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‘हिम्मत है तो घूसखोर मुस्लिम या दलित लिखो’: मनोज बाजपेई की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर भड़के नेटिजन्स, Netflix को दी चेतावनी

               नेटफ्लिक्स की आगामी फिल्म 'घूसखोर पंडत' नाम पर छिड़ा जातिगत विवाद (साभार: Netflix/X) बॉलीवुड एक्टर मनोज बाजपेई की नेटफ्लिक्स फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के नाम पर विवाद छिड़ा हुआ है। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘सवर्ण समाज’ और ‘ब्राह्मण’ की छवि खराब करने का आरोप लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि नाम नहीं बदला गया, तो नेटफ्लिक्स को बॉयकॉट किया जाएगा। एक्स पर ‘शेमऑननेटफ्लिक्स’ हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। दरअसल, 03 फरवरी 2026 को नेटफ्लिक्स ने अपनी आगामी फिल्म ‘घूसखोर फिल्म’ का 51 सेकेंड के टीजर रिलीज किया। इस फिल्म में मनोज बाजपेई को एक पुलिस अफसर के किरदार में दिखाया गया है, जो ‘पंडत’ है और उन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। फिल्म के टीजर रिलीज होते ही लोगों का विरोध शुरू हो गया। Har corrupt officer ko badalne ka ek mauka milta hai. Ab Officer Ajay Dixit ki baari. Watch Ghooskhor Pandat, coming soon, only on Netflix. #GhooskhorPandat #GhooskhorPandatOnNetflix #NextOnNetflixIndia pic.twitter.com/v1zcTcjeI0 — Netflix India (@NetflixIndia) February 3, 2026 ...
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‘संगीत के एक युग का अंत’: अरिजीत सिंह ने छोड़ी ‘प्लेबैक सिंगिंग’

                                         बॉलीवुड सिंगर अरिजीत सिंह (साभार: Instagram) म्यूजिक प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले बॉलीवुड के फेमस सिंगर अरिजीत सिंह ने अचानक प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास लेकर अपने फैंस को चौंका दिया। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स और इंस्टाग्राम पर खुद अरिजीत ने इस फैसले के पीछे कई कारण बताए हैं। यह खबर सुनकर सोशल मीडिया पर लोग इसे संगीत के ‘एक युग का अंत’ बता रहे हैं। सबसे पहले इंस्टाग्राम पर अरिजीत सिंह ने अपने संन्यास लेने की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “हेलो, आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ। इतने वर्षों तक श्रोताओं के रूप में मुझे इतना प्यार देने के लिए आप सभी का धन्यवाद। मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अब से मैं प्लेबैक सिंगर के रूप में कोई नया काम नहीं लूँगा। मैं इस पेशे को अलविदा कह रहा हूँ। यह एक शानदार सफर रहा।”       इंस्टाग्राम पर प्लैबैक सिंगिग छोड़ने का ऐलान करते अरिजीत सिंह का पोस्ट (साभार: Instagram-arijitsingh) ...

‘स्वरा भास्कर’ मत बनो AR रहमान, विवादों में खुद घुसो फिर बोलो- नहीं मिल रहा काम: तुम्हारे घर में तिलक लगाकर एंट्री बैन और ‘कम्युनल’ फिल्म इंडस्ट्री है?

                एआर रहमान, काम न मिलने का ठीकरा पावर शिफ्ट पर फोड़ा (फाइल साभार: Instagram) मुसलमानों में सबसे बड़ी बीमारी यह है कि पहले खुद victim card खेलते हैं और पलटवार होने पर गरीब, मज़लूम और शरीफ बन दूसरे को कसूरवार बता बेशर्मी से victim card खेलने लगते हैं। ऐ आर रहमान तुम्हारी अम्मी ने क्यों किसी हिन्दू को घर में तिलक लगाकर आने से मना किया था? और तुमने खुद कितने विवादित बयान दिए और अब जवाब मिलने पर सिस्टम को कम्युनल बता रहे हो? रहमान मियां समय बदल रहा है हर सनातन विरोधी की रही हालत हो रही है।     आज का जमाना बड़ा बेरहम है। यहाँ गाना अच्छा लगा तो रील बन गई, नहीं लगा तो दो सेकेंड में स्किप। और जब स्किप बटन ज्यादा दबने लगे, तब कुछ लोग सुर सुधारने की जगह बयान सुधारने लगते हैं। एक समय पर इंडस्ट्री के जाने-माने संगीतकार रहे एआर रहमान भी ऐसा ही करते दिखे। काम नहीं मिला तो बात सीधा देश की ‘पावर शिफ्ट‘ तक पहुँचा दी और उसमें ‘कम्युनल एंगल’ भी घुसेड़ दिया। मतलब गाना नहीं चला तो वजह सुर नहीं, सिस्टम है। ये देश के आम लेफ्ट-लिबरल गैंग का वही पुरा...

पाकिस्तान वाले साबरी ने नहीं, बॉलीवुड वाले साहिर लुधियानवी की लिखी है ‘न तो कारवाँ की तलाश है’, ‘धुरंधर’ से पहले ‘बरसात की रात’ में भी थी यह कव्वाली

                               फिल्म धुरंधर और फिल्म 'बरसात की एक रात' ( फोटो साभार-जागरण) बॉलीवुड की ब्लॉक बस्टर फिल्म धुरंधर में जिस कव्वाली ‘न तो कारवाँ की तलाश है, न तो हमसफर की तलाश है’ का इस्तेमाल हुआ है, वह 1960 की हिंदी फ़िल्म ‘बरसात की रात’ में फिल्माई गई कव्वाली से मिलती है। ऐपल म्यूजिक स्टोर के स्क्रीन शॉट से भी इसकी जानकारी मिलती है। फिल्मी दस्तावेजों और आधिकारिक क्रेडिट के अनुसार, ये गीत साहिर लुधियानवी ने लिखे थे और इसका संगीत रौशन ने दिया था। इस कव्वाली में कई गायक-गायिकाओं की आवाज हैं। इसे एक समूह-प्रस्तुति के रूप में रिकॉर्ड की गई थी। मन्ना डे, मोहम्मद रफी, आशा भोंसले, सुधा मल्होत्रा और एसडी बातिश शामिल थे। रिकॉर्ड्स के मुताबिक, यही इसका पहला प्रकाशित और व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त फिल्मी वर्जन है।  इसी आधार पर कहा जाता है कि इस कव्वाली का आधिकारिक फिल्मी origin भारतीय सिनेमा और बॉलीवुड से जुड़ा है। संगीत कंपनियों, फ़िल्म आर्काइव्स में लेखक, संगीतकार और गायकों के नाम स्पष्ट रूप से द...

जिन फिल्मों को दिखाने से खराब हो भारत का नाम, केरल सरकार ने IFFK में उन्हें ही चलवाया: जानिए कौन सी हैं ये फिल्म, कैसे वामपंथी एजेंडे के लिए बैठीं फिट

                                                    पिनाराई विजयन (IFFK) (साभार -AI) केरल में आयोजित 30वें इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल (IFFK) को लेकर राजनीतिक और वैचारिक विवाद पिछले दिनों काफी चर्चा में था। मामला तब सामने आया जब पता चला कि केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और सामाजिक सौहार्द से जुड़े मामलों के कारण कुछ फिल्मों को सेंसर छूट देने से इनकार कर दिया और केरल की वामपंथी सरकार ने फिर भी उन फिल्मों को दिखाने का ऐलान किया। दरअसल, IFFK 2025 में दिखाने के लिए केंद्र सरकार ने 178 फिल्मों को सेंसर छूट दी थी। वहीं 19 के करीबन फिल्म ऐसी थीं जिन्हें दिखाने से रोका गया था। इनमें से भी 6 ऐसी थी जिन्हें लेकर कहा गया कि ये देश के हित में नहीं हैं। केंद्र के इस निर्णय को सुनकर केरल सरकार ने इसे फासीवाद, तानाशाही और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करार देना शुरू कर दिया। बाद में खबर आई कि केंद्र द्वारा रो...

बांग्लादेशी हिंदुओं की जाह्नवी कपूर बनीं आवाज तो वामपंथी-कट्टरपंथियों से नहीं हुआ बर्दाश्त: ध्रुव राठी ने ‘चेहरे’ का मजाक उड़ाया

                                       जाह्नवी कपूर के पीछे पड़े वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथी बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने हाल में बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं के उत्पीड़न मामले पर आवाज उठाई तो इससे वामपंथी धड़ा और कट्टरपंथी जमात उनसे नाराज हो बैठी। कुछ ने सोशल मीडिया पर उनकी होती तारीफ के लिए निशाना बनाया तो वहीं ध्रुव राठी जैसे प्रोपगेंडाबाजों ने तो उन्हें फेक ब्यूटी के नाम पर घेरने का प्रयास किया। क्या कहा था जाह्नवी कपूर ने? जाह्नवी कपूर ने बांग्लादेश में हिंदू व्यक्ति दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या की निंदा करते हुए इंस्टाग्राम स्टोरी पोस्ट की थी। गुरुवार (25 दिसंबर 2025) की रात जाह्नवी कपूर ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में बांग्लादेश में हुई इस हत्या को ‘बर्बर’ बताया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा और कट्टरता के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और इसमें किसी तरह की नाराजगी नहीं होनी चाहिए।                           ...

ऑस्ट्रेलिया के आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ निकला तो इज़रायल उसका गाज़ा बना देगा; ऑस्ट्रेलिया को मुस्लिमों के लिए उदारता छोड़ देनी चाहिए; Victim Card को पैरों में रोंदना होगा

सुभाष चन्द्र पकिस्तानपस्त नेताओं, पार्टियों और मुस्लिम देशों को आतंकवाद पर victim card खेलना बंद करना होता। समय आ गया है कि  victim card खेलने वालों को भी आतंकी माना जाए। इन्हीं बेशर्म और उपद्रवियों द्वारा इस्लामिक आतंकवाद का मकसद एक ही है।     ऑस्ट्रेलिया जैसे केवल पौने 3 करोड़ की आबादी वाले देश को अब मुस्लिमों के लिए उदारता छोड़ देनी चाहिए ।  वैसे तो ये उदारता दुनिया भर के देशों को छोड़ देनी चाहिए क्योंकि इस उदारता के चलते कई यूरोपीय देशों ने मुस्लिमों को शरण दी जो आज उन्हें ही आग में झोंक रहे हैं । लेखक  चर्चित YouTuber  कल यहूदियों के हनुक्का त्योहार पर दो मुस्लिम लड़को ने 2000 यहूदियों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा कर 12 लोगों की हत्या कर दी ।  एक आतंकी मारा गया और दूसरा नावीद अकरम पाकिस्तान मूल का है जिसने पाकिस्तान में भी पढाई की है और अभी सिडनी के  al-Murad Institute में पढता है ।  यह अल मुराद संस्थान को चलाने वाला Adam Ismail है  और वो teacher है who specializes in Quran recitation/Tajweed and memorization programs, offering both Zoo...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)