केजरीवाल स्वभाव से एक नम्बर के तानाशाह हैं। वे नहीं चाहते कि उन्हें काम करने के लिए किसी का सहयोग लेना पड़े या किसी के साथ मिल जुल कर काम करना पड़े। जब उन्होंने देखा कि दिल्ली में उप राज्यपाल ही बॉस होता है तो उन्होंने उप राज्यपाल के साथ जंग शुरू कर दी और जब उन्हें पता चला कि उप राज्यपाल का भी एक बॉस होता है तो केजरीवाल ने उस बॉस के खिलाफ भी जंग शुरू कर दी और काम धाम छोड़कर मोदी मोदी की रट लगानी शुरू कर दी। तानाशाह छवि वाले केजरीवाल नहीं चाहते कि उन्हें कोई फैसला लेने से पहले या कोई कानून बनाने से पहले किसी से पूछना पड़े या किसी के पास फाइल भेजनी पड़े, वे नहीं चाहते कि उन्हें उप-राज्यपाल या केंद्र सरकार के पास दिल्ली सरकार से जुडी फाइलें भेजनी पड़ें, इसलिए वे लड़ाई झगडे पर उतर जाते हैं। वास्तव में केजरीवाल किसी के भी नीचे काम नहीं करना चाहते, शायद इसीलिए वे प्रशासनिक पद पर काम नहीं कर पाए और इनकम टैक्स अधिकारी का पद छोड़कर NGOगिरी का काम शुरू कर दिया और विदेशों से फंड का जुगाड़ करके भारत की बर्बादी में विदेशी एजेंसियों का साथ देना शुरू कर दिया। नजीब जंग के अंडर ही नहीं, केजरीवाल प्रधानमं...