राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि “धर्म’’ का मतलब सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं है बल्कि एक सामाजिक कर्तव्य भी है और शासक ‘‘राज धर्म” की बात करते हैं. इस कार्यक्रम में उद्योगपति रतन टाटा ने उनके साथ मंच साझा किया. भागवत यहां दिवंगत आरएसएस नेता नाना पालकर की जन्मशती के मौके पर रखे गए एक कार्यक्रम में बोल रहे थे. टाटा इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे. भागवत ने कहा, “धर्म पिता के प्रति बेटे का कर्तव्य है, पिता का बेटे के प्रति कर्तव्य है और जिन्हें सत्ता के लिए चुना जाता है वह ‘राजधर्म’ की बात करते हैं. हमें बदले में बिना कुछ चाहे अपना कर्तव्य निभाना चाहिए.” संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संतों से की संघ की तुलना, बोले- ‘दोनों एक सिक्के के दो पहलू’ इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की तुलना थेट संतों से की थी. उन्होंने कहा है कि संत और संघ, दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. उन्होंने कहा कि दोनों का काम लगभग एक जैसा ही है. मोहन भागवत ने यह बयान महाराष्ट्र के रत्नागिरी के नानीज में दिया है. ...