आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कुछ ही माह पूर्व लिखा था कि कांग्रेस में परिवारवाद के विरोध बहुत आक्रोश है, लेकिन बिल्ली के गले में घंटी बांधे कौन? आखिरकार शहजाद पूनावाला ने उस काम को अंजाम दे ही दिया। हालाँकि अपने इस साहसिक काम के लिए उनके अपने ही भाई तहसीन पूनावाला ने शहजाद से पारिवारिक सम्बन्ध तक विच्छेद कर लिए। क्योकि तहसीन रॉबर्ट वाड्रा के बहनोई है, इस कारण गाँधी परिवार के प्रति अपनी वफ़ादारी तो निभा दी, परन्तु इसके परिणाम नहीं सोंचे। वास्तव में, इस परिवार के कारण आज कांग्रेसी अपने आपको कांग्रेसी कहलवाने पर लज्जित हो रहे हैं। इतिहास साक्षी है, इस परिवार ने अध्यक्ष सीता राम केसरी को अपमानित कर दूध में से मक्खी की तरह निकाल बाहर फेंक दिया, तत्कालीन प्रधानमन्त्री नरसिम्हा राव को "नरसिम्हा धोती के नीचे निक्कर पहनता है" कहा कर बदनाम किया ; भूतपूर्व प्रधानमन्त्री लाल बहादुर शास्त्री, जो वर्तमान प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की तुलना में कहीं अधिक अधिक कठोर निर्णय लेने वाले निर्भीक धर्म-निरपेक्ष थे, उन्हें भ्रष्टाचारी कह बदनाम किया, संक्षेप में जो कांग्रेस को वर्तमान स्थित...