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चुनाव आयोग का क्या है औचित्य?

मतदान वाले दिन सड़कों पर आम दिनों की अपेक्षा इतनी अधिक भीड़ होती है कि जनता को इधर से उधर जाने में बड़ी कठिनाई होती है। वास्तव में इतनी भीड़ होती नहीं है जितनी दिखती है। भीड़ होती है उम्मीदवारों की लगने वाली मेजों और उनके शुभचिंतकों द्वारा शान से कुर्सियाँ लगाने से। जब मतदान से एक/दो दिन पूर्व मतदाता पर्चियाँ घर-घर वितरित कर दी जाती हैं, इतना ही नहीं, प्रत्येक मतदान के अंदर चुनाव आयोग के कर्मचारी भी पर्ची बनाने के लिए बैठे होते हैं। और अपना मत डालने के लिए मतदाता को अपना कोई भी पहचान-पत्र लेकर जाना पड़ता है, उस स्थिति में मतदान वाले दिन सड़कों पर मेज-कुर्सी डालकर आने-जाने में अवरोध उत्पन्न करने का कोई औचित्य नहीं।पहचान-पत्र की जरुरत केवल चुनाव आयोग द्वारा वितरित पर्ची पर ही जरुरी नहीं होता, फिर क्यों न मतदाता को चुनाव आयोग की पर्ची न होने की स्थिति में अपना पहचान-पत्र दिखाकर मत डालने की अनुमति होनी चाहिए? बशर्ते मतदाता सूची में उसका नाम हो। यदि किसी बीमार को हॉस्पिटल लेकर जाना हो तो “हे भगवान एम्बुलेंस वाला तो हॉर्न और ब्रेक लगा-लगा कर दुखी हो लेता है।” लेकिन चुनाव आयोग ने आज तक शायद संज...

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shannomagan
To write on general topics and specially on films;THE BLOGS ARE DEDICATED TO MY PARENTS:SHRI M.B.L.NIGAM(January 7,1917-March 17,2005) and SMT.SHANNO DEVI NIGAM(November 23,1922-January24,1983)