संसदीय सचिव बनाए गए आम आदमी पार्टी (आप) के 21 सदस्यों की सदस्यता रद्द करने के मामले की सुनवाई जारी रखने के चुनाव आयोग के फैसले के बाद दिल्ली में मध्यावधि चुनाव की आहट सुनाई देने लगी है। एक-दो सुनवाई के बाद आयोग अपना फैसला राष्ट्रपति को सौंप देगा। आयोग इन विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की भी सिफारिश करेगा क्योंकि अगर उसे ऐसा नहीं करना था तो हाई कोर्ट के फैसले को आधार मान कर वह अपनी सुनवाई रोक देता। हाई कोर्ट ने संसदीय सचिवों के पद को गैरकानूनी माना था। पंजाब विधानसभा चुनाव, दिल्ली नगर निगम चुनाव और राजौरी गार्डन उपचुनाव हारने के साथ-साथ पार्टी में भारी बगावत झेल रही आप के सामने मध्यावधि चुनाव कराने की सिफारिश करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। सीधे चुनाव होने पर तो उसकी जीत की संभावना कम ही दिख रही है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर उनके बेहद करीबी साथी कपिल मिश्र ने बीते दिनों जिस तरह के आरोप लगाए, केजरीवाल उन आरोपों की सफाई भी नहीं दे पा रहे हैं। वहीं आप के बड़े नेता कुमार विश्वास को भी पार्टी में हाशिए पर डाल दिया गया है। लाभ के पद पर रहने के कारण जिन विधायकों की सदस्यता जाने का ख...