गुंजन अग्रवाल : इस्तांबुल, तुर्की के प्रसिद्ध राजकीय पुस्तकालय ‘मक्तब-ए-सुल्तानिया’ (सम्प्रति मक्तब-ए-ज़म्हूरिया), जो प्राचीन पश्चिम एशियाई-साहित्य के विशाल भण्डार के लिए प्रसिद्ध है, के अरबी विभाग में प्राचीन अरबी-कविताओं का संग्रह ‘शायर-उल्-ओकुल’ हस्तलिखित ग्रन्थ के रूप में सुरक्षित है। इस ग्रन्थ का संकलन एवं संपादन बग़दाद के ख़लीफ़ा हारून-अल्-रशीद के दरबारी एवं सुप्रसिद्ध अरबी-कवि अबू-अमीर अब्दुल अस्मई ने किया था, जिसे ‘अरबी-काव्य-साहित्य का कालिदास’ कहा जाता है। लेखक सन् 1792 ई. में तुर्की के प्रसिद्ध शासक सलीम-III (1789-1807) ने अत्यन्त यत्नपूर्वक किसी प्राचीन प्रति के आधार पर इसे लिखवाया था। इस दुर्लभ हस्तलिखित ग्रन्थ के पृष्ठ लेखनयोग्य कच्ची रेशम की एक कि़स्म ‘हरीर’ के बने हैं, जिसके कारण यह सर्वाधिक मूल्यवान पुस्तकों में से एक है। इस ग्रन्थ के प्रत्येक पृष्ठ को सुनहले सजावटी किनारी (बॉर्डर) से सुसज्जित किया गया है। जावा एवं अन्य स्थानों पर पाई गई अनेक प्राचीन संस्कृत-पाण्डुलिपियाँ ऐसे ही सुनहली किनारी से सुसज्जित हैं। इस महान् ग्रन्थ का प्रथम अंग्रे़ज़ी...