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अटल जी न होते तो हर हाथ में न होता मोबाइल, टेलीकॉम पॉलिसी बदलकर ला दी थी क्रांति

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  जब भी देश या किसी प्रदेश में तत्कालीन भारतीय जनसंघ वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार ही नहीं बनी, बल्कि अपनी अमिट छाप जरूर छोड़ी है। 1967 में तत्कालीन दिल्ली महानगर परिषद् वर्तमान विधान सभा चुनावों में प्रो विजय कुमार मल्होत्रा के नेतृत्व में जनसंघ महानगर परिषद्(विधान सभा) में सत्तारूढ़ होने पर दिल्ली को विकास राह दिखाई। दिल्ली में सबसे पहला फ्लाईओवर शादीपुर पर उस समय बना था। यानि दिल्ली में फ्लाईओवर का श्रीगणेश भारतीय जनसंघ(वर्तमान भाजपा) द्वारा ही किया गया था। फिर मीना बाजार, जामा मस्जिद को विकसित भी तत्कालीन प्रो विजय कुमार मल्होत्रा के ही कार्यकाल में हुआ था। दिल्ली के अन्य पार्कों से अधिक इस पार्क के विकास पर खर्च हुआ था। यहाँ लगे फुव्वारे मजबूर होकर बंद करने पड़े, क्योंकि सुबह उन फुव्वारों के तालाब में शौच तैरता था। लेकिन आज तो इस पार्क की बहुत ही शोचनीय स्थिति है। बगल में सुभाष पार्क तो मेट्रो के हवाले है।  केन्द्र में सरकार बनने पर भारत रत्न अटल बिहारी ने भारत को विकास की राह दिखाकर, क्रान्ति ले आए थे। आज भारत म...

अटल बिहारी वाजपेयी : जिनकी जवाहरलाल नेहरू भी करते थे तारीफ, इंदिरा गांधी लेती थीं सलाह

अटल बिहारी वाजपेयी के ओजस्‍वी भाषणों के मुरीद देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी थे। देश में 1957 में दूसरे संसदीय चुनाव में वाजपेयी उत्‍तर प्रदेश के बलरामपुर से पहली बार जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। तब उन्‍होंने सदन में जो भाषण दिया था, उसने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नेहरू को खासा प्रभावित किया था। विदेश मामलों में वाजपेयी की जबरदस्‍त पकड़ ने नेहरू को भी उनका कायल बना दिया था। हालांकि तब उनकी गिनती 'बैक बेंचर्स' यानी संसद में पिछली बेंचों पर बैठेने वाले सांसद के तौर पर होती थी, पर वह दौर ही कुछ ऐसा था कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद नेता एक-दूसरे को परस्‍पर सम्‍मान देते थे और उनकी अनदेखी करने की बजाय महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर उनकी राय को तवज्‍जो देते थे। नेहरू और वाजपेयी से जुड़ा एक किस्‍सा मशहूर है कि एक बार जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भारत दौरे पर आए तो नेहरू ने वाजपेयी का उनसे परिचय यह कहते हुए कराया कि 'ये विपक्ष के उभरते हुए युवा नेता हैं। हमेशा मेरी आलोचनाएं करते हैं, लेकिन मैं भविष्‍य को लेकर इनमें बहुत संभावनाएं देखता हूं।' यहां तक कि एक बार उन्‍होंने वाजपेयी का...

अटल की योजना ने दी थी अमेरिका-यूरोप को टक्कर, सड़कों की बदल दी थी सूरत

24 अक्‍टूबर 1998 को तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्‍वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग परियोजना की घोषणा की थी, जिसे उस समय की दुनिया की सबसे बड़ी हाईवे परियोजना माना जाता है। 5846 कि.मी. का स्वर्णिम चतुर्भुज (जीक्यू) राजमार्ग मूल रूप से राजमार्गों का एक नेटवर्क है, जो देश के चार प्रमुख महानगरों को चार दिशाओं – दिल्ली (उत्तर), चेन्नई (दक्षिण), कोलकाता (पूर्व) और मुंबई (पश्चिम) में जोड़ता है – जिससे एक चतुर्भुज बन जाता है और इसीलिए इसका नाम गोल्डन क्वाड्रिलेटरल (स्वर्णिम चतुर्भुज) है। 2001 में हुई शुरू  इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य आधिकारिक तौर पर 2001 में शुरू हुआ। इसके 2006 तक पूरा होने का अनुमान था, परन्तु यह वास्तव में जनवरी  2012  में पूरी हुई। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना में नए एक्सप्रेस हाईवे का निर्माण शामिल है, जिसमें मौजूदा राजमार्गों के नवीनीकरण के लिए चार या छह लेन का विस्तार और मरम्मत शामिल है। परियोजना से जुड़े प्रमुख शहर स्वर्णिम चतुर्भुज भारत के प्रमुख शहरों के बीच कुशल परिवहन लिंक प्रदान करता है जैसे नई दिल्ली; जयपुर, उदयपुर, ...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)