राजनीति भी क्या अजब चीज़ है, कब गिरगिट की तरह रंग बदल ले, कहना असम्भव है। आदित्य नाथ योगी के मुख्यमन्त्री बनते ही मुलायम सिंह की बहु अपर्णा यादव का समाजवादी पार्टी की घोर विरोधी भाजपा की शरण में जाना, गौ प्यार से मुख्यमन्त्री को रिझाने का प्रयास करना, अपर्णा की राजनीतिज्ञ बुद्धि को जरूर प्रमाणित करता है, लेकिन यह अपने इस उद्देश्य में कितनी सफल हो पाएंगी, समय के गर्भ में छिपा है। इतना जरूर है कि आदित्य नाथ मुख्यमंत्री बाद में पहले एक योगी है और एक योगी को यजुर्वेद और ऋग्वेद के साथ-साथ अथर्ववेद और सामवेद का ज्ञान होता है, तो शायद योगी पर इन प्रलोभनों का लेशमात्र भी प्रभाव नहीं पड़ने वाला। जो घोटाला उभर कर आया है, उस पर कार्यवाही तो अवश्य होगी और उसकी आग से अखिलेश तो क्या अपर्णा का भी बचना शायद ही सम्भव हो। और गौ की आड़ में किए घोटाले को योगी शायद ही हल्के में लें। उत्तर प्रदेश सपा सरकार में सरकारी खजाने से पैसों के हेर फेर का मामला सामने आया है. आरटीआई कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने खुलासा किया है कि अखिलेश सरकार में गो सेवा आयोग ने सरकारी फंड की 86 फीसदी रकम...