आज जिस तरह देश खालिस्तान आतंकवाद की आग में जल रहा है, उसकी जिम्मेदार सिर्फ कांग्रेस ही है। जब पंजाब कांग्रेस के हाथ से निकल रहा था तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने संत भिंडरांवाला से गुप्त समझौता किया और जब पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनने पर संत ने जब इंदिरा गाँधी से सिखों के लिए किए वायदों को पूरा करने को कहा उस संत को आतंकवादी बता दिया। यहाँ से शुरू हुई खालिस्तान की लड़ाई। सवाल यह है कि जब मांगें अनुचित थी तो मानी क्यों? Kashmir Files से लेकर अब ' सतलुज' तक जितनी भी फिल्मों का निर्माण हुआ है सभी में कांग्रेस की काली करतूतों का पर्दाफाश हुआ है। यानि कांग्रेस 'Divide and rule' की नीति पर काम कर जनता को गुमराह कर देशभक्त पार्टी का स्वांग करती रही। आज भी क्या हो रहा है सबके सामने है। पहले सोनिया गाँधी और अब राहुल गाँधी की हरकतें देख लो। जो हमेशा उपद्रव होने की बात करते रहते हैं। विदेशों में अपने आकाओं से घुट्टी लेकर आते हैं और संसद बाधित करते हैं। LoP होते हुए कोई ऐसी बात नहीं की जिस पर सत्ता पक्ष सोंचने को मजबूर हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में देश का...
खंजर से चीरी कोख, निर्वस्त्र की गई बहन… सब भूल जाओ, जिया की चाँद बाली पर लिखो नज्म: Arfa Khanum को क्यों भायी इम्तियाज अली की ‘मैं वापस आऊँगा’?
घर की माँ-बहन-बेटी का चाहे बलात्कार हो जाए, गर्भवतियों की कोख चीर दी जाए, चाहे एक साथ सारी महिलाएँ अपना गला खुद रेतने को मजबूर हो जाएँ… लेकिन आपकी स्मृति में रहनी चाहिए एक मुस्लिम लड़की की चाँद बालियाँ, उसके प्रेम में लिखी गई सिख लड़के की नज्म और लाहौर के सरगोधा की गलियाँ… यही मकसद है 12 जून को पर्दे पर आई इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊँगा’ का। इस फिल्म में कलाकार के तौर पर दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह मुख्य कलाकार हैं। फिल्म कैसी है इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि इसकी तारीफ करने वालों में एक नाम आरफा खानम शेरवानी जैसों का भी है जिन्हें ये फिल्म विभाजन के जख्मों पर मरहम लगाने वाली एक ‘कविता’ जैसी लगती है। आरफा इस फिल्म को देखकर रोने लगती हैं क्योंकि उनसे ये नहीं देखा जाता है कि कैसे इतने समय बाद पर्दे पर कीनू की कहानी के रूप में उनके नैरेटिव का कंटेंट आया है। इंटरनेट पर फिल्म के बारे में पढ़ने चलेंगे तो पता चलेगा इम्तियाज अली ने कहने को ये फिल्म विभाजन के दर्द को बयाँ करते हुए बनाई है, लेकिन जब देखेंगे तो खुद से सवाल पूछेंगे कि क्या सच में ये फिल्म विभाजन की त्रासदी का सही चित्र...