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लाल किले में मिला छुपा हुआ भूमिगत कक्ष, इस काम के लिए होता था इस्तेमाल

भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के कर्मी को लाल किले में छुपे हुआ भूमिगत कक्ष मिला है। कहा जा रहा है कि शायद इस कक्ष का इस्तेमाल गोला बारूद रखने के लिए किया जाता होगा। जब लाहौरी गेट जो कि लाल किले का मुख्य द्वार है की सफाई की जा रही थी तभी यह कक्ष मिला। एएसआई अधिकारी ने पहचान न बताने की शर्त पर कहा कि तहखाना पूरी तरह से मिट्टी से भरा हुआ था। इसमें विस्फोटक और अग्नेय शस्त्र जैसी कोई चीज नहीं मिली है। अधिकारी ने यह भी बताया कि कक्ष (1658-1707) मुगल काल के दौरान औरंगजेब या फिर ब्रिटिश सेना ने बनाया होगा। यह कक्ष लाखौरी ईंटों से बनाया गया है और अंडाकार गुंबददार डिब्बे की आकृति में बनाया गया है। इसकी लंबाई 6 मीटर, चौड़ाई 2 मीटर और ऊंचाई 3 मीटर है। यह कक्ष पैडस्टल से कुछ दूरी पर स्थित है, जहां 15 अगस्त को झंडा लहराया जाता है। अवलोकन करें:-- http://nigamrajendra28.blogspot.in/2017/10/blog-post_97.html NIGAMRAJENDRA28.BLOGSPOT.IN लाल किला शाहजहाँ ने नहीं अनन्तपाल तोमर द्वितीयने बनवाया था इस पाक्षिक को सम्पादित करते अपने बहुचर्...

पाठ्यपुस्तकों में भ्रान्तियाँ : कब जागेंगे हम ?

कोई भी राष्ट्र अपनी मूल राष्ट्रीय अस्मिता, राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक मूल्यों को अपने ही हाथों नष्ट करके, कभी भी विश्व में सम्मान अर्जित नहीं कर सकता। दुर्भाग्यवश विगत आधी शताब्दी में भारत के कतिपय लेखकों,  # इतिहासकारों ,  # पुरातत्त्वविदों  ने अपने लिखे ग्रंथों में भारतीय इतिहास को तोड़-मरोड़ और विकृत करके भारतीय गौरव को धूलि-धूसरित करने का प्रयास किया है। यह एक निर्विवाद तथ्य है कि विगत दो शताब्दियों में  # भारतीय_इतिहास  पर लिखे गए अनेक ग्रंथों में अनेक ग़लत, भ्रामक तथा अनैतिहासिक तथ्यों की भरमार है। अंग्रेज़ी-शासनकाल के दौरान अंग्रेज़-शासकों ने यूरोपीय इतिहासकारों को भारतीय इतिहासलेखन का कार्य सौंपा। लगभग दो सौ  # यूरोपीय_इतिहासकारों  तथा  # प्राच्यविदों  (इण्डोलॉजिस्ट्स) ने भारतीय इतिहास लेखन के लिए मूल भारतीय ग्रंथों को आधार न बनाकर यूरोपीय इतिहास-ग्रंथों को आधार बना, अपनी मनमर्जी, भारतीय इतिहास के तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा तथा गौरवशाली भारत को दीन-हीन के रूप में प्रस्तुत किया। उस कालखण्ड में अनेक  # भारतीय_इतिहासकारों  ...

कसम राम की खाते हैं, कोर्ट को धोखा देने वालों को सजा नहीं दिलवाएंगे

रामजन्मभूमि मंदिर के मुख्य द्धार को ध्यान से देखिए, निर्णय लीजिए क्या यह मस्जिद हो सकती है? आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या में हुई खुदाई में मिले समस्त सबूत पेश किए जाएँ, और उन लोगों के विरुद्ध कोर्ट को धोखा देने के आरोप में दण्डित किया जाए। अयोध्या खुदाई में मन्दिर के इतने अधिक प्रमाण मिले थे, अगर उन्हें कोर्ट में पेश किया जाता, दुनियाँ की कोई अदालत अयोध्या में मस्जिद बनने की इजाजत नहीं देती। लेकिन मस्जिद मुद्दे पर मालपुए खाने वालों ने कोर्ट में केवल एक खम्बा बता कर, केवल कोर्ट ही नहीं समस्त देश को धोखा दिया है। बुद्धिजीवी मुसलमान अच्छी तरह से जानता है कि कुर्सी के भूखे नेताओं ने इस मुद्दे को उलझा रखा है। मुस्लिम पक्ष हर तरह से निराधार है, हिन्दू जयचन्दों की तरह ये लोग भी अपनी जेबें भर रहे हैं।  एक बात और, जब तत्कालीन प्रधानमन्त्री चंद्रशेखर ने वास्तविकता को स्वीकार कर और बातचीत स्तर से बाबरी पक्षकारों का भागना, प्रमाणित तथ्यों को अध्ययन कर जज को घर बुलाकर "इस मुद्दे पर तारीख नहीं फैसला चाहिए",  इतना निर्भीक निर्णय लेना वास्तव में ...

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