी से “तलाक तलाक तलाक” बोल देता है जिसके बाद दोनों के बीच का सम्बन्ध खत्म हो जाता है l
तो ऐसे होता है तलाक…!
अगर कोई व्यक्ति गुस्से में या चाहे पूरे होश में अपनी पत्नी के सामने तीन बार बोल दे तलाक या फिर कहे मैंने तुझे तीन तलाक दे दिए हैं तो तलाक हो जाता है l जैसा कि बताया जाता है… ये शब्द उस व्यक्ति की कसम हैं जिसे अल्लाह सुनता है l अगर पति कहे मैंने तुझे दो तलाक दे दिए हैं और तीसरा देना चाहता हूँ तो भी तलाक हो जाता है l जिसको लेकर मुस्लिमों के सभी विद्वानों ने सहमती जताई है l
अब ऐसे में मुसीबत आती है उन महिलाओं की जिनके पति अनजाने में गुस्से में आकर उन्हें तलाक देते हैं l एक बार तलाक होने के बाद इतना आसान नहीं है वापस विवाह बंधन में आना l अब गुस्से में शौहर ने बोल तो दिया हमे तलाक चाहिए सुबह उठकर जब गलती का पता चला तो समझ नहीं आया क्या करें ? ऐसे में बेचारा पति अपनी मुह बोली तलाक से पीड़ित बेगम को लेकर जाते हैं मौलवी के पास l तलाक की विधि जितनी आसान है उतना ही कठिन है अपनी बेगम को वापिस पाना l
जब अल्लाह गुस्से में बोली हुई तलाक की आवाज़ को सुन लेता है तो अल्लाह भटके हुए तलाक शुदा मर्दों की भी आवाज़ सुनता है l लेकिन जैसे तलाक का नियम है तीन बार तलाक बोलकर बीवी से छुटकारा पालो उससे कई ज्यादा कठिन है वापस अपनी बीबी को विवाह बंधन में लाना l
कुछ लोग गुस्से में आकर अपनी पत्नी को तलाक दे देते हैं, लेकिन फिर अगले दिन इस बात को लेकर पछताते हैं l कई मुस्लिम औरतें परिवार का पेट पालने के लिए काम करती हैं तो अधिकाँश महिलाएं अपने पांच-छे बच्चों का ध्यान रखती हैं l इसलिए कुछ मर्द अपनी बीवी को वापस चाहते हैं l जिसके लिए एक नियम बनाया है l
“हे नबी तू नहीं जानता कदाचित तलाक के बाद अल्लाह कोई नई तरकीब सुझा दे”जिसका मतलब है एक बन्दा अपनी गलती के लिए अल्लाह से माफ़ी मांगते हुए अपनी बीवी को वापिस मांगता है l
इसके लिए कुछ ऐसा नियम बने हैं जो औरतों के लिए काफी शर्मनाक है और एक औरत के लिए रूह को भेदने वाला है l
तलाक हुई बीवी को वापिस अपनाने के लिए औरत को किसी गैर मर्द के साथ शादी करनी होती है l बात यही खत्म नहीं होती बीवी को अपने नए पति के साथ सोना पढ़ता है l
जरा सोचिए एक औरत को अपने पति के गलती से बोले गये तीन शब्दों की भरपाई के लिए किसी और के साथ सोना होता है l
इसके लिए आयत में एक शब्द है “तुह्ल्लिल लहु” जिसका अर्थ मुसलाम बताते हैं WEEDING हालांकि इस शब्द का असली अर्थ है SEXUAL INTERCOURSE l एक औरत के लिए इससे ज्यादा शर्म की बात क्या होगी जब उसे किसी गैर मर्द के साथ सोना पड़े l ऐसे में मौज लेते हैं मौलवी जो इस प्रक्रिया में शामिल रहते हैं l
तलाक के बाद अपने पति को वापिस पाने की विधि में एक औरत सबसे ज्यादा परेशानियों को झेलती है l ऐसे में मौलवी सहाब की मौज आती है l सोचने वाली बात है एक तलाक शुदा औरत से कौन शादी करेगा ? कौन तलाक हुई औरत को अपने साथ रखना चाहेगा वो भी इसलिए की एक रात सहवास के बाद वो वापिस अपने पुराने पति के पास चली जाएगी l ऐसे में पति अपनी पत्नी के लेकर मौलवी साहब के पास जाता है। "मौलवी साहब मुझे मेरी बीवी जिसको मैंने गुस्से में तलाक दे दिया था वापिस चाहिए” मौलवी जी कहते हैं बिना हलाला के ये मुमकिन नहीं है l अब समस्या ये है एक तलाकशुदा औरत से कौन शादी करेगा ? ऐसे में मौज आती है बूढ़े मौलानाओं की जो हलाला के नाम पर ना जाने कितने निकाह करते हैं और एक रात के बाद वापिस औरत को उसके पुराने पति के पास भेज देते हैं l बेचारी पत्नी का क्या दोष ? आखिर गलती पति करे सज़ा बीवी भुगते ? इतना ही नहीं यदि आपको तीन बार तलाक कहने के पीछे का राज़ पता चल गया तो आपके पैरों के तले जमीन खिसक जायेगी l
हलाला का अर्थ आपको समझ आ गया होगा लेकिन क्या सच में ये सब बाते सही हैं या फिर कुछ मुसलमान इस शब्द को लेकर औरतों के साथ मजे लेते हैं l औरत का दोष है तो वो है तो बस इतना कि वो अनपढ़ हैं l ऐसे में मजहब के नाम पर उनके साथ ऐसा होना कितना सही है l इस बात को लेकर देखिए एक वीडियो !
अब सवाल ये है क्यों मुसलमान इस तीन तलाक के खिलाफ है ? क्यों वो यूनिफार्म सिविल कोड को अपना नहीं चाहते l देखिए इसके लिए मुस्लिमों ने क्या कारण दिए हैं l

इस कानून के तहत सभी धर्मों को एक समान कानून का पालन करना होता है l गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से केंद्र की मोदी सरकार द्वारा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ के तीन तलाक कानून को रद्द कर के सभी धर्मों के तरह समान तलाक के नियम के अंतर्गत लाने पर विचार किया जा रहा है l अगर ऐसा होता है तो मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तीन बार तलाक कह कर पति-पत्नी को शादी के बंधन से छुटकारा नहीं मिलेगा l बल्कि उन्हें भी तलाक के लिए समान नियमों का पालन करना पड़ेगा l
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