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दूसरी स्‍वेत क्रांति तैयारी में मोदी सरकार, स्‍कूलों तक दूध पहुंचाने की है तैयारी

आर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार  मोदी सरकार ने दूध के किसानों को और ज्‍यादा फायदा देने के लिए मेगा प्‍लान बनाया है। इसके तहत सरकार ज्‍यादा से ज्‍यादा दूध की खपत बढ़ाएगी। सरकार अपने इस मेगा प्‍लान के तहत दूसरी स्‍वेत क्रांति करने की तैयारी में है। इसके तहत एक तरफ जहां दूध से जुड़े प्रोडक्‍ट के एक्‍सपोर्ट पर 10 फीसदी इन्‍सेंटिव दिया जाएगा, वहीं दूसरी ओर रेलवे स्‍टेशन से लेकर सरकारी स्‍कूलों तक में दूध पहुंचाने का भी प्रस्‍ताव है। केंद्र सरकार के मंत्रियों के एक समूह ने दूध और दूध से जुड़े प्रोडक्‍ट को लेकर यह प्रस्‍ताव दिया है। लगता था कि मोदी सरकार के आने से अनावश्यक ढोल  नहीं पीटेगी, लेकिन मोदी सरकार भी पूरी तरह से  पिछली सरकारों की भाँति काम कर रही है। सरकारी स्कूलों में पहली बार दूध नहीं भेजा जा रहा है, जब मै स्वयं नगर निगम के स्कूल में पढ़ता था, प्रतिदिन पहली से पांचवीं कक्षा के छात्र/छात्रों को स्कूल में प्रति छात्र एक पाव दूध वितरित होता था। इतना ही नहीं, रोज कटरों में पाव/आधा सेर दूध वितरित होता था। फिर दिल्ली में महानगर परिषद्(वर्तमान विधान सभा) में जब 1967...

महज 170 घंटे के अंदर ऐसा करने वाले पहले सीएम योगी आदित्यनाथ…सकते में विपक्ष !

18 मार्च को उत्तर प्रदेश  के मुख्यमंत्री बने आदित्यनाथ योगी जी ने शपथ ली। फैसले लेने के बाद कुछ लोग खुश दिखे तो कुछ नाखुश नज़र आए। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद के पहले हफ्ते में ही मुख्यमन्त्री योगी जी ने जिस निडरता और जिस तेजी से एक के बाद एक यूपी के हित में फैसले लिए उससे साफ दिख रहा है कि वह कुछ अच्छा और अलग करने की सोच रहे हैं और वह इन कामों को पूरा करेगें। विकास को देखते हुए इस एक हफ्ते में योगी ने कई फैसले लिए हैं, और उनकी रफ्तार देख एेसा लग रहा है कि वे अपने फैसलों पर खरा उतरेंगे। जैसे ही यूपी में बीजेपी सत्ता में आई और योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद संभाला तो काम भी शुरू हो गया सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपनी कुर्सी पर बैठते ही धड़ाधड़ फैसले लेकर सबको चौंका दिया है| सीएम बनते ही योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में ताबड़तोड़ बैठकों का दौर जारी कर दिया और फिर एक के बाद एक बड़े-बड़े फैसले लिए | मुख्यमंत्री योगी  ने गोरखपुर के अपने दौरे के दौरान अपनी टीम को कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देते हुए कहा कि जो लोग 18-20 घंटे काम करना चाहते हैं, वे ही उनके साथ...

एक वो भी दौर था शिक्षा का

ये वो दौर था जब सरकारी स्कूलों में गज़ब का क्वालिटी एजुकेशन होता था, ना एसी वाली क्लास रूम और न एसी वाली बस, पानी पीने को वही लाइन से लगे हुए नल, धूल मिट्टी में लोट लोट के दौड़ भाग करके खेलना, तब 15 अगस्त और 26 जनवरी को स्कूल नहीं आने की सजा भी मिलती थी, इस दौर में स्कूल में कुछ शैतानी करते पकड़े जाने पर गुरु जी तो कुटाई करते ही थे, और शिकायत कही घर तक आ गयी तो घर में जो कुटाई पड़े वो अलग से बोनस टाइप फील होता था, तब परीक्षाएं इतने हल्के में नहीं ली जाती थी, परीक्षा का नाम सु न के अजीब सी घबराहट हो जाती थी, और जी तोड़ मेहनत के साथ पढ़ाई शुरू,  फिर स्कूल में अच्छे नंबर लेकर अच्छे कॉलेज में दाखिला, तब कॉलेज के प्रिंसिपल, एचओडी देश के राष्ट्रपति से भी ज्यादा पॉवरफुल लगते थे, कॉलेज में सर्वसुविधा युक्त जैसी तो कोई बात नहीं होती थी फिर भी वहां से पढ़ने को बच्चो की होड़ सी लग जाती थी, क्या गज़ब का नॉलेज होता था उन पढ़ाने वालो का, जिन्हे हम सही मायने में गुरु कहते है, वो क्लास में आके एक बच्चे से सिर्फ सब्जेक्ट का सिलेबस पूछ के बिन कोई किताब देखे शुरू से लेके आखिरी तक का हर कांसेप...

स्कूलों में राष्ट्रीय गान को सरकार कोई भी हो गंभीरता से ले

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद    शहर के एम ए कान्वेंट स्कूल की प्रिंसिपल सहित आठ टीचर्स ने राष्ट्रगान गाने की पाबंदी होने पर इस्तीफा दे दिया। मामले में प्रशासन की ओर से जांच का आदेश देकर चुप्पी साध ली गई है। 12 साल से चल रहे इस स्कूल में कभी राष्ट्रगान नहीं गाया गया। प्रशासन ने जांच कराई तो पता चला कि यह स्कूल बिना मान्यता के ही चल रहा था। स्कूल पर ताला जड़ दिया गया है। राष्ट्रगान गाना संवैधानिक अधिकार शिक्षकों ने बताया कि राष्ट्रगान गाना संविधान की ओर से दिया गया मूल अधिकार है। स्कूल प्रबंधन के ऐतराज पर हम सबने इस्तीफा दे दिया। स्कूल प्रबंधन ने बताया कि राष्ट्रगान में भारत भाग्य विधाता के 'भारत' शब्द से उन्हें ऐतराज है। राष्ट्रगान से इस भारत शब्द नहीं हटाया जाएगा तो वह स्कूल में राष्ट्रगान गाने नहीं देंगे। 12 साल से कभी नहीं हुआ राष्‍ट्रगान... एमए कॉन्‍वेंट स्‍कूल की स्थापना के बाद पिछले 12 साल से कभी भी यहां राष्ट्रगान नहीं गाया गया। ​लंबे समय से ​इसके खिलाफ स्कूल प्रिंसिपल और उसके साथ की 8 टीचर्स ने जब आवाज उठाई तो मैनेजमेंट ने उन्हें रिजाइन करना पड़ा। ​स...

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To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)