24 अक्टूबर 1998 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग परियोजना की घोषणा की थी, जिसे उस समय की दुनिया की सबसे बड़ी हाईवे परियोजना माना जाता है। 5846 कि.मी. का स्वर्णिम चतुर्भुज (जीक्यू) राजमार्ग मूल रूप से राजमार्गों का एक नेटवर्क है, जो देश के चार प्रमुख महानगरों को चार दिशाओं – दिल्ली (उत्तर), चेन्नई (दक्षिण), कोलकाता (पूर्व) और मुंबई (पश्चिम) में जोड़ता है – जिससे एक चतुर्भुज बन जाता है और इसीलिए इसका नाम गोल्डन क्वाड्रिलेटरल (स्वर्णिम चतुर्भुज) है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से पूरा देश ग़मगीन है। जनता हो या विपक्ष सभी उनके चले जाने से उदास हो गए हैं। अटल जी जितने अच्छे वक्ता थे उतने ही अच्छे लेखक भी। उन्हें लिखने का काफी शौक था। दिवगंत गजल गायक जगजीत सिंह ने उनकी लिखी कविता 'क्या खोया क्या पाया' को अपनी आवाज भी दी थी।
लेकिन क्या आपको पता है कि अटल बिहारी वाजपेयी एक एक्ट्रेस के बहुत बड़े फैन थे। वह एक्ट्रेस कोई और नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की मशहूर एक्ट्रेस और मथुरा से बीजेपी की सांसद हेमा मालिनी हैं।
अटल जी को हेमा मालिनी का अंदाज इतना पसंद था कि उन्होंने साल 1972 में रिलीज हुई फिल्म सीता और गीता को करीब 25 बार देखा था। इस बात का खुलासा करने वालीं भी खुद हेमा मालिनी ही थी। इस फिल्म में हेमा मालिनी का डबल रोल था और फिल्म के निर्देशक रमेश सिप्पी थे।
फिल्म में हेमा मालिनी के अलावा धर्मेंद्र और संजीव कुमार भी अहम भूमिका में थे। इस फिल्म के लिए हेमा मालिनी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला था।
अक्सर ये गाना गुनगुनाते थे अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी को अमिताभ और राखी पर फिल्माया गाना 'कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है' बेहद पसंद था। यह गाना उनके दिल के काफी करीब था। मालूम हो कि ये गाना साल 1976 में आई फिल्म कभी-कभी का है। इसके अलावा अटल जी को देवदास और बंदिनी फिल्म भी बहुत पसंद है।
खाने में बेहद पसंद थी ये चीजें
गौरतलब है कि अटल जी को ग्वालियर के बहादुरा के बूंदी के लड्डू और दौलतगंज की मंगौड़ी बेहद पसंद थी। वह शाकाहारी की जगह मांसाहारी खाना ज्यादा पसंद करते थे।
उन्हें झींगा मछली खाना बहुत अच्छा लगता था। वो अक्सर प्रॉन की डिश खाते थे। अटल जी भांग का सेवन भी करते थे। उनके लिए खास तौर उज्जैन से भांग आती थी। वह मिठाई के भी दीवाने हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वह ग्वालियर जाते रहते थे जहां वह लड्डू, जलेबी, कचौड़ी सबका सेवन करते थे।
2001 में हुई शुरू
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य आधिकारिक तौर पर 2001 में शुरू हुआ। इसके 2006 तक पूरा होने का अनुमान था, परन्तु यह वास्तव में जनवरी 2012 में पूरी हुई। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना में नए एक्सप्रेस हाईवे का निर्माण शामिल है, जिसमें मौजूदा राजमार्गों के नवीनीकरण के लिए चार या छह लेन का विस्तार और मरम्मत शामिल है।
परियोजना से जुड़े प्रमुख शहर
स्वर्णिम चतुर्भुज भारत के प्रमुख शहरों के बीच कुशल परिवहन लिंक प्रदान करता है जैसे नई दिल्ली; जयपुर, उदयपुर, अजमेर (राजस्थान); अहमदाबाद, गांधीनगर (गुजरात); मथुरा, वाराणसी, आगरा, कानपुर (उत्तर प्रदेश); मुंबई और पुणे (महाराष्ट्र); बंगलुरू (कर्नाटक); विशाखापटट्नम (आंध्र प्रदेश); चेन्नई (तमिलनाडु); भुवनेश्वर (ओडिशा), कोलकाता (पश्चिम बंगाल) आदि।
स्वर्णिम चतुर्भुज के चारों खण्ड
खण्ड-एक : यह राष्ट्रीय राजमार्ग 2 (एनएच 2) को दिल्ली से कोलकाता तक जोड़ता है। कुल विस्तार 1454 कि.मी. है दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों तक विस्तारित हैं। प्रमुख शहरों में दिल्ली, मथुरा, फरीदाबाद, आगरा, इलाहाबाद, फिरोजाबाद, कानपुर और वाराणसी शामिल हैं।
खण्ड दो : यह कोलकाता से चेन्नई, एनएच 60 (खड़गपुर से बालासोर) और एनएच 5 (बालासोर से चेन्नई) तक एनएच 6 को कवर करता है। कुल खंड विस्तार 1684 कि.मी. है। राज्यों में पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और तमिलनाडु शामिल हैं।
खण्ड तीन : कुल विस्तार 1290 कि.मी. है इसमें एनएच 4 (मुंबई से बेंगलुरू), एनएच 7 (बेंगलुरू से कृष्णागिरि, तमिलनाडु) और एनएच 46 (कृष्णागिरी के पास चेन्नई) शामिल हैं। राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं।
खण्ड चार : राष्ट्रीय राजमार्ग 8 (दिल्ली से किशनगढ़), राष्ट्रीय राजमार्ग 79 ए (अजमेर बायपास), एनएच 79 (नसीराबाद से चित्तौड़गढ़) और एनए 76 (चित्तौड़गढ़ से उदयपुर) के कुछ हिस्सों को शामिल करता है, यह खंड विस्तार 149 कि.मी. है। राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और नई दिल्ली शामिल हैं। दिल्ली, अजमेर, उदयपुर, गुरुग्राम, जयपुर, गांधीनगर, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ता है|
अवलोकन करें:--
25 बार देखी थी "सीता और गीता"खण्ड दो : यह कोलकाता से चेन्नई, एनएच 60 (खड़गपुर से बालासोर) और एनएच 5 (बालासोर से चेन्नई) तक एनएच 6 को कवर करता है। कुल खंड विस्तार 1684 कि.मी. है। राज्यों में पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और तमिलनाडु शामिल हैं।
खण्ड तीन : कुल विस्तार 1290 कि.मी. है इसमें एनएच 4 (मुंबई से बेंगलुरू), एनएच 7 (बेंगलुरू से कृष्णागिरि, तमिलनाडु) और एनएच 46 (कृष्णागिरी के पास चेन्नई) शामिल हैं। राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं।
खण्ड चार : राष्ट्रीय राजमार्ग 8 (दिल्ली से किशनगढ़), राष्ट्रीय राजमार्ग 79 ए (अजमेर बायपास), एनएच 79 (नसीराबाद से चित्तौड़गढ़) और एनए 76 (चित्तौड़गढ़ से उदयपुर) के कुछ हिस्सों को शामिल करता है, यह खंड विस्तार 149 कि.मी. है। राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और नई दिल्ली शामिल हैं। दिल्ली, अजमेर, उदयपुर, गुरुग्राम, जयपुर, गांधीनगर, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ता है|
अवलोकन करें:--
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से पूरा देश ग़मगीन है। जनता हो या विपक्ष सभी उनके चले जाने से उदास हो गए हैं। अटल जी जितने अच्छे वक्ता थे उतने ही अच्छे लेखक भी। उन्हें लिखने का काफी शौक था। दिवगंत गजल गायक जगजीत सिंह ने उनकी लिखी कविता 'क्या खोया क्या पाया' को अपनी आवाज भी दी थी।
लेकिन क्या आपको पता है कि अटल बिहारी वाजपेयी एक एक्ट्रेस के बहुत बड़े फैन थे। वह एक्ट्रेस कोई और नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की मशहूर एक्ट्रेस और मथुरा से बीजेपी की सांसद हेमा मालिनी हैं।
अटल जी को हेमा मालिनी का अंदाज इतना पसंद था कि उन्होंने साल 1972 में रिलीज हुई फिल्म सीता और गीता को करीब 25 बार देखा था। इस बात का खुलासा करने वालीं भी खुद हेमा मालिनी ही थी। इस फिल्म में हेमा मालिनी का डबल रोल था और फिल्म के निर्देशक रमेश सिप्पी थे।
फिल्म में हेमा मालिनी के अलावा धर्मेंद्र और संजीव कुमार भी अहम भूमिका में थे। इस फिल्म के लिए हेमा मालिनी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला था।
अक्सर ये गाना गुनगुनाते थे अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी को अमिताभ और राखी पर फिल्माया गाना 'कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है' बेहद पसंद था। यह गाना उनके दिल के काफी करीब था। मालूम हो कि ये गाना साल 1976 में आई फिल्म कभी-कभी का है। इसके अलावा अटल जी को देवदास और बंदिनी फिल्म भी बहुत पसंद है।
खाने में बेहद पसंद थी ये चीजें
गौरतलब है कि अटल जी को ग्वालियर के बहादुरा के बूंदी के लड्डू और दौलतगंज की मंगौड़ी बेहद पसंद थी। वह शाकाहारी की जगह मांसाहारी खाना ज्यादा पसंद करते थे।
उन्हें झींगा मछली खाना बहुत अच्छा लगता था। वो अक्सर प्रॉन की डिश खाते थे। अटल जी भांग का सेवन भी करते थे। उनके लिए खास तौर उज्जैन से भांग आती थी। वह मिठाई के भी दीवाने हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वह ग्वालियर जाते रहते थे जहां वह लड्डू, जलेबी, कचौड़ी सबका सेवन करते थे।
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