संयुक्त राष्ट्र। मोदी की विदेश नीति पर मोदी-विरोधी जो प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं, लगता है, उनकी रातों की नींद जरूर हराम हो गयी होगी। विश्व-पटल पर जिस अंदाज़ में मोदी आतंकवाद मुद्दा उठा रहे थे, उनकी कूटनीति को पाकिस्तान तो क्या भारत में आस्तीन के साँप बने बैठे पाकिस्तान समर्थक कोई नहीं समझ पाया। जहाँ भारतीय नेता आतंकवाद पर अपने वोट-बैंक राजनीति के कारण किसी सख्त निर्णय को लेने में संकोच कर रहे थे, वहीँ मोदी ने वोट-बैंक को धता कर, अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बना कर पाकिस्तान को सरे आम निर्वस्त्र करने में व्यस्त थे। पाकिस्तान अपने कश्मीर मुद्दे पर डटा रहा। और भारत के साथ-साथ बलूचिस्तान जनता पर अत्याचार करता रहा। बलूच जनता पर हो रहे अत्याचारों पर सत्ता के गलियारों में अक्सर यही चर्चा होती थी, "अगर इंदिरा गाँधी होती इस मुद्दे को ईस्ट पाकिस्तान(बांग्लादेश) की तरह हाथों-हाथ ले लेती।" लेकिन इसे मोदी ने लपकने में जरा भी चूक न कर अपनी विदेशनीति एवं दूरदर्शिता का प्रमाण दे दिया। मोदी की इसी दूरदर्शिता के कारण पाकिस्तान के बलूचिस्तान में पिछले कई दिनों से चल रहे बवाल के बीच नव...