आर.बी.एल.निगम, फिल्म समीक्षक सांसों की डोर के आखिरी मोड़ तक बेहतहरीन नगमे लिखने के ख्वाहिशमंद मशहूर गीतकार और पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित कवि गोपालदास सक्सेना ‘नीरज‘ का जुलाई 19 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अस्पताल (एम्स) में निधन हो गया। वह 93 वर्ष के थे। महफिलों और मंचों की शमां रोशन करने वाले नीरज को कभी शोहरत की हसरत नहीं रही। उनकी ख्वाहिश थी तो बस इतनी कि जब जिंदगी दामन छुड़ाए तो उनके लबों पर कोई नया नगमा हो, कोई नई कविता हो। दिल्ली स्थित एम्स में इस फनकार ने गुरुवार शाम 7.35 बजे अंतिम सांस ली। नीरज ने एक बार किसी साक्षात्कार में कहा था,‘‘अगर दुनिया से रुखसती के वक्त आपके गीत और कविताएं लोगों की जबान और दिल में हों तो यही आपकी सबसे बड़ी पहचान होगी। इसकी ख्वाहिश हर फनकार को होती है। उनकी बेहद लोकप्रिय रचनाओं में ‘‘कारवां गुजर गया …….’’ रही : स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लुट गए सिंगार सभी बाग के बबूल से, और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे। कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे! नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई, पांव जब तलक उठें कि जिन्दगी फिसल गई, नीरज न...