आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार जैसी सम्भावनाएं थीं, कर्नाटक चुनाव परिणाम वैसे ही आए हैं, और उसका कारण है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई लड़ने के बावजूद भ्रष्टाचार के आरोप में जेल गए येदियुरप्पा को मुख्यमन्त्री घोषित करते ही, दिल्ली विधान सभा चुनाव सामने आ गए थे। क्योकि किरण बेदी को दिल्ली का मुख्यमन्त्री बनाए जाने पर भाजपा की हार दीवारों पर लिखी जा चुकी थी और बेदी भी उतनी ही मतों से हारी, जितनी मतों से हार की उम्मीद की जा रही थी। जातीय समीकरण के आगे भाजपा ने भ्रष्टाचार के आरोपी को ही मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। जिस तरह लालू यादव के वर्षों लम्बित पड़े केसों को जीवित कर, जमानत पर बाहर आये लालू को पुनः जेल भेज दिया गया, सम्भव है कांग्रेस जेडीएस को अपना समर्थन कर येदियुरप्पा की फाइल को खोल लालू की तर्ज़ पर येदियुरप्पा को संकट में डाल सकती है। देखना यह है कि चूहा-बिल्ली की दौड़ में कौन जीतता है? जहाँ तक प्रधानमन्त्री मोदी की बात है, उनकी ईमानदारी पर उनके घोर विरोधियों को भी कोई शंका नहीं। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद पंजाब को छोड़कर जितने भी राज्यों में विधानसभा चु...